विश्व में अग्रणी बनने के लिए देश को औपनिवेशिक मानसिकता छोड़ने की जरूरत : उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन
शफीक
- 26 Feb 2026, 05:57 PM
- Updated: 05:57 PM
श्रीनगर, 26 फरवरी (भाषा) उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने बृहस्पतिवार को कहा कि देश को नवाचार के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व हासिल करने के लिए औपनिवेशिक मानसिकता को त्यागना होगा।
कश्मीर विश्वविद्यालय के 21वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राधाकृष्णन ने स्नातक छात्रों से आग्रह किया कि वे स्वदेशी नवाचार और ऐसे समाधान पर ध्यान दें, जो भारतीय ज्ञान, संसाधन और जरूरतों पर आधारित हों।
उन्होंने कहा, ''हमें किसी चीज़ को लेकर चिंतित होने की जरूरत नहीं है; हमें हीन महसूस करने की आवश्यकता नहीं है। पहले हमें अपनी औपनिवेशिक मानसिकता को दूर करना होगा।''
उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश में उद्यमिता परिवेशी तंत्र को पहले से कहीं अधिक सक्रिय और अनुकूल बनाया है। उन्होंने छात्रों को शुभकामनाएं देते हुए कहा, ''आप अगला बड़ा नवाचार, सतत विकास का नया तरीका और भारत के वैश्विक नेतृत्व का नया अध्याय पेश करें।''
कोविड-19 महामारी का उल्लेख करते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि प्रधानमंत्री ने देश के सभी वैज्ञानिकों से टीका विकसित करने का आह्वान किया था।
उन्होंने कहा, ''हममें से कितने लोग इसमें विश्वास करते थे? लेकिन हमने सर्वोत्तम टीका विकसित किया, जो पूरी मानवता के लिए प्रभावी साबित हुआ।''
उन्होंने यह भी बताया कि पश्चिमी विकसित अर्थव्यवस्थाओं ने भी टीके पर शोध और इसे विकसित किया, लेकिन वे इसे महंगे दाम में बेचने के लिए पेटेंट के पीछे भाग रहे थे।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय नवाचार को पश्चिमी दुनिया में भी व्यापक रूप से स्वीकार किया गया है। उन्होंने कहा, ''अब पूरी दुनिया आपके लिए खुली है। आपका प्रयास, आपकी रुचि, आपका उत्साह और आपकी मेहनत आपको दुनिया के शीर्ष पर ले जाएगी।''
राधाकृष्णन ने हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा श्रीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के विकास और विस्तार को 1,600 करोड़ रुपये से अधिक की अनुमानित लागत से मंजूरी दिए जाने का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस बात पर जोर दिया था कि पर्यटन का विस्तार होना चाहिए, लेकिन राज्य की पारिस्थितिकी पर असर डाले बिना।
उपराष्ट्रपति ने चिनाब रेल ब्रिज का भी जिक्र किया, जिसे दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पुल बताया गया। उन्होंने इस ब्रिज को इंजीनियरिंग की एक अद्भुत उपलब्धि कहा।
भाषा मनीषा शफीक
शफीक
2602 1757 श्रीनगर