संजय सिंह ने यूजीसी की नयी नियमावली को लेकर केंद्र पर तीखा हमला बोला
प्रशांत
- 02 Feb 2026, 07:58 PM
- Updated: 07:58 PM
नयी दिल्ली, दो फरवरी (भाषा) राज्यसभा में सोमवार को आम आदमी पार्टी (आप) के संजय सिंह ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के माघ मेले से बिना स्नान किए लौटने, वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर मूर्तियां तोड़े जाने और यूजीसी की नयी नियमावली को लेकर सोमवार को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला।
राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर पेश किए गए धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए आप नेता सिंह ने दावा किया कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद माघ मेले में स्नान करने जा रहे थे लेकिन उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया। उनसे सवाल किया गया कि वह शंकराचार्य हैं या नहीं।
उन्होंने कहा कि शंकराचार्य बिना स्नान किए चले गए। उन्होंने कहा कि इस देश में अब अरावली पर्वत को बताना है कि पर्वत है कि नहीं, दिल्ली की हवाओं को बताना होगा कि वह प्रदूषित है कि नहीं, इस देश के वोटर को बताना होगा कि वो देश के नागरिक हैं कि नहीं।
सिंह ने कहा कि पिछले दिनों वह पदयात्रा कर रहे थे, उसी दौरान ''मणिकर्णिका घाट पर माता अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा तोड़ी गयी... मैंने एक वीडियो ट्वीट कर दिया तो मुझ पर मुकदमा लिख दिया गया।''
उन्होंने कहा कि भाजपा के कई नेताओं ने भी कहा है कि मूर्ति तोड़ी गई है। उन्होंने कहा कि तोड़फोड़ करने वाले गुनहगारों पर कार्रवाई करनी चाहिए थी, लेकिन उनके खिलाफ की जा रही है।
सिंह ने सरकार को चुनौती देते हुए कहा, ''तीन सदस्य मणिकर्णिका भेजे जाएं, तीनों के तीनों भाजपा के ही हों। वे दिखाएं कि अहिल्याबाई की प्रतिमा जस की तस हैं। फिर मुझ पर कार्रवाई करिए।'' उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा को धर्म में भी धंधा करना है।
आप सदस्य ने कहा कि सरकार 2047 में विकसित भारत बनाने का सब्जबाग दिखा रहे हैं जबकि शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास के बजट में कटौती कर दी गयी है। उन्होंने सवाल किया, ''ऐसे में विकसित भारत कैसे होगा। अशिक्षित, अस्वस्थ्य, अविकसित गांवों के साथ कैसे करेंगे विकसित भारत का निर्माण।''
सिंह ने कहा, '' आप कहते हैं कि महात्मा गांधी की हत्या से संघ (आरएसएस) का कोई लेना-देना नहीं...आइए, हम सब मिलकर उस विचारधारा को खत्म करें जिसने महात्मा गांधी की हत्या की...आप देश को बांटने का काम कर रहे हैं।''
उन्होंने कहा कि अभी सरकार एक विधेयक लेकर आयी जिस पर उच्चतम न्यायालय ने कहा कि यह अस्पष्ट है। उन्होंने कहा कि यूजीसी का ऐसा विधेयक लेकर क्यों आए कि देश में झगड़े का माहौल बना दिया।
सिंह ने आरोप लगाया कि भाजपा कभी दलित-पिछड़ा-आदिवासी हितैषी रही ही नहीं है। उन्होंने कहा, ''आप बस हल्ला मचा रहे थे। आपने इस देश में विश्वविद्यालयों के अंदर आरक्षण खत्म कर दिया है। आरक्षित वर्ग में 80 फीसदी से ज्यादा पद खाली हैं।''
उन्होंने कहा, '' आप न्याय नहीं, नौटंकी करते हैं। अगर आपकी नीयत साफ है तो हर विश्वविद्यालय में दो तरह की समिति बनाइए, एक समिति जाति आधारित भेदभाव के लिए और दूसरी समिति भाषा और अन्य भेदभाव के लिए। कोई झगड़ा ही नहीं होता।''
चर्चा में वाईएसआर सीपी के सुभाष चंद्र बोस पिल्लै ने भी भाग लिया।
भाषा अविनाश प्रशांत
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0202 1958 संसद