पूर्व भारतीय राजनयिकों ने शेख हसीना को मौत की सजा सुनाए जाने की निंदा की
नेत्रपाल
- 18 Nov 2025, 12:57 AM
- Updated: 12:57 AM
नयी दिल्ली, 17 नवंबर (भाषा) बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को एक विशेष न्यायाधिकरण द्वारा मौत की सजा सुनाए जाने के फैसले की कई पूर्व भारतीय राजनयिकों ने सोमवार को आलोचना की और कहा कि पड़ोसी देश एक बार फिर ‘‘अत्यधिक ध्रुवीकृत’’ हो गया है, जो उसकी स्थिरता और सुरक्षा के लिए अच्छा संकेत नहीं है।
वर्ष 2003 से 2006 तक बांग्लादेश में भारत की उच्चायुक्त रहीं वीना सीकरी ने कहा कि देश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (आईसीटी) को एक पूर्व प्रधानमंत्री पर मुकदमा चलाने का क्या अधिकार है, जबकि इसकी नियुक्ति केवल उन लोगों पर मुकदमा चलाने के लिए की गई थी, जिन्होंने 1971 के मुक्ति संग्राम में युद्ध अपराध किए थे।
हसीना को पिछले वर्ष छात्र-नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों पर उनकी सरकार की कार्रवाई के लिए ‘‘मानवता के विरुद्ध अपराध’’ के मामले में आईसीटी द्वारा सोमवार को उनकी अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई गई थी।
पिछले वर्ष पांच अगस्त को बड़े पैमाने पर हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद प्रधानमंत्री पद से हटाए जाने के बाद से हसीना भारत में रह रही हैं।
पूर्व राजनयिक सीकरी ने पीटीआई-भाषा को बताया कि आईसीटी की नियुक्ति केवल उन लोगों के मुकदमों के लिए की गई थी जिन्होंने 1971 के युद्ध में युद्ध अपराध किए थे।
उन्होंने पूछा, ‘‘तो, किस अधिनियम के तहत आपने आईसीटी के उद्देश्य को बदल दिया है?’’
पूर्व राजनयिक राजीव डोगरा ने कहा कि भारत ने हसीना को शरण देकर ‘‘सही काम’’ किया है, क्योंकि वह ‘‘एक महत्वपूर्ण नेता हैं, जिनकी पार्टी के नेतृत्व में बांग्लादेश का लोकतंत्र हमेशा समृद्ध हुआ है’’।
यह पूछे जाने पर कि इस घटनाक्रम के बाद क्षेत्र पर क्या रणनीतिक प्रभाव पड़ेगा, उन्होंने कहा, ‘‘निश्चित रूप से प्रभाव बहुत अच्छा नहीं होगा।’’
वहीं, एक अन्य पूर्व भारतीय राजनयिक अनिल त्रिगुणायत ने कहा कि बांग्लादेश न्यायाधिकरण का निर्णय ‘‘अपेक्षित’’ था।
उन्होंने आगाह किया कि बांग्लादेश ‘‘एक बार फिर पूरी तरह ध्रुवीकृत और विभाजित हो गया है तथा यह देश की स्थिरता और सुरक्षा के लिए शुभ संकेत नहीं है’’।
भारत ने सोमवार को कहा कि उसने फैसले पर गौर किया है और वह पड़ोसी देश में शांति, लोकतंत्र एवं स्थिरता को ध्यान में रखते हुए सभी हितधारकों के साथ रचनात्मक रूप से बातचीत करेगा।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत बांग्लादेश के लोगों के सर्वोत्तम हितों के लिए प्रतिबद्ध है।
भाषा