मणिपुर : परिवार ने युमनाम जात्रा सिंह को पद्म श्री से सम्मानित किये जाने पर खुशी जताई
नरेश
- 25 Jan 2026, 09:41 PM
- Updated: 09:41 PM
इंफाल, 25 जनवरी (भाषा) 'नट संकीर्तन' के प्रख्यात कलाकार रहे युम्नाम जात्रा सिंह को मरणोपरांत पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किए जाने की घोषणा का उनके परिवार ने स्वागत किया है। परिवार ने कहा कि यह मणिपुर की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं के प्रति समर्पित उनके जीवन को राष्ट्रीय मान्यता है।
पद्म पुरस्कार से सम्मानित युम्नाम जात्रा सिंह के सबसे छोटे बेटे युम्नाम बिशम्बर सिंह ने केंद्र सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान परिवार के लिए गर्व और खुशी का क्षण है।
जात्रा सिंह को 'गुमनाम नायकों' की श्रेणी में रविवार को पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा की गई।
युम्नाम बिशम्बर सिंह ने 'पीटीआई-भाषा'से बातचीत में कहा, '' यह हम सभी के लिए बेहद खुशी और उत्साह का क्षण है। दशकों तक किए गए उनके जुनून, समर्पण और कार्यों को आखिरकार राष्ट्रीय मान्यता मिली है। मैं इसके लिए केंद्र सरकार का बहुत आभारी हूं।''
मणिपुर की सांस्कृतिक पहचान का केंद्र मानी जाने वाली पारंपरिक वैष्णव कला शैली 'नट संकीर्तन' के एक प्रख्यात कलाकार जात्रा सिंह को मरणोपरांत कला के क्षेत्र में पद्म श्री से सम्मानित किये जाने की घोषणा की गई।
बिशम्बर सिंह ने कहा कि वह अपने पिता की ओर से यह पुरस्कार ग्रहण करेंगे।
उन्होंने हालांकि कहा कि परिवार के किसी भी सदस्य ने 'नट संकीर्तन' को आगे नहीं बढ़ाया जिसने उनके पिता के जीवन को परिभाषित किया था।
बिशम्बर सिंह ने कहा, ''दुर्भाग्यवश, परिवार में किसी ने भी उस कला रूप को आगे नहीं बढ़ाया है जिसे मेरे पिता पसंद करते थे।''
युम्नाम जात्रा सिंह का निधन अक्टूबर 2025 में 102 वर्ष की आयु में हो गया था।
जात्रा सिंह को सम्मानित किये जाने की घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने कहा कि पद्म श्री से सम्मानित होना राज्य की सांस्कृतिक विरासत में जात्रा सिंह के अद्वितीय योगदान को मान्यता है।
'नट संकीर्तन' मणिपुर के मैतेई वैष्णव समुदाय का एक जीवंत, अनुष्ठानिक गायन, नृत्य और ढोल वादन प्रदर्शन है, जो भगवान कृष्ण के जीवन को समर्पित है। यह एक सांस्कृतिक विरासत है जिसमें भक्त ढोल (पुंग) और झांझ के साथ गाते-नाचते हैं।
भाषा धीरज नरेश
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