दिल्ली में महिला 'गिग' कामगारों का विरोध प्रदर्शन
आशीष
- 03 Feb 2026, 07:41 PM
- Updated: 07:41 PM
(फोटो सहित)
नयी दिल्ली, तीन फरवरी (भाषा) दिल्ली के जंतर-मंतर पर मंगलवार को 100 से अधिक 'गिग' कामगारों ने कर्मचारी के रूप में मान्यता की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि डिजिटल मंचों पर मनमाने ढंग से खाते ब्लॉक किए जा रहे हैं, कमाई कम हो रही है और बुनियादी श्रम सुरक्षा का अभाव है।
प्रदर्शन में अधिकतर महिलाएं थीं।
गिग कामगार 'जोमैटो', 'स्वीगी' जैसी सेवा प्रदाता कंपनी में काम करने वाले अस्थायी कर्मचारी हैं।
यह प्रदर्शन 'गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विसेज वर्कर्स यूनियन' (जीपीएसआईडब्ल्यूयू) द्वारा किया गया, जो महिलाओं के नेतृत्व वाला संगठन है।
संगठन ने कहा कि कर्नाटक, महाराष्ट्र और राजस्थान में भी इसी तरह के प्रदर्शन हो रहे हैं।
पंजाबी बाग में घरेलू सेवा मुहैया कराने वाली एक कंपनी में काम करने वालीं सुनीता ने बताया कि प्रदर्शन में शामिल होने के कारण उनकी दैनिक आय में लगभग 900 रुपये का नुकसान हो चुका है।
सुनीता ने बताया कि काम के घंटे और स्थिर कमाई के वादे की वजह से वह इस काम के प्रति आकर्षित हुई थीं लेकिन अब उन्हें लगातार अपना खाता ब्लॉक होने का डर सताता रहता है।
उन्होंने आरोप लगाया, ''शुरुआत में बहुत बुकिंग आती थीं। कंपनी के लोगों ने कहा था कि मैं अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकती हूं। अब बिना किसी स्पष्टीकरण के मेरी आईडी ब्लॉक कर दी गई है।''
एक अन्य प्रदर्शनकारी ने बताया कि उसने लगभग चार साल तक उसी कंपनी में काम किया, जिसके बाद 2022 में उसका खाता निलंबित कर दिया गया।
प्रदर्शनकारी महिला ने बताया कि कुछ महीनों बाद उसके पति की मौत हो गयी, जिसके बाद उसे स्थायी नौकरी पाने के लिए संघर्ष करना पड़ा।
उसने बताया कि कुछ समय के लिए 15,000 रुपये प्रति माह की मजदूरी पर रसोइया का काम करने के बाद जब परिवार दिल्ली से बाहर चला गया, तो उसकी वह नौकरी भी चली गई।
कई प्रदर्शनकारियों का कहना था अगर उनकी पहचान हो गई तो उन्हें बदले की कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
संगठन की अध्यक्ष सीमा सिंह ने आरोप लगाया कि जब कामगारों को खाता निलंबित होने, भुगतान संबंधी विवाद या सुरक्षा संबंधी चिंताओं का सामना करना पड़ता है, तो कंपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेती है।
उन्होंने दावा किया, "जब कुछ गड़बड़ होती है, तो कोई मानवीय सहायता नहीं मिलती। गुरुग्राम स्थित कंपनी कार्यालयों में जाने वाले कामगारों को अक्सर बिना समाधान के वापस भेज दिया जाता है। कभी-कभी तो उन्हें अंदर भी नहीं जाने दिया जाता।"
सिंह ने यह भी बताया कि यौन उत्पीड़न या देर रात सुरक्षा संबंधी जोखिमों के मामलों में महिला कामगारों को बहुत कम सहायता मिलती है।
उन्होंने कहा, "वे सिर्फ एक एआई चैटबॉट उपलब्ध कराते हैं। यह दुर्व्यवहार का सामना कर रही महिला की मदद नहीं कर सकता।"
संगठन ने हाल में हुए एक सर्वेक्षण के निष्कर्षों का हवाला देते हुए कहा कि भारत में बड़ी संख्या में 'गिग' कामगार बेहद लंबे समय तक काम करते हैं, जिनमें से लगभग एक चौथाई प्रति सप्ताह 70 घंटे से अधिक काम करते हैं और आधे से अधिक श्रमिक 49 घंटे से अधिक काम करते हैं।
भाषा जितेंद्र आशीष
आशीष
0302 1941 दिल्ली