बंगाल में 'अनमैप्ड मतदाताओं' के लिए अनधिकृत प्रपत्रों के वितरण को लेकर विवाद
नेत्रपाल
- 13 Feb 2026, 07:03 PM
- Updated: 07:03 PM
कोलकाता, 13 फरवरी (भाषा) पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया के समाप्त होने से पहले 'अनमैप्ड' की श्रेणी में आने वाले मतदाताओं के लिए कथित तौर पर अनधिकृत फॉर्म के वितरण को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
ऐसी खबरें हैं कि अनधिकृत प्रपत्र वितरित किए जा रहे हैं जिनमें उन ''अनमैप्ड मतदाताओं'' को शामिल किया जा रहा है जो इस प्रक्रिया के दौरान आवश्यक दस्तावेज जमा करने में विफल रहे हैं।
यह प्रक्रिया समाप्त होने से कुछ ही दिन पहले मुर्शिदाबाद और दक्षिण 24 परगना के कुछ हिस्सों में इस तरह के प्रपत्र वितरित किए जाने के आरोपों के बाद निर्वाचन आयोग को जिला अधिकारियों से रिपोर्ट मांगनी पड़ी है, जबकि मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने इस बात पर जोर दिया है कि निर्वाचन आयोग द्वारा ऐसा कोई प्रपत्र जारी नहीं किया गया था।
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत सुनवाई की प्रक्रिया शनिवार को समाप्त होने वाली है, जिसके बाद मतदाता सूची में शामिल होने के लिए कोई भी नया आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल ने कहा, ''आयोग ने ऐसा कोई प्रपत्र जारी नहीं किया है। हमने जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीईओ) से रिपोर्ट मांगी है।''
बूथ स्तर के अधिकारियों (बीएलओ) के एक वर्ग ने दावा किया कि अनधिकृत प्रपत्र में तथाकथित ''अनमैप्ड मतदाताओं'' को एक घोषणा प्रस्तुत करने की आवश्यकता होती है जिसमें कहा गया है कि न तो उनके पास और न ही उनके परिवार के किसी सदस्य के पास 2002 का दस्तावेज या निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित 13 दस्तावेजों में से कोई भी दस्तावेज है, लेकिन वे लंबे समय से उस क्षेत्र में रह रहे हैं।
अधिकारी ने बताया कि राज्य में वर्तमान में ''अनमैप्ड मतदाताओं'' की संख्या लगभग 32 लाख है।
सवाल उठ रहे हैं कि बिना दस्तावेजी सबूत के, सिर्फ पांच व्यक्तियों के प्रमाणीकरण के आधार पर ऐसे मतदाताओं को अंतिम समय में अंतिम सूची में कैसे शामिल किया जा सकता है।
जब यह मामला अग्रवाल के संज्ञान में लाया गया, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि आयोग ने ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया था।
निर्वाचन आयोग के सूत्रों ने बताया कि इस तरह के प्रपत्र के वितरण के संबंध में जानकारी जादवपुर और हरिहरपाड़ा से प्राप्त हुई थी।
उन क्षेत्रों के बीएलओ ने आरोप लगाया है कि ये प्रपत्र चुनावी पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) द्वारा उपलब्ध कराए गए थे।
भाषा
देवेंद्र नेत्रपाल
नेत्रपाल
1302 1903 कोलकाता