केंद्रीय बजट में केरल को सीमित लाभ दिये जाने पर राज्य के नेताओं ने जताई निराशा
दिलीप
- 01 Feb 2026, 03:43 PM
- Updated: 03:43 PM
तिरुवनंतपुरम, एक फरवरी (भाषा) केरल में सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ), विपक्षी कांग्रेस नीत संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) और यहां तक कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रदेश इकाई के नेताओं के बीच केंद्रीय बजट में राज्य के लिए कम से कम दो प्रमुख घोषणाओं-हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की मंजूरी को लेकर काफी उम्मीदें थीं।
हालांकि, रविवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा 2026-27 का बजट पेश किए जाने के बाद ये उम्मीदें अधूरी ही रह गईं।
सीतारमण द्वारा पेश बजट में केरल के लिए खास लाभ देखने को नहीं मिला, केंद्र की योजनाओं में राज्य की कई बहुप्रतीक्षित परियोजनाएं शामिल नहीं की गईं। प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर में केरल को जगह नहीं मिली, जबकि पड़ोसी तमिलनाडु, कर्नाटक और तेलंगाना को नेटवर्क विस्तार में शामिल किया गया है।
आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर उम्मीदें और ज्यादा थीं, क्योंकि भारतीय जनता पार्टी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) नीत एलडीएफ और कांग्रेस नीत यूडीएफ के प्रभुत्व वाले इस राज्य में अपनी राजनीतिक पैठ बनाने की कोशिश कर रही है।
हालांकि, बजट में केरल को एक व्यापक औद्योगिक पहल के तहत शामिल किया गया है। नवंबर 2025 में शुरू की गई 'रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट' योजना में ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे खनिज-समृद्ध राज्यों को सहायता देने का प्रस्ताव है।
राज्य में भाजपा नेताओं ने कहा कि वे बजट का अध्ययन करने के बाद प्रतिक्रिया देंगे, जबकि सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा के दलों और विपक्षी यूडीएफ ने राज्य के लिए प्रमुख परियोजनाओं की घोषणा न होने पर असंतोष जताया।
राज्य के उद्योग मंत्री पी. राजीव ने कहा कि हाल में हाई-स्पीड रेलवे लाइन को लेकर हुई चर्चाओं के बाद यह धारणा बनी थी कि बजट में केरल को यह परियोजना मिलेगी।
उन्होंने कहा, "केरल ने सबसे पहले केंद्र को प्रस्ताव सौंपा था, इसके बावजूद उस पर विचार नहीं किया गया।"
एम्स के मुद्दे पर राजीव ने कहा कि केंद्र के निर्देश पर राज्य ने तीन स्थान सुझाए थे और बाद में एक स्थान को अंतिम रूप दिया गया था।
उन्होंने कहा, "उद्योग विभाग के अंतर्गत आने वाली भूमि किनालूर में स्वास्थ्य विभाग को एम्स के लिए सौंप दी गई, फिर भी इसकी मंजूरी नहीं दी गई।"
राजीव ने 'रेयर अर्थ' गलियारे को लेकर प्रस्तावित संशोधनों पर भी चिंता जताई और कहा कि इससे केंद्र को राज्यों को दरकिनार कर 'रेयर अर्थ' संसाधनों के अधिग्रहण का अधिकार मिल सकता है।
माकपा सांसद जॉन ब्रिटास ने नयी दिल्ली में संवाददाताओं से कहा कि विधानसभा चुनावों को देखते हुए केरल को कम से कम कुछ सौगात मिलने की उम्मीद थी।
उन्होंने बताया कि बजट से पहले केंद्रीय वित्त मंत्री से मुलाकात के दौरान केरल के वित्त मंत्री ने 29 प्रमुख मांगें रखी थीं।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने 'मेट्रोमैन' ई. श्रीधरन के जरिए हाई-स्पीड रेल परियोजना का प्रचार कर केरल की जनता को गुमराह करने की कोशिश की।
रेवॉल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) के सांसद एन. के. प्रेमचंद्रन ने कहा कि बजट में बेरोजगारी और निवेश जैसे अहम मुद्दों को नजरअंदाज किया गया है।
उन्होंने कहा, "सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर घोषित किए गए, लेकिन केरल को बाहर रखा गया। श्रीधरन ने दावा किया था कि केरल को यह परियोजना मिलेगी, लेकिन बजट में इसका कोई उल्लेख नहीं है।"
उन्होंने कहा कि केरल को एम्स न आवंटित किया जाना राज्य के प्रति उपेक्षा को दर्शाता है।
भाषा खारी दिलीप
दिलीप
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