अलगाववादी अंद्राबी की सजा पर पूर्ववर्ती न्यायाधीश दलीले सुनेंगे : एनआईए अदालत
नेत्रपाल
- 02 Feb 2026, 08:19 PM
- Updated: 08:19 PM
नयी दिल्ली, दो फरवरी (भाषा) दिल्ली स्थित पटियाला हाउस अदालत परिसर में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) के मामलों की सुनवाई करने वाली विशेष अदालत ने सोमवार को स्पष्ट किया कि कश्मीरी अलगाववादी आसिया अंद्राबी और दो अन्य को अपने स्थानंतरण के बाद दोषी करार देने का आदेश पारित करने वाले पूर्ववर्ती न्यायाधीश ही उनकी सजा को लेकर भी दलीलें सुनेंगे।
विशेष न्यायाधीश चंद्रजीत सिंह का तबादला नवंबर 2025 में एनआईए अदालत से कड़कड़डूमा अदालत में कर दिया गया था। हालांकि, मामले में फैसला लंबित होने के कारण उन्होंने फैसला सुनाने के लिए मामले की फाइल अपने पास रखी।
उन्होंने 14 जनवरी को अंद्राबी और अन्य को देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश रचने और आतंकवादी संगठन के सदस्य होने सहित कई अपराधों में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए), 1967 के तहत दोषी ठहराया था।
एनआईए अदालत के मौजूदा विशेष न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने सोमवार को कहा कि यूएपीए की धारा 16 के अनुसार, ''जो कोई भी आतंकी कृत्य करता है, यदि ऐसे कृत्य के परिणामस्वरूप किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है, तो उसे मृत्युदंड या आजीवन कारावास की सजा दी जाएगी और जुर्माना भी लगाया जाएगा।''
उन्होंने कहा कि अब सवाल यह उठता है कि क्या सजा पर आदेश पारित करने के उद्देश्य से इस न्यायालय को सजा पर दलीलें सुननी चाहिए या अदालत के पूर्ववर्ती न्यायाधीश द्वारा सुनी जानी चाहिए, जिन्होंने आरोपियों के दोषी होने का फैसला सुनाया था?
न्यायाधीश शर्मा ने कानून और न्यायिक मिसालों का हवाला देते हुए कहा, ''आपराधिक मामलों में दोषसिद्धि का फैसला तब पूरा होता है जब सजा पर आदेश पारित किया जाता है।''
उन्होंने कहा, ''अगर इस अदालत के पूर्ववर्ती न्यायाधीश ने मुझे इस अदालत में स्थानांतरित किए जाने से पहले (20 नवंबर, 2024 को) दोषसिद्धि का फैसला सुना दिया होता, तो स्थिति अलग होती।''
न्यायाधीश शर्मा ने कहा, ''ऐसी स्थिति में, पक्षों के साथ किसी भी तरह के पूर्वाग्रह से बचने और इस मामले के शीघ्र निस्तारण के लिए, मैं सजा पर आदेश पारित कर सकता था। लेकिन वर्तमान मामले में ऐसी स्थिति नहीं है।''
उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती न्यायाधीश स्थानांतरण आदेश के बाद निर्णय सुनाने के लिए मामले की फाइल अपने साथ ले गए थे, और दोषसिद्धि का आदेश पारित होने से पहले, फैसले के लिए निर्धारित मामले को 26 नवंबर, 11 दिसंबर, 24 दिसंबर और एक जनवरी को स्थगित कर दिया गया था।
उन्होंने कहा, ''इसलिए, उक्त सभी तिथियों पर, इस न्यायालय के पूर्ववर्ती न्यायालय ने इस मामले की सुनवाई की थी। उन्होंने न केवल अंतिम दलीलें विस्तार से सुनी थीं, बल्कि इस मामले के रिकॉर्ड का भी बारीकी से अध्ययन किया था।''
न्यायाधीश ने कहा कि उनके पूर्ववर्ती ने बचाव पक्ष के साक्ष्य प्रस्तुत करने से लेकर निर्णय सुरक्षित रखने तक के चरण तक मामले की सुनवाई की थी।
उन्होंने कहा, ''कानून के अनुसार, इस न्यायालय के पूर्ववर्ती न्यायाधीश को सजा पर आदेश पारित करना चाहिए ताकि दोषी व्यक्ति कानून के अनुसार, यदि आवश्यक हो, तो अपील दायर कर सकें। अब, ऐसी स्थिति में, यदि मैं सजा पर आदेश पारित करता हूं, तो यह उचित नहीं होगा।''
उन्होंने तिहाड़ जेल के अधीक्षक को निर्देश दिया कि वह दोषियों को 11 फरवरी को कड़कड़डूमा स्थित न्यायाधीश सिंह की अदालत में पेश करें।
महिला अलगाववादी समूह दुख्तरान-ए-मिल्लत (डीईएम) की संस्थापक अंद्राबी को अप्रैल 2018 में गिरफ्तार किया गया था। उसके खिलाफ आतंकी कृत्यों को अंजाम देने की साजिश रचने और ऐसे समूहों को समर्थन देने के आरोप में यूएपीए के तहत आरोप तय किए गए थे।
अदालत ने 14 जनवरी को अंद्राबी और उसकी दो सहयोगियों, सोफी फहमीदा और नाहिदा नसरीन को यूएपीए की धारा 18 (षड्यंत्र के लिए सजा) और 38 (आतंकवादी संगठन की सदस्यता से संबंधित अपराध) के तहत दोषी करार दिया था।
भाषा धीरज नेत्रपाल
नेत्रपाल
0202 2019 दिल्ली