खरीफ मांग को पूरा करने के लिए उर्वरक भंडार पर्याप्त, 25 लाख टन यूरिया किया जा रहा आयात
पाण्डेय
- 24 Apr 2026, 08:52 PM
- Updated: 08:52 PM
नयी दिल्ली, 24 अप्रैल (भाषा) वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की उर्वरक सुरक्षा ''मजबूत, स्थिर एवं सुव्यवस्थित'' बनी हुई है और जून से शुरू होने वाले आगामी खरीफ बुवाई सत्र के लिए आपूर्ति को और मजबूत करने हेतु अतिरिक्त 25 लाख टन यूरिया आयात किया जा रहा है।
उर्वरक विभाग ने शुक्रवार को बयान में बाजार में कमी के हालिया ''दावों'' को खारिज करते हुए कहा कि देशभर में भंडार की स्थिति ''संतोषजनक'' बनी है।
इसमें कहा गया, '' भारत की उर्वरक सुरक्षा मजबूत, स्थिर एवं सुव्यवस्थित बनी हुई है और सभी प्रमुख उर्वरकों की उपलब्धता लगातार आवश्यकता से अधिक है।"
भारत घरेलू मांग को पूरा करने के लिए बड़ी मात्रा में उर्वरकों का आयात करता है। गत वित्त वर्ष में देश ने 100 लाख टन से अधिक यूरिया का आयात किया था।
चालू वित्त वर्ष के पहले 23 दिन में उर्वरकों की उपलब्धता आवश्यकता से काफी अधिक रही है।
यूरिया की उपलब्धता 69.33 लाख टन है जबकि आवश्यकता 18.17 लाख टन है। डाय-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) की उपलब्धता 22.78 लाख टन है जबकि आवश्यकता 5.90 लाख टन है। म्यूरिएट ऑफ पोटाश की उपलब्धता 8.32 लाख टन है और आवश्यकता 1.73 लाख टन है। एनपीके की उपलब्धता 52.75 लाख टन है जबकि आवश्यकता 7.46 लाख टन है, और एसएसपी की उपलब्धता 25.60 लाख टन है जो 3.30 लाख टन आवश्यक है।
विभाग ने कहा, '' यह आगामी खरीफ सत्र के लिए मजबूत शुरुआती स्थिति को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।''
खरीफ फसलों की बुवाई जून से दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन के साथ शुरू होती है। पिछले वर्ष की तुलना से भी भंडार की बेहतर स्थिति स्पष्ट होती है।
अप्रैल 2026 के मध्य तक यूरिया का भंडार 67.37 लाख टन है जबकि पिछले वर्ष यह 68.01 लाख टन था जो उच्च स्तर को दर्शाता है। वहीं डीएपी का भंडार उल्लेखनीय रूप से बढ़कर 22.16 लाख टन हो गया है जो पिछले वर्ष 13.01 लाख टन था। एनपीके का भंडार 41.85 लाख टन से बढ़कर 57.44 लाख टन हो गया है जो प्रमुख पोषक तत्वों की श्रेणियों में भंडार में उल्लेखनीय मजबूती को दर्शाता है।
विभाग ने कहा, ''यह सुधार बेहतर योजना, अधिक भंडारण और आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन में सुधार को दर्शाता है।''
खरीफ 2026 की तैयारी को और मजबूत करते हुए उर्वरकों की आवश्यकता 390.54 लाख टन आंकी गई है जिसमें से करीब 180 लाख टन (46 प्रतिशत) पहले से ही शुरुआती भंडार के रूप में उपलब्ध है जो सामान्यतः सत्र से पहले के करीब 33 प्रतिशत स्तर से काफी अधिक है।
यह सरकार द्वारा बेहतर योजना, अग्रिम भंडारण और प्रभावी लॉजिस्टिक प्रबंधन को दर्शाता है।
आयात के संबंध में सरकार ने कहा कि आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय कदम उठाए गए हैं और विदेशों में भारतीय मिशन वैकल्पिक स्रोतों की व्यवस्था में लगे हैं।
बयान के अनुसार, '' इसके अतिरिक्त, वैश्विक निविदा के माध्यम से लगभग 25 लाख टन यूरिया सुनिश्चित किया गया है जिससे अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितताओं के बावजूद आगामी सत्र के लिए आपूर्ति मजबूत होगी।''
घरेलू यूरिया उत्पादन के लिए प्राकृतिक गैस की उपलब्धता से जुड़े मुद्दों का भी समाधान किया गया है और उर्वरक संयंत्रों को लगातार आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। साथ ही आवश्यकता अनुसार अतिरिक्त एलएनजी/आरएलएनजी की व्यवस्था की जा रही है।
वैश्विक उर्वरक कीमतों में तेज वृद्धि के बावजूद (जहां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यूरिया की कीमत 4,000 रुपये प्रति बोरी से अधिक हो गई है) सरकार किसानों को वैश्विक कीमतों के उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए 45 किलोग्राम प्रति बोरी पर 266.5 रुपये की अत्यधिक सब्सिडी दर पर यूरिया उपलब्ध करा रही है।
बयान में कहा गया, '' उर्वरक विभाग दोहराता है कि भारत का उर्वरक तंत्र मजबूत, पर्याप्त भंडारित और प्रभावी रूप से प्रबंधित है। सरकार देशभर में किसानों को उर्वरकों की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाती रहेगी।''
राज्यों को उर्वरकों की हेराफेरी, जमाखोरी, कालाबाजारी और दहशत फैलाने के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की सलाह दी गई है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उर्वरक किसानों तक समय पर और समान रूप से पहुंचें।
भाषा निहारिका पाण्डेय
पाण्डेय
2404 2052 दिल्ली