ईडी ने आरजी कर अस्पताल में वित्तीय अनियमितताओं के मामले में आरोप-पत्र दाखिल किया
प्रशांत
- 06 Feb 2026, 11:18 PM
- Updated: 11:18 PM
कोलकाता, छह फरवरी (भाषा) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सरकारी आर जी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में वित्तीय अनियमितताओं के एक मामले के संबंध में कथित धन शोधन की जांच के सिलसिले में यहां एक विशेष अदालत के समक्ष शुक्रवार को आरोप-पत्र दाखिल किया।
मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य संदीप घोष और तीन अन्य लोगों को संघीय जांच एजेंसी ने आरोपी बनाया है।
वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा गिरफ्तार किये जाने के बाद घोष फिलहाल जेल में हैं।
ईडी ने एक बयान में कहा कि उसकी जांच में पाया गया है कि आर जी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के खातों से ठेकेदारों के खातों में जमा की गई ''पर्याप्त'' रकम का ठेकेदारों के साथ मिलीभगत करके व्यवस्थित रूप से ''गबन कर लिया गया'', या तो उनके करीबी सहयोगियों को जारी किए गए चेक के माध्यम से निकासी करके या सहयोगी फर्म को हस्तांतरण करके और फिर नकदी के रूप में निकाल लिया गया।
एजेंसी ने आरोप लगाया कि अपराध से प्राप्त धन को अन्य निधियों के साथ मिला दिया गया, नकदी के रूप में निकाला गया और वित्तीय लेन-देन के कई स्तरों के माध्यम से भेजा गया।
ईडी ने कहा, ''ऐसे अवैध लाभ और संरक्षण देने के बदले घोष ने संबंधित ठेकेदारों को 6.89 करोड़ रुपये के ठेके देकर उनसे अवैध रिश्वत और आर्थिक लाभ प्राप्त किया।''
ईडी ने इससे पहले घोष की 52.38 लाख रुपये की संपत्ति कुर्क की थी।
आर जी कर अस्पताल के पूर्व अधिकारी अख्तर अली ने घोष के कार्यकाल के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा संचालित इस अस्पताल में कथित वित्तीय अनियमितताओं की सीबीआई जांच का अनुरोध किया था जिसे कलकत्ता उच्च न्यायालय ने स्वीकार कर लिया था और इस आदेश को उच्चतम न्यायालय ने बरकरार रखा था।
इस मामले में धन के कथित लेन-देन को लेकर ईडी ने एक ईसीआईआर (प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट) दर्ज की थी, जो पुलिस प्राथमिकी के समकक्ष है।
घोष के प्राचार्य रहते हुए ही एक प्रशिक्षु चिकित्सक से दुष्कर्म और उसकी हत्या की घटना हुई थी और उसका शव नौ अगस्त 2024 को उत्तरी कोलकाता में स्थित इस अस्पताल के सम्मेलन कक्ष में मिला था।
कोलकाता पुलिस के पूर्व नागरिक स्वयंसेवक संजय रॉय को जनवरी 2025 में सियालदह सत्र न्यायालय ने इस मामले में अपराधों का दोषी पाए जाने के बाद आजीवन कारावास की सजा सुनाई गयी थी।
भाषा
देवेंद्र प्रशांत
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