बांग्लादेश में हिंदू शख्स की पीट-पीटकर हत्या ‘क्रूरता की पराकाष्ठा’: अरशद मदनी
नरेश
- 30 Dec 2026, 07:16 PM
- Updated: 07:16 PM
(कॉपी में मामूली फेरबदल के साथ रिपीट)
नयी दिल्ली, 30 दिसम्बर (भाषा) प्रमुख मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए- हिंद (एएम) के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने ईशनिंदा के आरोप में भीड़ द्वारा पीट-पीटकर एक हिंदू व्यक्ति की हत्या करने की निंदा करते हुए इसे ‘क्रूरता की पराकाष्ठा’ बताया और दोषियों के लिए कड़ी सजा की मांग की।
संगठन की ओर से मंगलवार को जारी एक बयान के मुताबिक, मौलाना मदनी ने पड़ोसी मुल्क में अल्पसंख्यक समुदाय पर हो रहे जुल्म को ‘बहुत बुरा’ बताते हुए कहा कि यह कृत्य न केवल इस्लामी शिक्षाओं का उल्लंघन है, बल्कि इस्लाम को बदनाम करने वाला भी है, इसलिए ऐसे लोगों को कड़ी से कड़ी सज़ा दी जानी चाहिए।
उन्होंने हाल ही में देश में क्रिसमिस के मौके पर कुछ तत्वों द्वारा किए गए उपद्रव को अनुचित ठहरते हुए दावा किया कि देश की सरकार ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
मदनी ने देश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा और भीड़ द्वारा उनकी पीट-पीटकर हत्या करने के मुद्दे को उठाया और दुख जताया कि इन पर उस तरह का आक्रोश देखने को नहीं मिलता जैसा बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों को लेकर देखने को मिल रहा है।
भारत ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ लगातार जारी ‘‘शत्रुतापूर्ण गतिविधियों’ पर पिछले शुक्रवार को गंभीर चिंता का विषय बताया। विदेश मंत्रालय ने पिछले सप्ताह मैमनसिंह क्षेत्र में एक हिंदू युवक की पीट-पीटकर हत्या करने में शामिल दोषियों को दंडित करने की मांग की।
मदनी ने बांग्लादेश की घटना पर कहा कि भीड़ द्वारा हिंसा में किसी को बेरहमी से मार देना केवल एक हत्या नहीं बल्कि ‘क्रूरता की पराकाष्ठा’ है और इसकी जितनी निंदा की जाए कम है।
मुस्लिम वर्ल्ड लीग के सदस्य मदनी ने अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा के लिए ‘धार्मिक कट्टरता’ को मूल वजह बताते हुए कहा, “सत्ता प्राप्त करने के लिए कुछ लोग धर्म का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे धार्मिक कट्टरता में ख़तरनाक हद तक बढ़ोतरी हो रही है, इसकी वजह से अल्पसंख्यक जहां भी हैं खुद को असुरक्षित समझने लगे हैं।”
बुजुर्ग मुस्लिम नेता ने कहा, “बांग्लादेश... अपने देश या फिर किसी अन्य देश में, जो कुछ भी हो रहा है, इसके पीछे धार्मिक कट्टरता की ही मूल भूमिका है।”
मदनी ने कहा कि धार्मिक होना गलत नहीं है बल्कि हर व्यक्ति को अपने धर्म और इसकी शिक्षाओं का ईमानदारी से पालन करना चाहिए लेकिन जब इसमें कट्टरता आ जाती है तो फिर लोग दूसरे धर्म को गलत समझने लगते हैं, जिससे टकराव की शुरुआत होती है।
भाषा नोमान नोमान