ग्रेटर नोएडा में लंबी दूरी की तीन ट्रेनों के ठहराव सहित विभिन्न मुद्दे उठाए गए रास में
अविनाश
- 03 Feb 2026, 02:56 PM
- Updated: 02:56 PM
नयी दिल्ली, तीन फरवरी (भाषा) राज्यसभा में मंगलवार को ग्रेटर नोएडा में लंबी दूरी की तीन ट्रेनों के ठहराव की अनुमति देने की मांग किए जाने के साथ ही बच्चों के सोशल मीडिया पर अधिक समय बिताने और उच्च शिक्षा ले रहे छात्रों की आत्महत्या जैसे मुद्दे उठाये गए।
उच्च सदन में शून्यकाल के दौरान भाजपा के सुरेंद्र सिंह नागर ने कहा कि ग्रेटर नोएडा की आबादी 12 लाख से अधिक है और वहां उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड सहित आसपास के कई राज्यों के लोग रहते हैं और दूसरे राज्यों से बड़ी संख्या में विद्यार्थी भी पढ़ने के लिए आते हैं।
नागर ने कहा कि इतनी बड़ी आबादी के बावजूद लंबी दूरी की ट्रेन पकड़ने के लिए लोगों को ग्रेटर नोएडा से 50 किमी दूर गाजियाबाद या दिल्ली जाना पड़ता है जिससे ट्रैफिक जाम होता है और लोगों को आर्थिक दिक्कत का भी सामना करना पड़ता है।
भाजपा सदस्य ने कहा कि ग्रेटर नोएडा के दादरी और बोड़ाकी रेलवे स्टेशन से रोज प्रयागराज रीवा सुपर फास्ट एक्सप्रेस, वंदे भारत शताब्दी एक्सप्रेस और शिवगंगा एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें गुजरती हैं लेकिन ग्रेटर नोएडा में उनका ठहराव नहीं है।
उन्होंने मांग की कि इन तीनों ट्रेनों के दादरी और बोड़ाकी में ठहराव की अनुमति दी जाए ताकि वहां के लोगों को राहत मिल सके। ''रेल मंत्री देखें कि उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर के ग्रेटर नोएडा के लोग कितनी समस्या का सामना करते हैं।''
नागर ने यह भी मांग की कि जनहित में ग्रेटर नोएडा को रेलवे 'हब' बनाने के लिए बोड़ाकी रेलवे स्टेशन का जल्द से जल्द विकास किया जाए।
भाजपा की सीमा द्विवेदी ने कहा कि उत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल से हो कर कई ट्रेनें गुजरती हैं लेकिन ठहराव नहीं होने की वजह से प्रयागराज के लोग 60 किमी दूर अन्य रेलवे स्टेशन जाते हैं। ''इन ट्रेनों का जंघई जंक्शन पर ठहराव सुनिश्चित करें।''
जनता दल (यूनाइटेड) के संजय कुमार झा ने कहा कि बच्चे सोशल मीडिया का अंधाधुंध उपयोग करते हैं और ऑस्ट्रेलिया में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
उन्होंने कहा कि जीवन शैली कुछ ऐसी हो गई है कि हमारे भारत में भी बच्चे सोशल मीडिया पर बहुत समय बिताते हैं। ''इस पर रोक जरूरी है अन्यथा एकाग्रता में कमी, नजर कमजोर होने, मोटापा सहित कई तरह की समस्याएं बच्चों को हो सकती हैं। इसे डिजिटल एडिक्शन कहना अधिक बेहतर होगा।''
झा ने मांग की कि इस समय जरूरी है कि मतभेद भुला कर सभी लोग इस मुद्दे पर गहन चर्चा करें और एक व्यापक नीति तैयार की जाए ताकि बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखना आसान हो।
राष्ट्रीय जनता दल के मनोज कुमार झा ने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों के छात्रों की आत्महत्या के मामलों में तेजी बताती है कि बच्चे उन पर पड़ रहे दबावों का सामना नहीं कर पाते। उन्होंने कहा कि आत्महत्या का कारण कहीं लैंगिक उत्पीड़न, कहीं जातिगत उत्पीड़न कहीं आर्थिक संकट भी होता है।
झा ने मांग की कि सरकार को ऐसे छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य की ओर ध्यान देना होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार मसौदा बनाती है पर वह जमीन पर नहीं उतरता और अभिभावक अपनी संतान खो देते हैं।
शून्यकाल में ही भाजपा के मनोनीत सतनाम सिंह संधू, वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के गोला बाबू राव, कांग्रेस के नीरज डांगी और तेदेपा के मस्तान राव यादव बीधा ने भी लोक महत्व से जुड़े अपने-अपने मुद्दे उठाए।
भाषा
मनीषा अविनाश
अविनाश
0302 1456 संसद