जमीन के बदले नौकरी घोटाला: अदालत ने लालू यादव, अन्य के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया
देवेंद्र मनीषा
- 09 Jan 2026, 01:47 PM
- Updated: 01:47 PM
नयी दिल्ली, नौ जनवरी (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी की एक अदालत ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख एवं पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, उनके परिवार के सदस्यों और अन्य लोगों के खिलाफ कथित जमीन के बदले नौकरी घोटाला मामले में आरोप तय करने का शुक्रवार को आदेश दिया।
विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने कहा कि यादव ने रेल मंत्रालय को अपनी निजी जागीर की तरह में इस्तेमाल किया ताकि वह एक आपराधिक गतिविधि को अंजाम दे सकें। उन्होंने कहा कि इसमें सरकारी नौकरी को सौदेबाजी के हथियार के रूप में इस्तेमाल करके यादव परिवार ने रेलवे अधिकारियों और अपने करीबी सहयोगियों की मिलीभगत से जमीन हासिल की।
आदेश के मुख्य हिस्से को मौखिक रूप से सुनाते हुए न्यायाधीश ने कहा कि सीबीआई की अंतिम रिपोर्ट से “गंभीर संदेह के आधार पर एक व्यापक साजिश’’ का खुलासा होता है।
उन्होंने लालू प्रसाद और उनके परिवार के सदस्यों समेत आरोपियों द्वारा बरी किये जाने की याचिका को भी ‘‘अनुचित’’ बताते हुए खारिज कर दिया और इस बात पर जोर दिया कि पूर्व रेल मंत्री और अन्य लोग ‘‘भूमि हड़पने के लिए एक संगठित आपराधिक समूह की तरह काम कर रहे थे।’’
न्यायाधीश ने रेलवे अधिकारियों द्वारा ‘‘निर्णय लेने के अधिकार के दुरुपयोग’’ पर भी प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा, ‘‘आरोप-पत्र का विवरण वर्णित अपराध का मूल तत्व और सार है।’’
अदालत ने इस मामले में 41 लोगों के खिलाफ आरोप तय किये और रेलवे अधिकारियों समेत 52 लोगों को बरी कर दिया।
इससे पहले, सीबीआई ने मामले में आरोपी व्यक्तियों की स्थिति के बारे में एक सत्यापन रिपोर्ट पेश की थी, जिसमें कहा गया था कि उसके आरोप-पत्र में नामजद 103 आरोपियों में से पांच की मौत हो गई है।
अदालत ने मामले में औपचारिक रूप से आरोप तय करने के लिए 23 जनवरी की तारीख तय की है।
इस मामले में विस्तृत आदेश की प्रतीक्षा है।
जांच एजेंसी ने कथित घोटाले के सिलसिले में लालू यादव, उनकी पत्नी एवं बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, उनके बेटे तेजस्वी यादव और अन्य के खिलाफ आरोप-पत्र दायर किया था।
आरोप है कि मध्यप्रदेश के जबलपुर में स्थित भारतीय रेलवे के पश्चिम मध्य जोन में ग्रुप-डी श्रेणी में भर्तियां लालू यादव के रेल मंत्री रहते 2004 से 2009 के बीच की गईं। इसके बदले में भर्ती होने वाले लोगों ने राजद प्रमुख के परिवार के सदस्यों या सहयोगियों के नाम पर जमीन तोहफ़े में दी या हस्तांतरित की।
सीबीआई ने यह भी दावा किया कि ये नियुक्तियां नियमों का उल्लंघन करके की गईं और इन लेन-देन में बेनामी संपत्तियां शामिल थीं, जो आपराधिक कदाचार और साजिश के समकक्ष है।
आरोपियों ने आरोपों से इनकार करते हुए दावा किया है कि यह मामला राजनीतिक रूप से प्रेरित है।
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