राजस्थान: विवाह के बंधन में बंधेंगे हत्या के जुर्म में सजा काट रहे युवक-युवती
मनीषा
- 23 Jan 2026, 12:13 PM
- Updated: 12:13 PM
जयपुर, 23 जनवरी (भाषा) जयपुर की खुली जेल में हत्या के जुर्म में उम्रकैद की सजा काट रहे दो कैदी शादी के बंधन में बंधने वाले हैं। भावी वर और वधु हत्याओं के दो अलग-अलग सनसनीखेज मामलों में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं।
इनमें युवती प्रिया सेठ (34) डेटिंग ऐप पर युवक को फंसाने और बाद में उसका गला घोंटने के मामले में जेल में है। वहीं युवक हनुमान प्रसाद (29) ने अपनी कथित प्रेमिका के साथ मिलकर उसके पति और बच्चों की हत्या कर दी थी।
अदालत से सजा मिलने के बाद ये दोनों यहां सांगानेर खुली जेल में रह रहे थे। यहीं उन्हें एक-दूसरे से प्यार हो गया और उन्होंने शादी करने का फैसला किया है। इस हफ्ते की शुरुआत में दोनों कैदियों को 15 दिन की पैरोल दी गई।
उनके वकील विश्राम प्रजापत ने बताया कि सात जनवरी को राजस्थान उच्च न्यायालय ने पैरोल कमेटी को निर्देश दिया था कि इनके आवेदनों पर सात दिन के भीतर पर फैसला करें। इसके बाद इन्हें पैरोल दी गई है।
उन्होंने कहा, "अदालती आदेश पर कार्रवाई करते हुए पैरोल कमेटी ने उनकी रिहाई को मंजूरी दे दी जिससे दोनों बुधवार को जेल से बाहर आ सके।"
इन दोनों की शादी हनुमान प्रसाद के पैतृक गांव, अलवर जिले के बड़ौदामेव में होगी।
सूत्रों ने बताया कि पिछले एक साल में खुली जेल में रहने के दौरान हनुमान प्रसाद व प्रिया एक दूसरे के करीब आ गए थे। यह जेल 'राजस्थान प्रिजनर्स ओपन एयर कैंप नियम, 1972' के तहत चलाई जाती है जहां चुने हुए कैदियों को दिन में बाहर काम करने और शाम तक कैंप में लौटने की अनुमति होती है।
प्रिया को 2018 में जयपुर में हुई सनसनीखेज हत्या के लिए दोषी ठहराया गया था। इसमें दुष्यंत शर्मा (27) का शव शहर के बाहरी इलाके में एक सूटकेस में मिला था। पुलिस ने बताया कि आरोपी पीड़ित से डेटिंग ऐप के जरिए मिली। उसने उसे बजाज नगर में अपने किराए के फ्लैट में बंधक बनाया, उसकी हत्या कर दी और बाद में शव को ठिकाने लगा दिया। प्रिया को 2023 में उम्रकैद की सजा सुनाई गई।
वहीं प्रसाद को भी 2023 में दोषी ठहराया गया था। उसे अलवर में 2017 के एक सनसनीखेज हत्याकांड मामले में दोषी पाया गया था। इसमें एक आदमी, उसके तीन बेटों और एक भतीजे की हत्या की गई थी। पुलिस ने बताया कि आरोपी का महिला संतोष शर्मा से रिश्ता था। आरोप था कि उसने पीड़ितों को नशीली दवा देकर परिवार की हत्या करने की साजिश रची थी।
हालांकि पैरोल देने के फैसले का विरोध हुआ है। दुष्यंत शर्मा मामले में पीड़ित परिवार के वकील संदीप लोहारिया ने कहा कि वह पैरोल के आदेश को चुनौती देंगे। उन्होंने कहा, "पैरोल मिलने के बाद भी हमें सूचित नहीं किया गया। हम इस फैसले के खिलाफ अदालत जाएंगे।"
बहरहाल, यह शादी जिन 'विशेष' हालात में हो रही है उसने लोगों का ध्यान खींचा है। जेल अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि प्रक्रिया मौजूदा नियमों के अनुसार ही की गई है। एक अधिकारी ने बताया कि ओपन-एयर कैंप सिस्टम के तहत छह सदस्यों की समिति पैरोल और पुनर्वास के लिए पात्रता का मूल्यांकन करती है।
भाषा पृथ्वी
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