मुंढ़वा भूमि सौदा: मंत्री बावनकुले ने आईजीआर समिति की रिपोर्ट को ‘काल्पनिक’ बताया
यासिर नरेश
- 19 Nov 2025, 10:27 PM
- Updated: 10:27 PM
मुंबई, 19 नवंबर (भाषा) महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने मुंढ़वा भूमि सौदे पर संयुक्त महानिरीक्षक पंजीकरण (आईजीआर) राजेंद्र मुथे की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट को ‘काल्पनिक’ बताकर बुधवार को खारिज कर दिया।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता ने कहा कि अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) विकास खड़गे की अध्यक्षता वाली समिति ही जांच कर रही एकमात्र समिति है। उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच कई समितियों द्वारा करने का सवाल ही नहीं उठता - जिसमें 40 एकड़ सरकारी जमीन को अवैध रूप से उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के बेटे पार्थ के स्वामित्व वाली कंपनी ‘अमाडिया एंटरप्राइजेज एलएलपी’ को बेचने का मामला शामिल है।
बावनकुले ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘मामले की जांच के लिए कई समितियां गठित नहीं की गई हैं। अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) विकास खड़गे की अध्यक्षता वाली समिति ही एकमात्र समिति है जो वर्तमान में अपना काम कर रही है। किसी अन्य व्यक्ति को जांच करने या किसी को क्लीन चिट देने का कोई अधिकार नहीं है।’’
मुथे समिति की रिपोर्ट मंगलवार को प्रस्तुत की गई और इसे काल्पनिक रिपोर्ट बताते हुए बावनकुले ने कहा कि सरकार मामले के सभी पहलुओं की निष्पक्ष तथा व्यापक जांच सुनिश्चित करेगी।
उन्होंने कहा, ‘‘हम अमाडिया एंटरप्राइजेज एलएलपी के साथ-साथ ज़मीन की बिक्री से जुड़े लोगों को भी अपना पक्ष रखने का मौका देंगे। यह एक दीवानी मामला है। सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि दमानिया को भी समिति के समक्ष गवाही देने की अनुमति दी जाएगी।’’
बावनकुले ने जोर देकर कहा, ‘‘जांच से कोई नहीं बच पाएगा।’’
‘अमाडिया एंटरप्राइजेज’ से किया गया यह सौदा उस समय जांच के घेरे में आ गया जब यह पता चला कि यह जमीन सरकार की है और कंपनी को 21 करोड़ रुपये की स्टाम्प ड्यूटी में छूट दी गई थी।
संयुक्त आईजीआर राजेंद्र मुथे की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय समिति ने 300 करोड़ रुपये के लेन-देन पर मंगलवार को अपनी रिपोर्ट महानिरीक्षक रवींद्र बिनवाडे को सौंपी।
हालांकि, अधिकारी ने कहा कि रिपोर्ट में पार्थ पवार का ज़िक्र नहीं है। अधिकारियों ने कहा, ‘‘पूरे विक्रय पत्र में पार्थ पवार का नाम दर्ज नहीं है, इसलिए उन्हें जांच में आरोपी नहीं बनाया जा सकता।’’
भाषा यासिर