राजस्थान: भैराणा धाम को बचाने के लिए संतों का अग्नि-तप, रीको परियोजना के खिलाफ प्रदर्शन
खारी
- 24 Apr 2026, 05:20 PM
- Updated: 05:20 PM
जयपुर, 24 अप्रैल (भाषा) जयपुर के पास बिचून में संतों ने प्रस्तावित औद्योगिक परियोजना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है और आरोप लगाया कि इस परियोजना के कारण बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई होगी तथा धार्मिक स्थल 'भैराणा धाम' को खतरा पैदा हो जाएगा।
कुछ संतों ने भीषण गर्मी के बीच उपलों से बनी धूणियों के पास बैठकर 'अग्नि-तप' किया।
स्थानीय समिति के सदस्यों के अनुसार यह विरोध प्रदर्शन राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास और निवेश निगम (रीको) द्वारा लगभग 330 एकड़ जमीन पर प्रस्तावित निवेश क्षेत्र परियोजना के खिलाफ है।
'दादूपालका भैराणा संघर्ष समिति' के सदस्यों ने आरोप लगाया कि सरकारी रिकॉर्ड में इस जमीन को गलत तरीके से 'बंजर जमीन' बताया गया है, जबकि यह भूमि संत दादू दयाल से जुड़ा पवित्र स्थल मानी जाती है।
उनका कहना है कि यहां पहले ही हजारों पेड़ काटे जा चुके हैं।
समिति के एक प्रवक्ता ने मीडिया से कहा, ''यह पवित्र स्थल और पर्यावरण को बचाने की लड़ाई है। हम इसे किसी भी हाल में निवेश क्षेत्र में तब्दील नहीं होने देंगे।''
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उन्होंने इस महीने की शुरुआत में प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर 10 दिन का अल्टीमेटम दिया था, जब कोई जवाब नहीं मिला तो उन्होंने आंदोलन और तेज कर दिया।
उन्होंने कहा कि यह विरोध प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा जब तक प्रस्तावित औद्योगिक विकास परियोजना को पूरी तरह रद्द नहीं कर दिया जाता।
इस बीच, राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त करते हुए इसे ''खेदजनक और चिंताजनक'' बताया।
उन्होंने एक बयान में कहा, ''जयपुर के बिचून के पास भैराणा धाम में पेड़ों को बचाने के लिए संतों का 'अग्नि-तप' करना हम सबके लिए बेहद खेदजनक एवं चिंता का विषय है।''
उन्होंने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी पर कटाक्ष करते हुए कहा, ''जो पार्टी धर्म और आस्था के नाम पर लोगों की भावनाओं से खेलकर सत्ता में आई हो, आज उसी के शासन में संतों की पुकार अनसुनी की जा रही है। इससे संत समाज और आमजन में भारी आक्रोश है।''
गहलोत ने कहा, ''एक तरफ 'एक पेड़ मां के नाम' का ढोंग और दूसरी तरफ हरित आवरण को खत्म करने की जिद- यह विकास नहीं, विनाश है। भीषण गर्मी में झुलसते राजस्थान को पेड़ों की जरूरत है। आखिर पेड़ों की बलि देकर और संतों की भावनाओं को आहत कर भाजपा सरकार कौन सा निवेश लाना चाहती है, यह समझ से परे है।''
उन्होंने कहा, ''मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अविलंब ध्यान देना चाहिए। उन्हें भीषण गर्मी में तप कर रहे साधुओं के पास या तो स्वयं जाना चाहिए या अपने किसी मंत्री को भेजना चाहिए।''
गहलोत ने कहा कि भाजपा सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि निवेश के नाम पर पेड़ न काटे जाएं।
भाषा पृथ्वी खारी
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2404 1720 जयपुर