दक्षिण भारत कृषि की एक ‘लिविंग यूनिवर्सिटी’ रहा है: मोदी
देवेंद्र धीरज
- 19 Nov 2025, 08:30 PM
- Updated: 08:30 PM
कोयंबटूर, 19 नवंबर (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जैविक खेती का समर्थन करते हुए बुधवार को कहा कि दक्षिण भारत कृषि क्षेत्र में एक ‘लिविंग यूनिवर्सिटी’ (ज्ञान का जीवंत केंद्र)रहा है।
मोदी ने यहां दक्षिण भारत प्राकृतिक कृषि शिखर सम्मेलन 2025 का उद्घाटन करते हुए कहा कि कोयंबटूर क्षेत्र में दुनिया के कुछ सबसे पुराने बांध हैं और कलिंगारायण नहर का निर्माण 13वीं शताब्दी में यहीं किया गया था। उन्होंने कहा कि इस भूमि ने हजारों साल पहले कृषि के लिए नदी के पानी को विनियमित करके वैज्ञानिक जल इंजीनियरिंग का बीड़ा उठाया।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि देश और विश्व में प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में नेतृत्व भी इसी क्षेत्र से उभरेगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत के लिए भविष्योन्मुखी कृषि पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे ‘‘एक एकड़, एक सीजन’’ प्राकृतिक खेती शुरू करें और उसके नतीजों के आधार पर आगे बढ़ें।
उन्होंने वैज्ञानिकों और अनुसंधान संस्थानों से प्राकृतिक खेती को कृषि पाठ्यक्रम का मुख्य हिस्सा बनाने की अपील की तथा इन्हें किसानों के खेतों को जीवंत प्रयोगशालाओं के रूप में इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया।
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘हमारा लक्ष्य प्राकृतिक खेती को पूरी तरह से विज्ञान-समर्थित अभियान बनाना होना चाहिए।’’
उन्होंने इस अभियान में राज्य सरकारों और किसान उत्पादक संघों (एफपीओ) की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में देश में 10,000 एफपीओ का गठन किया गया है और उनके सहयोग से छोटे किसान समूह बनाए जा सकते हैं, जिन्हें सफाई, पैकेजिंग और प्रसंस्करण की सुविधाओं से सुसज्जित किया जा सकता है और उन्हें सीधे ई-नाम जैसे ऑनलाइन बाजारों से जोड़ा जा सकता है।
मोदी ने कहा, ‘‘जब हमारे किसानों का पारंपरिक ज्ञान, विज्ञान की ताकत, और सरकार का समर्थन, तीनों जुड़ जाते हैं, तो किसान भी समृद्ध होगा, और हमारी धरती मां भी स्वस्थ रहेगी।’’
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह शिखर सम्मेलन देश में प्राकृतिक खेती को नयी दिशा देगा और इस मंच से नए विचार और समाधान सामने आएंगे।
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