गुवाहाटी मास्टर्स: पुरुष एकल फाइनल में मिथुन के सामने सारस्वत की चुनौती, तन्वी की नजर महिला खिताब पर
आनन्द नमिता
- 06 Dec 2025, 06:36 PM
- Updated: 06:36 PM
गुवाहाटी, छह दिसंबर (भाषा) गुवाहाटी मास्टर्स सुपर 100 में भारत का कम से कम एक खिताब पक्का हो गया है क्योंकि मिथुन मंजूनाथ और संस्कार सारस्वत पुरुष एकल के फाइनल में पहुंच गए हैं जबकि तन्वी शर्मा ने शनिवार को महिला एकल के फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है।
पिछले साल बेंगलुरु में अर्श मोहम्मद के साथ मिलकर अपना पहला सीनियर राष्ट्रीय युगल खिताब जीतने वाले सारस्वत ने सेमीफाइनल में इंडोनेशिया के डेंडी त्रियानस्याह को 21-19, 21-9 से हराया।
मंजूनाथ ने अंतिम चार के एक अन्य मैच में हमवतन भारतीय तुषार सुवीर को 22-20, 21-8 से हराकर फाइनल का टिकट पक्का किया।
महिला एकल में विश्व जूनियर चैंपियनशिप की रजत पदक विजेता तन्वी ने अपना प्रभावशाली प्रदर्शन जारी रखते हुए 42 मिनट तक चले सेमीफाइनल में जापान की तीसरी वरीयता प्राप्त हिना अकेची को 21-18, 21-16 से हराया।
पंजाब की इस 16 साल की खिलाड़ी ने पिछले सप्ताह सैयद मोदी इंटरनेशनल सुपर 300 के सेमीफाइनल तक का सफर तय किया था। फाइनल में उनके सामने चीनी ताइपे की तुंग सिउ-तोंग की चुनौती होगी।
तन्वी पिछले साल ओडिशा मास्टर्स के फाइनल में पहुंची थीं और इस साल यूएस ओपन सुपर 300 और विश्व जूनियर चैंपियनशिप में उपविजेता रहीं और अब उनकी नजर अपने पहले सुपर 100 खिताब पर होगी।
इससे पहले स्थानीय दावेदार अश्मिता चालिहा ने फाइनल में पहुंचने का मौका गंवा दिया। वह छठी वरीयता प्राप्त तुंग से शुरुआती गेम जीतने के बावजूद 21-12, 17-21, 14-21 से हार गयी।
पुरुष युगल में शीर्ष वरीयता प्राप्त पृथ्वी कृष्णमूर्ति रॉय और साईं प्रतीक के. ने इंडोनेशिया के एंसेलमस ब्रेगिट फ्रेडी प्रासेत्या और पुलुंग रामाधान को 38 मिनट तक चले मुकाबले में 21-16, 22-20 से हराकर फाइनल में प्रवेश किया।
महिला युगल में आठवीं वरीयता प्राप्त अश्विनी भट्ट के. और शिखा गौतम की जोड़ी की हार के साथ ही भारतीय अभियान समाप्त हो गया। भारतीय जोडी मलेशिया की दूसरी वरीयता प्राप्त ओंग शिन यी और कारमेन टिंग से 14-21, 10-21 से हार गई।
रोहन कपूर और रुतविका शिवानी गड्डे की शीर्ष वरीयता प्राप्त भारतीय जोड़ी को मिश्रित युगल सेमीफाइनल में थाईलैंड की तनाडोन पुनपनिच और फुंगफा कोर्पथामकिट ने 21-15, 19-21, 21-17 से शिकस्त दी।
भाषा आनन्द