भारत की बौद्धिक संपदा व्यवस्था डब्ल्यूटीओ के अनुरूप: जीटीआरआई
रमण
- 01 May 2026, 05:35 PM
- Updated: 05:35 PM
नयी दिल्ली, एक मई (भाषा) भारत विभिन्न देशों को जेनेरिक दवाओं का निर्यात करता है जिससे वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य देखभाल लागत को कम करने में मदद मिलती है। साथ ही देश की बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीओ) व्यवस्था पूरी तरह वैश्विक व्यापार नियमों के अनुरूप है। आर्थिक शोध संस्थान जीटीआरआई ने शुक्रवार को यह बात कही।
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने कहा कि भारत वैश्विक जेनेरिक दवाओं की लगभग 20 प्रतिशत आपूर्ति करता है जिससे उसकी आईपी नीति वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण बन जाती है।
अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) के कार्यालय द्वारा 30 अप्रैल को जारी 2026 की 'स्पेशल 301 रिपोर्ट' में भारत को फिर से 'प्राथमिकी निगरानी सूची' में रखा गया है जो भारत में दवा क्षेत्र से संबंधित बौद्धिक संपदा संरक्षण और प्रवर्तन को लेकर अमेरिकी दबाव को दर्शाता है।
जीटीआरआई ने कहा कि 'स्पेशल 301' प्रक्रिया कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है बल्कि यह एक प्रशासनिक समीक्षा है जिसका उपयोग अमेरिका दबाव के हथियार के रूप में करता है। यह तत्काल दंड नहीं लगाती लेकिन मुद्दे बढ़ने पर बातचीत, जांच और कभी-कभी व्यापारिक कार्रवाई का कारण बन सकती है।
जीटीआरआई ने कहा कि भारत 2025 और 2024 में भी 'प्राथमिकी निगरानी सूची' में था जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह एक बार की कार्रवाई नहीं बल्कि लगातार बनी स्थिति है। भारत 1990 के दशक से इस सूची में बना हुआ है जो विशेषकर दवा क्षेत्र में बौद्धिक संपदा नीति को लेकर अमेरिका के साथ लंबे समय से चले आ रहे मतभेदों को दर्शाता है।
जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, '' कुल मिलाकर, जहां अमेरिका कमजोर आईपी संरक्षण की बात करता है, वहीं भारत का रुख है कि वह पूरी तरह विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के अनुरूप है और वास्तविक अंतर तो सख्त 'ट्रिप्स-प्लस' (बौद्धिक संपदा अधिकारों के व्यापार-संबंधी पहलू) मानकों को अपनाने से इनकार करने में निहित है।''
उन्होंने कहा कि भारत दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत जेनेरिक दवाओं की आपूर्ति करता है और ये दवाएं आमतौर पर दामों को 80-90 प्रतिशत तक कम कर देती हैं।
श्रीवास्तव ने कहा, '' धारा 3(डी) और अनिवार्य लाइसेंसिंग जैसे प्रावधान इसलिए आवश्यक हैं और उपलब्ध साक्ष्य बताते हैं कि भारत ने नवाचार एवं उपलब्धता के बीच संतुलन बनाए रखा है। सस्ती स्वास्थ्य सेवा और नीतिगत संप्रभुता की रक्षा के लिए भारत को इन सिद्धांतों का बचाव जारी रखना चाहिए।''
भाषा निहारिका रमण
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