शीर्ष पुलिस अधिकारियों का सम्मेलन: भगोड़े अपराधियों के पासपोर्ट रद्द करने का निर्णय लिया गया
सुभाष रंजन
- 11 Dec 2025, 09:35 PM
- Updated: 09:35 PM
(नीलाभ श्रीवास्तव)
नयी दिल्ली, 11 दिसंबर (भाषा) देशभर के पुलिस प्रमुखों की छत्तीसगढ़ में हुई हालिया बैठक में, भगोड़ों को शीघ्रता से अदालत के कटघरे में लाने के लिए तीन नये उपाय तैयार किए गए, जिनमें उनके पासपोर्ट को ‘‘तुरंत’’ रद्द करना और पात्र मामलों को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को सौंपना शामिल है।
सुरक्षा प्रतिष्ठान के अधिकारियों ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि रायपुर में 28 से 30 नवंबर तक आयोजित पुलिस महानिदेशक/महानिरीक्षक (डीजी/आईजी) सम्मेलन के दौरान ‘‘भगोड़ों पर प्रभावी कार्रवाई करने और स्वदेश वापस लाने’’ पर एक विशेष प्रस्तुति दी गई। सम्मेलन में खुफिया और सुरक्षा प्रमुखों के अलावा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी भाग लिया था।
अधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय खुफिया एजेंसियों, आपातकालीन विभाग और आव्रजन विभाग के अधिकारियों ने इस सत्र में भाग लिया तथा इस बात पर जोर दिया गया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सभी पुलिस बलों को विदेश मंत्रालय को नामजद आरोपियों के पासपोर्ट रद्द करने के लिए तुरंत अनुरोध भेजना चाहिए, ताकि उन्हें उस देश में अवांछित व्यक्ति घोषित किया जा सके जहां उन्होंने शरण ले रखी है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भगोड़ों के खिलाफ कार्रवाई एक ‘‘व्यापक’’ पहल होनी चाहिए, जिसमें आरोपियों के खिलाफ इंटरपोल के विभिन्न नोटिस जैसे ‘‘रेड या ब्लू नोटिस’’ जारी करने के लिए सीबीआई से सहायता लेना शामिल हो।
हाल में गोवा पुलिस द्वारा लूथरा बंधुओं के खिलाफ की गई कार्रवाई इसका एक उदाहरण है।
अधिकारियों ने बताया कि राज्य पुलिस ने विदेश मंत्रालय को पत्र लिखकर उनके पासपोर्ट रद्द करने का अनुरोध किया, जिसके कारण सौरभ और गौरव लूथरा का उस देश में रहना अवैध हो गया और भारत को उनकी हिरासत तुरंत प्राप्त करने का अवसर मिला।
छह दिसंबर को ‘बर्च बाय रोमियो लेन’ नाइट क्लब में आग लगने से 25 लोगों की मौत हो गई थी। इस हादसे के तुरंत बाद लूथरा बंधु थाईलैंड के फुकेत भाग गए थे।
अधिकारियों ने बताया कि दूसरा उपाय ‘‘पात्र’’ भगोड़ों का विवरण ईडी के साथ साझा करना है ताकि वह धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत आपराधिक मामला दर्ज करने के अलावा भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम (एफईओए), 2018 के तहत अदालती कार्यवाही शुरू कर सके।
डीजी/आईजी सम्मेलन में, बीएनएसएस की धारा 84 के तहत जांच एजेंसियों को उपलब्ध घोषित अपराधी कार्यवाही के उपयोग को बढ़ाने का भी प्रस्ताव रखा गया।
भाषा सुभाष