''क्या सदन एलन मस्क के 'एक्स' से कमतर है?'': जॉन ब्रिटास
पवनेश
- 03 Feb 2026, 09:17 PM
- Updated: 09:17 PM
नयी दिल्ली, तीन फरवरी (भाषा) राज्यसभा में मंगलवार को मार्क्सवादी क्म्युनिस्ट पार्टी (माकपा) सदस्य जॉन ब्रिटास ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की घोषणा संसद के बजाय सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर किए जाने के लिए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और सवाल किया कि क्या सदन ''एलन मस्क के 'एक्स' मंच से कमतर हो गया है।''
उच्च सदन में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए ब्रिटास ने समझौते का भारत के कृषि क्षेत्र पर संभावित प्रभाव को लेकर चिंता जतायी और सरकार पर देश की संप्रभुता से समझौता करने का आरोप लगाया।
ब्रिटास ने सरकार की इस बात के लिए भी आलोचना की कि उसने समझौते की घोषणा रात नौ बजे सोशल मीडिया पर की, जबकि संसद का सत्र चल रहा है। उन्होंने कहा कि इस देश की स्वस्थ परंपरा रही है कि संसद सत्र के दौरान कोई भी नीतिगत निर्णय, कोई भी महत्वपूर्ण निर्णय, सदन में घोषित किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा उल्लिखित तीन प्रमुख मुद्दों पर प्रकाश डाला कि भारत रूस से तेल नहीं खरीदेगा, सभी व्यापार बाधाएं हटा दी जाएंगी और आयातित वस्तुओं पर शून्य शुल्क लगेगा तथा भारत अमेरिका से 500 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य का सामान आयात करेगा।
उन्होंने कहा कि इसका मतलब लगभग 45 लाख करोड़ रुपये है। बाद में यह 47 लाख करोड़ रुपये हो जाएगा क्योंकि रुपया तेजी से गिर रहा है।
चर्चा में भाग लेते हुए शिवसेना सदस्य मिलिंद देवरा ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की घोषणा के समय को लेकर ब्रिटास द्वारा की गई आलोचना पर तंज कसा और कहा कि दुनिया अलग-अलग 'टाइम जोन' में चलती है।
देवरा ने कहा, ''मुझे नहीं पता कि आपको जानकारी है या नहीं, लेकिन दुनिया में अलग-अलग टाइम जोन हैं। जब भारत में रात 10 बजते हैं, तो अमेरिका में दोपहर के 12 बजते हैं।''
मणिपुर से भाजपा सदस्य महाराजा संजाओबा लेशंबा ने कहा कि तत्कालीन संप्रग सरकार की नीति ने पूर्वोत्तर को अस्थिरता की ओर धकेल दिया। उन्होंने मोदी सरकार की सराहना करते हुए कहा कि 'पूर्वोदय' की परिकल्पना के साथ, केंद्र सरकार पूर्वोत्तर के लिए समावेशी विकास सुनिश्चित कर रही है और इस क्षेत्र में दीर्घकालिक स्थिरता ला रही है।
चर्चा में भाग लेते हुए राष्ट्रीय लोक मोर्चा सदस्य उपेंद्र कुशवाहा ने बिहार की राजधानी पटना का नाम बदलकर पाटलिपुत्र रखे जाने की मांग की और कहा कि इससे लोग अतीत से जुड़ाव महसूस कर सकेंगे।
चर्चा में आईयूएमएल सदस्य हारिस बीरन, बीजद के मानस मंगराज, भाजपा के नरेश बंसल, एस सेल्वागणबथी, अजीत गोपछड़े, कल्पना सैनी, निर्दलीय अजीत कुमार भूइया आदि ने भी भाग लिया।
भाषा अविनाश पवनेश
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0302 2117 संसद