ओवैसी ने केंद्र से पूछा: हमने चीन के साथ कौन सा 'समझौता' किया है?
राजकुमार
- 03 Feb 2026, 11:22 PM
- Updated: 11:22 PM
हैदराबाद, तीन फरवरी (भाषा) ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने मंगलवार को केंद्र सरकार से पूछा कि क्या भारतीय सेना चीन के साथ लगती सीमा पर उन सभी क्षेत्रों में गश्त करने में सक्षम है, जहां वह अप्रैल 2020 से पहले गश्त करती थी।
उन्होंने यह भी जानना चाहा कि सरकार ने पड़ोसी देश के साथ क्या "समझौता" किया है।
ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार से सवाल किया कि क्या वह चीन को पाकिस्तान को सैन्य सहायता प्रदान करने से रोक पाई है? उन्होंने कहा, ''यदि नहीं, तो चीन के साथ हमारी दोस्ती का क्या मतलब है?''
हैदराबाद के सांसद ओवैसी ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, ''हमने चीन के साथ क्या सौदा किया है? प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) बताएं कि क्या हमारी सेना उन सभी क्षेत्रों में गश्त करने में सक्षम है जहां वह अप्रैल 2020 से पहले गश्त करती थी? यदि नहीं, तो क्यों? ये बफर जोन कब तक रहेंगे?"
एक अंतरराष्ट्रीय पत्रिका की रिपोर्ट का हवाला देते हुए ओवैसी ने कहा कि सरकार इसके एक विदेशी पत्रकार को लद्दाख ले गई थी, जिसने बताया कि लद्दाख सीमा पर चीन का बुनियादी ढांचा विकास 2020 के बाद से दोगुना हो गया है। उन्होंने पूछा, "हम ऐसा कैसे होने दे रहे हैं?"
उन्होंने सवाल किया, "आप चीन से इतना डरे हुए क्यों हैं? आपकी सरकार ने चीनी सीमा पर हमारी सेना के गोलीबारी करने पर इतने प्रतिबंध क्यों लगा दिए हैं?"
ओवैसी ने आरोप लगाया कि सरकार ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के बारे में चीन की धारणा को ही बफर जोन के लिए संदर्भ बिंदु बना दिया है।
उन्होंने कहा कि सरकार को वह करना चाहिए जो देश और उसके लोगों के लिए सही हो।
ओवैसी ने कहा कि वह चाहते हैं कि संसद को चलने दिया जाए ताकि विपक्ष को इस मुद्दे पर सवाल उठाने का मौका मिल सके।
उन्होंने कहा, "मेरा अनुमान है कि कल सदन के शोर-शराबे के बीच पीएमओ की ओर से एक बयान दिया जाएगा।"
लोकसभा में मंगलवार को सरकार और विपक्ष के बीच टकराव तब और तेज हो गया जब "अशोभनीय व्यवहार" के लिए विरोध प्रदर्शन कर रहे आठ सांसदों को निलंबित कर दिया गया।
यह कार्रवाई विपक्ष के नेता राहुल गांधी को लगातार दूसरे दिन 2020 के भारत-चीन संघर्ष से जुड़े एक लेख का हवाला देने की अनुमति नहीं दी गई, जिसमें पूर्व सेना प्रमुख एम.एम. नरवणे के एक अप्रकाशित "संस्मरण" का उद्धरण था।
भाषा नोमान राजकुमार
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