फर्जी जाति प्रमाणपत्र, किसानों की समस्या और मानव पशु संघर्ष जैसे मुद्दे उठाए गए रास में
अविनाश
- 02 Feb 2026, 03:04 PM
- Updated: 03:04 PM
नयी दिल्ली, दो फरवरी (भाषा) राज्यसभा में सोमवार को सदस्यों ने फर्जी जाति प्रमाणपत्र, किसानों की समस्याओं और मानव पशु संघर्ष जैसे मुद्दे उठाए और सरकार से इनके समाधान की मांग करते हुए कहा कि आम आदमी को इन वजहों से कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
शून्यकाल में भारतीय जनता पार्टी के सुमेर सिंह सोलंकी ने फर्जी जाति प्रमाणपत्र का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि फर्जी जाति प्रमाणपत्र बना कर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों के अधिकारों का हनन किया जा रहा है। ''यह सिलसिला जारी है और असली हकदार अपने अधिकारों से वंचित रह जाते हैं। यह सामाजिक अन्याय नहीं बल्कि संवैधानिक मानकों का उल्लंघन है।''
उन्होंने सरकार से मांग की ऐसे मामलों में कड़े कदम उठाए जाएं ताकि फर्जी प्रमाणपत्र बनवाने वालों और बनाने वालों पर लगाम लग सके।
बीजू जनता दल के सस्मित पात्रा ने किसानों से जुड़ा मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि किसानों की कई समस्याएं हैं और दूर-दूर तक उनके समाधान के आसार नहीं हैं।
पात्रा ने कहा कि ओडिशा में बेमौसम बारिश की वजह से फसलें खराब हो गई हैं। उनके अनुसार, जिस हिस्से में फसलें बची हैं, वहां सरकारी खरीद समय पर नहीं हो पा रही है।
बीजद सदस्य ने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा में विलंब होने की वजह से किसान अपने उत्पाद को औने पौने दाम में बेचने के लिए बाध्य हैं।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) की डॉ फौजिया खान ने बीते कुछ साल में हुए पलायन का मुद्दा उठाया और कहा कि इसकी आड़ में घुसपैठ भी हो जाती है। दूसरे देशों से इस तरह भारत में आने वाले लोग यहां रहने के लिए आवश्यक दस्तावेज जुटा लेते हैं। ''इस पर रोक लगाने के लिए कड़े कदम उठाने चाहिए।''
समाजवादी पार्टी के जावेद अली खान ने कहा कि 1961 में तब के प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने राष्ट्रीय एकता परिषद के नाम से एक सलाहकार परिषद का गठन किया था। ''लंबे समय तक इस परिषद ने काम किया लेकिन पिछले 13 या 14 साल से राष्ट्रीय एकता परिषद की एक भी बैठक नहीं हुई है।''
उन्होंने सवाल किया कि यह परिषद गृह मंत्रालय की वेबसाइट पर दिखती है लेकिन वास्तव में यह है कहां ? उन्होंने मांग की कि इस परिषद को पुन:सक्रिय किया जाना चाहिए।
माकपा के डा. वी शिवदासान ने कहा कि देश में डिजिटल इंडिया की बात की जाती है लेकिन इस कौशल से कितने लोग परिचित हैं, यह भी देखना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि कई स्कूल कंप्यूटर के बिना ही काम कर रहे हैं और डिजिटल दस्तावेजों के अभाव में लोग अपनी पहचान साबित नहीं कर पा रहे हैं।
उन्होंने कहा ''इसका एक बड़ा कारण यह है कि लोगों को डिजिटलीकरण के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं है। इसका हल जरूरी है।
माकपा के ही जॉन ब्रिटास ने मानव पशु संघर्ष का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि एक ओर मानव बस्तियों का विस्तार हो रहा है वहीं दूसरी ओर वन क्षेत्र घट रहा है जिसकी वजह से पशु मानव बस्तियों की ओर आते हैं और संघर्ष होता है। उन्होंने मांग की कि वन क्षेत्रों में किसी भी तरह का हस्तक्षेप नहीं किया जाना चाहिए।
भाषा मनीषा माधव
मनीषा अविनाश
अविनाश
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