नयी श्रम संहिता के तहत नियमों को फरवरी के अंत तक अंतिम रूप दिया जाएगा : केंद्र
नरेश
- 02 Feb 2026, 05:15 PM
- Updated: 05:15 PM
नयी दिल्ली, दो फरवरी (भाषा) केंद्र सरकार ने सोमवार को दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया कि औद्योगिक संबंध संहिता के तहत नियमों को फरवरी के अंत तक अंतिम रूप दे दिया जाएगा।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने मुख्य न्यायाधीश डी के उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ को सूचित किया कि लोगों से सुझाव मांगे गए हैं और नियमों को तैयार करने पर विचार किया जा रहा है।
अदालत औद्योगिक संबंध संहिता 2020 के कार्यान्वयन से संबंधित एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो ट्रेड यूनियन, औद्योगिक प्रतिष्ठान में रोजगार की शर्तों और औद्योगिक विवादों के निपटारे से संबंधित सभी कानूनों को एकीकृत करती है।
याचिकाकर्ताओं एन ए सेबेस्टियन और सुनील कुमार के अनुसार केंद्र सरकार ने 21 नवंबर, 2025 को एक अधिसूचना प्रकाशित की, जिसमें औद्योगिक संबंध संहिता 2020 को अधिसूचित किया गया लेकिन नयी व्यवस्था को लागू करने के लिए नियम नहीं बनाए गए और न ही इसके तहत न्यायाधिकरणों का गठन किया गया।
सोमवार को सॉलिसिटर जनरल मेहता ने कहा कि केंद्र ने मौजूदा कमियों को दूर करने और सुचारू बदलाव सुनिश्चित करने के लिए दो अधिसूचनाएं जारी की हैं।
उन्होंने कहा कि इन अधिसूचनाओं के माध्यम से पूर्ववर्ती श्रम कानूनों को 21 नवंबर, 2025 से निरस्त कर दिया गया है और यह स्पष्ट किया गया है कि पूर्ववर्ती श्रम कानूनों के तहत स्थापित न्यायाधिकरण तब तक कार्य करते रहेंगे जब तक कि नयी संहिता के तहत ऐसे वैधानिक निकायों का गठन नहीं हो जाता।
अदालत ने याचिकाकर्ताओं की चिंताओं का समाधान हो जाने की बात कहते हुए कार्यवाही समाप्त कर दी।
अदालत ने कहा कि नियम बनाए जाने के बाद यदि नयी श्रम संहिता के कार्यान्वयन में कोई समस्या आती है, तो याचिकाकर्ता उस समय याचिका दायर करके इसे उठा सकते हैं।
याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि नियमों के अभाव में कानूनी रिक्तता उत्पन्न हो जाएगी और पूर्ववर्ती कानूनों के तहत अधिकारी कार्य करने में सक्षम नहीं होंगे।
हालांकि, अदालत ने कहा कि ऐसी आशंकाएं निराधार हैं। अदालत ने कहा, ''हमारी राय में, याचिका से संबंधित चिंताओं का समाधान हो चुका है और कार्यवाही जारी रखने की आवश्यकता नहीं होगी।''
याचिकाकर्ताओं ने कहा कि संहिता में सभी लंबित मामलों को उन न्यायाधिकरणों में स्थानांतरित करने का प्रावधान है जिनका कोई अस्तित्व ही नहीं है। उन्होंने यह भी दावा किया कि दिल्ली में औद्योगिक न्यायाधिकरणों और श्रम अदालतों का पूरा कामकाज ठप हो गया है और घोर अव्यवस्था की स्थिति है।
भाषा आशीष नरेश
नरेश
0202 1715 दिल्ली