सरकार ने 7,295 करोड़ रुपये के निर्यात पैकेज की घोषणा की
पाण्डेय रमण
- 02 Jan 2026, 06:51 PM
- Updated: 06:51 PM
नयी दिल्ली, दो जनवरी (भाषा) सरकार ने शुक्रवार को निर्यातकों की ऋण तक पहुंच को बेहतर बनाने के लिए 7,295 करोड़ रुपये के निर्यात सहायता पैकेज की घोषणा की। इसमें 5,181 करोड़ रुपये की ब्याज सहायता योजना और निर्यात ऋण के लिए 2,114 करोड़ रुपये का गारंटी समर्थन शामिल है।
दोनों उपाय छह वर्षों (2025-31) में लागू किए जाएंगे। वाणिज्य मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव अजय भादू ने कहा कि ये कदम निर्यातकों की व्यापार वित्त से जुड़ी समस्याओं का समाधान करेंगे।
ब्याज सहायता योजना के तहत निर्यातकों को निर्यात से पहले और निर्यात के बाद ऋण पर सब्सिडी मिलेगी। यह नवंबर 2025 में स्वीकृत 25,060 करोड़ रुपये के निर्यात संवर्धन मिशन (ईपीएम) का दूसरा घटक है।
पहला घटक 31 दिसंबर, 2025 को लागू किया गया था, जिसमें 4,531 करोड़ रुपये के परिव्यय वाला बाजार पहुंच समर्थन दिया गया था।
प्रतिकूल वैश्विक व्यापार परिस्थितियों के बीच सहायता योजना से चिन्हित क्षेत्रों के निर्यातकों को प्रतिस्पर्धी दरों पर ऋण पाने में मदद मिलेगी।
योजना के तहत सरकार पात्र एमएसएमई निर्यातकों को 2.75 प्रतिशत तक की सब्सिडी लाभ देगी। प्रति कंपनी वार्षिक लाभ की सीमा 50 लाख रुपये तय की गई है।
इस योजना के विस्तृत दिशानिर्देश भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) द्वारा जारी किए जाएंगे। योजना के लिए कार्यान्वयन एजेंसी आरबीआई है।
वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार सहायता दरों की घरेलू और वैश्विक मानकों के आधार पर मार्च और सितंबर में छमाही आधार पर समीक्षा की जाएगी। योजना के विस्तृत दिशानिर्देश आरबीआई द्वारा जारी किए जाएंगे, जो डीजीएफटी के साथ मिलकर कार्यान्वयन एजेंसी है।
मंत्रालय ने कहा कि एक पायलट चरण शुरू किया जाएगा, जिसमें कार्यान्वयन से मिले सुझावों के आधार पर सुधार की गुंजाइश होगी।
सरकार ने निर्यात ऋण के लिए 2,114 करोड़ रुपये की गारंटी सहायता की भी घोषणा की है। इसके तहत, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को निर्यात से जुड़े कार्यशील पूंजी ऋण के लिए ऋण गारंटी सहायता प्रदान की जाएगी। इस उपाय के तहत प्रति फर्म अधिकतम 10 करोड़ रुपये तक की जमानत गारंटी उपलब्ध कराई जाएगी।
सूक्ष्म और छोटे निर्यातकों के लिए 85 प्रतिशत तक और मध्यम निर्यातकों के लिए 65 प्रतिशत तक की गारंटी कवरेज उपलब्ध होगी।
प्रतिबंधित वस्तुएं, कचरा और स्क्रैप तथा उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) के अंतर्गत आने वाली वस्तुएं इन उपायों के दायरे से बाहर रहेंगी।
भाषा पाण्डेय