भारत और थाईलैंड ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नियम-आधारित व्यवस्था का समर्थन किया: प्रधानमंत्री मोदी
जोहेब पारुल
- 03 Apr 2025, 09:11 PM
- Updated: 09:11 PM
(फोटो के साथ)
(सागर कुलकर्णी)
बैंकाक, तीन अप्रैल (भाषा) भारत और थाईलैंड ने अपने संबंधों को प्रगाढ़ कर रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाने का बृहस्पतिवार को फैसला किया और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में मुक्त, समावेशी एवं नियम आधारित व्यवस्था का समर्थन करते हैं तथा विस्तारवाद के बजाय विकास की नीति में विश्वास करते हैं।
मोदी ने यह टिप्पणी थाईलैंड की अपनी समकक्ष पैतोंगतार्न शिनावात्रा के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के बाद एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में की। इस वार्ता के दौरान उन्होंने द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों पर व्यापक चर्चा की।
मोदी ने शिनावात्रा के साथ हुई बातचीत के बारे में कहा, "हमने भारत के पूर्वोत्तर राज्यों और थाईलैंड के बीच पर्यटन, संस्कृति एवं शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग पर जोर दिया है। हमने आपसी व्यापार, निवेश और व्यवसायों के बीच आदान-प्रदान बढ़ाने पर चर्चा की।"
उन्होंने कहा कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्य उद्योग (एमएसएमई), हथकरघा और हस्तशिल्प में सहयोग के लिए भी समझौते किए गए हैं।
भारत और थाईलैंड ने रणनीतिक साझेदारी की स्थापना को लेकर एक संयुक्त घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए और डिजिटल प्रौद्योगिकियों से लेकर संस्कृति तक के क्षेत्रों में पांच सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर किए।
द्विपक्षीय वार्ता में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल और विदेश मंत्री एस जयशंकर भी मौजूद थे। वार्ता के दौरान दोनों देशों की एजेंसियों ने मानव तस्करी और अवैध प्रवास से निपटने के लिए मिलकर काम करने पर भी सहमति जताई।
थाईलैंड ने हाल ही में म्यांमा में फर्जी नौकरी गिरोह के चंगुल में फंसे 549 भारतीय नागरिकों को वापस लाने में भारत की मदद की थी।
प्रधानमंत्री ने कहा, “हमने साइबर अपराध के शिकार भारतीयों की वापसी में सहयोग देने के लिए थाईलैंड सरकार का आभार व्यक्त किया। हमने इस बात पर सहमति जताई कि हमारी एजेंसियां मानव तस्करी और अवैध प्रवास से निपटने के लिए मिलकर काम करेंगी।”
मोदी ने कहा कि भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति और हिंद-प्रशांत दृष्टिकोण में थाईलैंड का विशेष स्थान है।
उन्होंने कहा, "आज हमने अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। सुरक्षा एजेंसियों के बीच 'रणनीतिक वार्ता' स्थापित करने पर भी चर्चा हुई।"
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत आसियान में एकता और केंद्रीयता का पूर्ण समर्थन करता है।
मोदी ने कहा, "हिंद-प्रशांत क्षेत्र में हम दोनों एक मुक्त, समावेशी और नियम-आधारित व्यवस्था का समर्थन करते हैं। हम विस्तारवाद नहीं, विकासवाद की नीति में विश्वास करते हैं।"
उन्होंने स्पष्ट रूप से चीन की ओर इशारा करते हुए यह बात कही, जो रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र में अपनी ताकत दिखा रहा है और दक्षिण चीन सागर (एससीएस) तथा पूर्वी चीन सागर (ईसीएस) दोनों में ही क्षेत्रीय विवादों में शामिल है।
प्रधानमंत्री ने कहा, "मैं अपनी यात्रा के अवसर पर 18वीं शताब्दी के 'रामायण' भित्ति चित्रों पर आधारित एक विशेष डाक टिकट जारी करने के लिए थाईलैंड सरकार का आभारी हूं।"
मोदी ने कहा कि प्रधानमंत्री शिनावात्रा ने उन्हें ‘त्रिपिटक’ भेंट किया।
त्रिपिटक भगवान बुद्ध की शिक्षाओं का एक प्रतिष्ठित संकलन है, जिसमें 108 खंड हैं। इसे प्रमुख बौद्ध धर्मग्रंथ माना जाता है।
प्रधानमंत्री ने कहा, "बुद्ध की भूमि भारत की ओर से, मैंने इसे हाथ जोड़कर स्वीकार किया।"
उन्होंने कहा कि भारत और थाईलैंड के बीच सदियों पुराने संबंध गहरी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक डोर से बंधे हुए हैं।
मोदी ने कहा कि बौद्ध धर्म के प्रसार ने हमारे देश के लोगों को हर स्तर पर जोड़ा है।
उन्होंने कहा, "अयुत्या से नालंदा तक विद्वानों का आना-जाना हुआ है। रामायण कथा थाईलैंड के लोक जीवन में गहराई से समाई हुई है। और, संस्कृत-पाली का प्रभाव आज भी भाषाओं और परंपराओं में परिलक्षित होता है।"
मोदी ने 28 मार्च को आए भूकंप के कारण हुई जानमाल की हानि पर भारतीयों की ओर से संवेदना भी व्यक्त की।
उन्होंने कहा, "हम घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हैं।"
छठे बिम्सटेक (बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग पहल) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए दो दिवसीय यात्रा पर यहां पहुंचे मोदी को पहले ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया गया।
उन्होंने रामकियेन (थाई रामायण) की मंत्रमुग्ध प्रस्तुति भी देखी। प्रधानमंत्री बाद में बिम्सटेक में शामिल थाईलैंड, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, म्यांमा और भूटान के नेताओं से मिलेंगे।
थाईलैंड की यात्रा समाप्त करने के बाद, वह श्रीलंका की यात्रा करेंगे।
बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में मोदी के अलावा नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली, बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस और म्यांमा की सैन्य सरकार के प्रमुख मिन आंग हलिंग समेत विभिन्न नेता शिरकत कर रहे हैं।
भाषा जोहेब