खलनायकों का महिमामंडन पीढ़ियों के लिए खराब : योगी आदित्यनाथ
आनन्द,रवि कांत रवि कांत
- 04 Apr 2026, 01:03 AM
- Updated: 01:03 AM
वाराणसी, तीन अप्रैल (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सिनेमा जगत के निर्माताओं और कलाकारों से फिल्मों में सकारात्मक और आदर्श चरित्रों को प्रमुखता देने की अपील की है।
उन्होंने कहा कि खलनायकों को नायक के रूप में प्रस्तुत करने की प्रवृत्ति ने समाज और पीढ़ियों पर नकारात्मक प्रभाव डाला है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने बीएलडब्ल्यू ग्राउंड पर आयोजित किए जा रहे तीन दिवसीय 'महानाट्य सम्राट विक्रमादिव्य' कार्यक्रम का उद्घाटन किया।
वाराणसी में सम्राट विक्रमादित्य के जीवन पर आधारित एक भव्य नाट्य प्रस्तुति के दौरान शुक्रवार को आदित्यनाथ ने कहा कि यह प्रस्तुति केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि नयी पीढ़ी को मूल्यों और आदर्शों से जोड़ने का एक प्रयास है।
उन्होंने कहा, "एक समय ऐसा था जब फिल्मों में अच्छे पात्रों को खलनायक और खलनायकों को नायक के रूप में दिखाने की प्रवृत्ति बढ़ी। इसका परिणाम यह हुआ कि पीढ़ियां प्रभावित हुईं और समाज में आदर्शों का अभाव देखने को मिला।"
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब समाज के सामने सही आदर्श प्रस्तुत नहीं किए जाते, तो अन्याय, अत्याचार और शोषण के खिलाफ लोगों की आवाज कमजोर पड़ जाती है।
उन्होंने फिल्म निर्माताओं, निर्देशकों और कलाकारों से अपील करते हुए कहा, "ऐसी फिल्में बननी चाहिए जो राष्ट्र के लिए प्रेरणा बनें। यदि किसी डकैत को नायक के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा, तो युवा पीढ़ी उसे ही अपना आदर्श मानने लगेगी। इसलिए कभी भी डकैतों का महिमामंडन न करें।"
आदित्यनाथ ने कहा कि भारतीय सिनेमा ने ऐतिहासिक रूप से देश के मूल्यों और आदर्शों को प्रतिबिंबित करते हुए सकारात्मक भूमिका निभाई है और राष्ट्र निर्माण में योगदान दिया है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में सांस्कृतिक एकता और मजबूत हो रही है।
आदित्यनाथ ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य की जीवनी पर आधारित महानाट्य कार्यक्रम ने बाबा विश्वनाथ की पावन धरा काशी को महाकाल की धरा उज्जैन के साथ सांस्कृतिक रूप से जोड़ते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' अभियान को आगे बढ़ाने का कार्य किया है।
उन्होंने काशी और उज्जैन के बीच सांस्कृतिक संबंधों को इस नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से मजबूत करने के प्रयासों की सराहना की और कहा कि इससे बाबा विश्वनाथ और महाकाल की नगरी के बीच जुड़ाव और गहरा होगा।
मुख्यमंत्री ने भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों-जैसे योग और आयुर्वेद-को वैश्विक स्तर पर मिल रही मान्यता का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत आज पूरी दुनिया में सम्मान प्राप्त कर रही है।
उन्होंने कुंभ जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों में बड़ी संख्या में जनभागीदारी का हवाला देते हुए भारत की सांस्कृतिक शक्ति का उल्लेख किया।
योगी ने कहा, ''वर्तमान अयोध्या को दो हजार वर्ष पहले महाराज विक्रमादित्य ने ही ढूंढा था। उसकी अपनी गाथा व कथा है। महाराज विक्रमादित्य ने इसके शास्त्रीय प्रमाण भी प्रस्तुत किए थे। वह सभी आज भी मौजूद हैं। लव के बाद भगवान श्रीराम का मंदिर सबसे पहले महाराज विक्रमादित्य ने ही बनवाया था।''
मुख्यमंत्री ने कहा कि ''महाराज विक्रमादित्य नीति, शास्त्र और न्याय के पर्याय माने गए हैं। शास्त्र और कालगणना के बारे में उज्जैन की वेधशालाएं इसका उदाहरण प्रस्तुत करती हैं। भारतीय कालगणना विक्रम संवत् के आधार पर आगे बढ़ रही है।''
योगी ने कहा कि ''काशी पंचांग की धरती है। कालगणना की धरती उज्जैन है। इन दोनों का समावेश भारतीय कालगणना को वैश्विक मंच तक पहुंचाने में अपना योगदान देगा और सही तथ्य प्रस्तुत करेगा।''
इससे पहले, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सम्राट विक्रमादित्य की विरासत पर प्रकाश डाला।
यादव ने कहा कि विक्रमादित्य का जीवन दान, वीरता, साहस, परिश्रम और सुशासन का प्रतीक है तथा यह नाट्य प्रस्तुति ऐतिहासिक चेतना को पुनर्जीवित करने में सहायक होगी।
यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश मिलकर दोनों राज्यों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करने के लिए कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार उत्तर प्रदेश सरकार के साथ पर्यटन एवं संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए मिलकर कार्य कर रही हैं और प्रधानमंत्री मोदी के दिशा-निर्देशन में बेतवा नदी को भी जोड़ने का कार्य मध्य प्रदेश सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार के साथ मिलकर किया जा रहा है।
इस अवसर पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को भारत की कालगणना पर आधारित 700 किलोग्राम की विक्रमादित्य वैदिक घड़ी भेंट की। यह वैदिक घड़ी श्री काशी विश्वनाथ मन्दिर में स्थापित की जाएगी।
पद्मश्री डॉ भगवती लाल राजपुरोहित द्वारा रचित और राजेश कुशवाहा द्वारा प्रस्तुत इस महानाट्य का मंचन संजीव मालवी के निर्देशन में किया जा रहा है। इसमें 225 से अधिक कलाकार, हाथी-घोड़े, रथ, पालकियां, भव्य युद्ध, लाइट शो, आतिशबाजी नृत्य और महाकाल की भस्म आरती की दिव्य झलकियां शामिल रहीं। इस महानाट्य में सम्राट विक्रमादित्य के जन्म से राजतिलक तक की गाथा, विक्रम बेताल की कथा और सनातन धर्म के उत्थान की महाकाव्य कथा जीवन्त हुई है।
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