ईरान के शीर्ष अभियोजक ने 800 कैदियों की फांसी रोकने के ट्रंप के दावे को खारिज किया
अविनाश
- 23 Jan 2026, 10:34 PM
- Updated: 10:34 PM
दुबई, 23 जनवरी (एपी) ईरान के शीर्ष अभियोजक ने शुक्रवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस दावे को ''पूरी तरह गलत'' बताकर खारिज कर दिया कि देश भर में विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिरासत में लिए गए 800 लोगों की फांसी उनके दखल देने की वजह से रुकी है।
इस बीच, अधिकार कार्यकर्ताओं ने कहा कि देशभर में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ की गई हिंसक कार्रवाई में मरने वालों की संख्या बढ़कर कम से कम 5,002 हो गई है।
ट्रंप ने बार-बार कहा है कि ईरान ने विरोध-प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए 800 लोगों की फांसी रोक दी है। हालांकि, उन्होंने इस दावे के स्रोत के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है। ईरान की समाचार एजेंसी 'मिजान' की ओर से शुक्रवार को देश के शीर्ष अभियोजक मोहम्मद मोवाहेदी के हवाले से प्रसारित खबर में इस बात का पुरजोर खंडन किया गया है।
'मिजान' के मुताबिक, मोवाहेदी ने कहा, "यह दावा पूरी तरह से गलत है; ऐसी कोई संख्या उपलब्ध नहीं है और न ही न्यायपालिका ने ऐसा कोई फैसला लिया है।"
उन्होंने कहा, "हमारे यहां शक्तियों का पृथक्करण है, प्रत्येक संस्था की जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से परिभाषित हैं और हम किसी भी परिस्थिति में विदेशी शक्तियों से निर्देश नहीं लेते हैं।"
इस बीच, अमेरिका स्थित 'ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी' ने मृतकों की नवीनतम संख्या जारी करते हुए बताया कि मरने वालों में 4,716 प्रदर्शनकारी, सरकार के 203 सहयोगी, 43 बच्चे और 40 ऐसे नागरिक शामिल हैं, जो विरोध-प्रदर्शन का हिस्सा नहीं थे। एजेंसी ने यह भी बताया कि 26,800 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है।
उधर, यूएसएस अब्राहम लिंकन सहित अमेरिकी विमानवाहक पोतों के एक बेड़े के पश्चिम एशिया की ओर बढ़ने के चलते अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ गया है।
विश्लेषकों का कहना है कि सैन्य मौजूदगी से ट्रंप को हमले करने का विकल्प मिल सकता है। हालांकि, तेहरान को बार-बार चेतावनी देने के बावजूद उन्होंने अभी तक ऐसा करने से परहेज किया है।
न्यूयॉर्क स्थित थिंकटैंक सूफान सेंटर ने एक विश्लेषण में कहा, ''हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप अब क्षेत्रीय नेताओं के दबाव के चलते और यह जानते हुए कि अकेले हवाई हमले शासन को हटाने के लिए अपर्याप्त होंगे, पीछे हटते हुए प्रतीत होते हैं, लेकिन सैन्य बलों का क्षेत्र में भेजा जाना संकेत देता है कि सैन्य कार्रवाई अब भी हो सकती है।''
एपी पारुल अविनाश
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