भाजपा केरल के विधानसभा चुनाव पर कोई असर नहीं डाल पाएगी : मंत्री एम बी राजेश
धीरज देवेंद्र
- 05 Apr 2025, 04:43 PM
- Updated: 04:43 PM
(अंजलि ओझा)
मदुरै, पांच अप्रैल (भाषा) केरल के स्थानीय स्वशासन मंत्री एमबी राजेश ने दावा किया है कि अगले साल होने वाले राज्य विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कोई प्रभाव नहीं डाल पाएगी।
राजेश ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिये साक्षात्कार में उम्मीद जताई कि वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) केरल में तीसरी बार सरकार बनाएगा।
कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेतृत्व वाली एलडीएफ के लिए मुख्य प्रतिद्वंद्वी है। वहीं, भाजपा राज्य में अपना आधार बनाने की कोशिश कर रही है और अभिनेता से नेता बने सुरेश गोपी ने पिछले लोकसभा चुनाव में त्रिशूर निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल की थी।
माकपा केवल एक सीट अलाथुर जीत सकी थी जबकि यूडीएफ ने बाकी सीट जीती थीं।
राजेश ने दावा किया कि केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में कोई प्रभाव नहीं डाल पाएगी।
उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘इन चुनावों में भाजपा केरल में कोई प्रभाव नहीं डाल पाएगी। यह केरल में भाजपा के लिए बहुत बड़ा चुनावी झटका होगा।’’
राजेश ने पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा के मत प्रतिशत में वृद्धि के बारे में पूछे जाने पर कहा कि त्रिशूर में यूडीएफ के कुछ वोट भाजपा की ओर चले गए, जिसकी वजह से वह वहां जीत दर्ज कर सकी।
गोपी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 74,686 मतों के अंतर से हराकर त्रिशूर सीट जीती, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार तीसरे स्थान पर रहे। यह सीट इससे पहले 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने जीती थी।
राजेश ने यह भी विश्वास जताया कि एलडीएफ को तीसरा कार्यकाल मिलेगा। उन्होंने कहा, ‘‘हां, हमें तीसरा कार्यकाल मिलेगा। हम यह सुनिश्चित करने के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं कि हमारी सरकार फिर से सत्ता में आए। क्योंकि समानता और सामाजिक न्याय के साथ विकास का जो एजेंडा अधूरा है, हमें उसे पूरा करना है।’’
राज्य में कुछ ईसाई समूहों द्वारा वक्फ (संशोधन) विधेयक को मिल रहे समर्थन के बारे में पूछे जाने पर राजेश ने कहा कि कुछ संगठनों ने यह रुख अपनाया है, लेकिन व्यापक सहमति इसके खिलाफ है।
उन्होंने कहा, ‘‘वक्फ संशोधन विधेयक धर्मनिरपेक्षता पर हमला है। यह संविधान और अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर हमला है। बहुत कम संगठनों ने ऐसा रुख अपनाया है। लेकिन केरल में धर्मनिरपेक्ष वर्गों के बीच व्यापक सहमति इस विधेयक के खिलाफ है।’’
भाषा धीरज