कांग्रेस ने सोनिया, राहुल के पत्रों का हवाला दिया, मोदी पर महिला आरक्षण में विलंब का आरोप लगाया
मनीषा
- 21 Apr 2026, 12:26 PM
- Updated: 12:26 PM
नयी दिल्ली, 21 अप्रैल (भाषा) कांग्रेस ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी द्वारा कुछ साल पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लिखे गए पत्रों का हवाला देते हुए मंगलवार को आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़कर इसके कार्यान्वयन में देरी करना चाहते हैं।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में राहुल गांधी ने 16 जुलाई, 2018 को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर महिला आरक्षण को तत्काल लागू करने की मांग की थी।
रमेश ने एक्स पर पोस्ट किया, "आठ साल बाद, प्रधानमंत्री इसे परिसीमन से जोड़कर आरक्षण के कार्यान्वयन में देरी करना चाहते हैं - अभी भी इस मांग पर कदम नहीं उठा रहे हैं।"
उन्होंने राहुल गांधी के जिस पत्र का हवाला दिया, उसमें राहुल गांधी ने 2018 में संसद के मानसून सत्र में महिला आरक्षण विधेयक को पारित कराने के लिए समर्थन का अनुरोध किया था।
पत्र में गांधी ने कहा था, "प्रधानमंत्री महोदय, अपनी कई सार्वजनिक सभाओं में आपने महिलाओं को सशक्त बनाने और उन्हें सार्वजनिक जीवन में अधिक सार्थक रूप से शामिल करने के अपने जुनून के बारे में बात की है। महिला आरक्षण विधेयक को पारित करने के लिए बिना शर्त समर्थन देने की पेशकश से बेहतर महिलाओं के हितों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित करने का इससे बेहतर तरीका क्या हो सकता है? और संसद के आगामी सत्र से बेहतर समय क्या हो सकता है? किसी भी तरह की देरी से इसे अगले आम चुनाव से पहले लागू करना असंभव हो जाएगा।"
उन्होंने यह भी कहा था, "हमारी महिलाओं को सशक्त बनाने के मुद्दे पर, आइए दलगत राजनीति से ऊपर उठकर एक साथ खड़े हों और भारत को संदेश दें कि हमारा मानना है कि बदलाव का समय आ गया है। महिलाओं को हमारे राज्य विधानसभाओं और संसद में अपना उचित स्थान लेना चाहिए, जहां वर्तमान में उनका प्रतिनिधित्व बहुत कम है।"
रमेश ने 2017 में तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा प्रधानमंत्री मोदी लिखे गए पत्र का हवाला देते हुए कहा, "कांग्रेस पार्टी का रुख अडिग और अपरिवर्तित रहा है। यह मोदी सरकार है जो इस मांग पर सोई रही और फिर इसे परिसीमन से जोड़कर इसमें देरी करने की कोशिश की है।"
कांग्रेस ने सोमवार को कहा था कि महिलाओं के लिए आरक्षण की आड़ में मोदी सरकार द्वारा उठाए गए परिसीमन के कदम को नाकाम करना "बुलडोजर राजनीति" की हार थी और केंद्र का एजेंडा महिला आरक्षण नहीं बल्कि प्रधानमंत्री मोदी का "संरक्षण" है।
भाषा हक मनीषा
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