तुर्कमान गेट हिंसा: तीन आरोपियों की जमानत याचिका पर फैसला शुक्रवार तक के लिए सुरक्षित
नरेश
- 05 Feb 2026, 08:36 PM
- Updated: 08:36 PM
नयी दिल्ली, पांच फरवरी (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने पिछले महीने तुर्कमान गेट में फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास तोड़फोड़ की कार्रवाई के दौरान पत्थरबाजी की घटना के तीन आरोपियों की जमानत याचिका पर बृहस्पतिवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
अदालत जमानत अर्जी पर शुक्रवार को अपना फैसला सुनाएगी।
मोहम्मद अरीब, मोहम्मद नावेद और मोहम्मद अतहर की जमानत याचिका पर फैसला करने के अलावा, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश भूपिंदर सिंह की अदालत शुक्रवार को बाकी पांच आरोपियों से जुड़ी अन्य दलीलों पर भी सुनवाई करेगी।
सुनवाई के दौरान, अतिरिक्त लोक अभियोजक (एपीपी) अतुल श्रीवास्तव ने अदालत के पिछले निर्देशों के मद्देनजर आठ आरोपियों की जमानत अर्जियों के खिलाफ एक विस्तृत जवाब पेश किया।
अरीब, नावेद और अतहर के अलावा अन्य पांच आरोपियों में मोहम्मद कैफ, मोहम्मद काशिफ, समीर हुसैन, मोहम्मद इमरान और मोहम्मद उबैदुल्ला शामिल हैं।
श्रीवास्तव ने अदालत में बताया कि अरीब ने कार्रवाई की रात को दूसरों को भड़काने के लिए एक व्हाट्सएप ग्रुप में तोड़फोड़ के वीडियो शेयर किए थे। हालांकि, बचाव पक्ष के वकील ने दावा किया कि अरीब ने सिर्फ संदेश साझा किए थे।
एपीपी ने अरीब द्वारा आगे भेजा गया तोड़फोड़ का एक वीडियो चलाया जिसमें कथित तौर पर उसे लोगों को तोड़फोड़ वाली जगह पर इकट्ठा होने के लिए कहते हुए सुना जा सकता है।
श्रीवास्तव ने आरोप लगाया कि अरीब ने पत्थरबाजी की घटना के दौरान घटनास्थल पर खुद के वीडियो बनाए थे, जो मामले में उसकी संलिप्तता का संकेत देते हैं।
दोपहर में, अदालत ने अरीब, नावेद और अतहर की जमानत याचिका पर दलीलें सुनीं।
अरीब के वकील ने अदालत को बताया कि वह ऐसी जगह काम करता था जो हिंसा वाली जगह के पास थी, और घटना के समय वह अपने काम की जगह पर मौजूद था, ये दर्शाने वाली सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध हैं।
अतहर के वकील ने दावा किया कि पुलिस द्वारा पेश किए गए वीडियो फुटेज में उसका चेहरा साफ दिखाई नहीं दे रहा है।
नावेद के वकील ने भी दलील दी कि जांच अधिकारी द्वारा पेश किए गए वीडियो फुटेज में उसका चेहरा साफ दिखाई नहीं दे रहा।
बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि हिंसा में नावेद की किसी खास भूमिका का उल्लेख नहीं किया गया है।
भाषा शफीक नरेश
नरेश
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