प्रधानमंत्री मोदी ने वात फो मंदिर में भगवान बुद्ध की पूजा अर्चना की
धीरज सुरेश
- 04 Apr 2025, 07:53 PM
- Updated: 07:53 PM
(तस्वीरों के साथ)
बैंकॉक, चार अप्रैल (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शुक्रवार को बैंकॉक के वात फो मंदिर गए, जो अपनी वास्तुकला और लेटे हुए बुद्ध की 46 मीटर लंबी विशाल प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध है।
विशेष सद्भावना प्रकट करते हुए थाईलैंड की प्रधानमंत्री पैतोंगतार्न शिनवात्रा मोदी के साथ मंदिर गईं। मोदी ने मंदिर में लेटे हुए भगवान बुद्ध के समक्ष प्रार्थना की और वरिष्ठ बौद्ध भिक्षुओं को ‘संघदान’ दिया।
प्रधानमंत्री ने बुद्ध श्राइन को अशोक के सिंह स्तंभ की प्रतिकृति भी भेंट की तथा भारत और थाईलैंड के बीच मजबूत एवं जीवंत तथा सभ्यतागत संबंधों को याद किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने बाद में सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी एक पोस्ट में कहा, ‘‘आज मुझे बैंकॉक में ऐतिहासिक वात फ्रा चेतुफोन विमोनमंगकलाराम रत्चवोरमाहविहान या वाट फो का दौरा करने का सम्मान मिला। मैं प्रधानमंत्री पैतोंगतार्न शिनवात्रा को साथ मंदिर आने और विशेष सम्मान प्रकट करने के लिए धन्यवाद देता हूं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘थाईलैंड के सबसे प्रतिष्ठित आध्यात्मिक स्थलों में से एक, वात फो थाईलैंड की समृद्ध सांस्कृतिक और कलात्मक विरासत का भी प्रतीक है। दुनिया भर में लोग भगवान बुद्ध की शिक्षाओं से शक्ति प्राप्त करते हैं।’’
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ये शिक्षाएं भारत और थाईलैंड के बीच सदियों पुराने सभ्यतागत संबंधों का आधार भी बनती हैं। उन्होंने बाद में ‘एक्स’ पर अपनी यात्रा का एक वीडियो भी साझा किया और इसे ‘‘यादगार’’ बताया।
वात फ्रा चेतुफोन विमोनमंगकलाराम रत्चवोरमाहविहान को वात फो के नाम से जाना जाता है। यहां थाईलैंड में बुद्ध की छवियों का सबसे बड़ा संग्रह है और यह देश का सबसे पुराना सार्वजनिक शिक्षण केंद्र है।
वात फो का निर्माण 16वीं शताब्दी में एक मठ के रूप में किया गया था और 1788 में राजा राम-प्रथम द्वारा इसका जीर्णोद्धार किया गया। राजा राम प्रथम ने ही बैंकॉक को थाईलैंड की राजधानी के रूप में स्थापित किया था।
मंदिर को मौजूदा स्वरूप राजा राम तृतीय के शासनकाल के दौरान दिया गया। उन्होंने 1832 में वात फो के अधिकांश भाग, विशेष रूप से दक्षिण विहार और पश्चिम विहार, का विस्तार किया, जहां लेटे हुए बुद्ध की प्रतिमा स्थापित है।
लेटे हुए बुद्ध की यह प्रतिमा 1848 में बनकर तैयार हुई थी और यह बैंकॉक की सबसे बड़ी मूर्ति है।
भाषा धीरज