खाद्यतेल के आयात पर बढ़ती निर्भरता का बोझ नहीं उठा सकता भारत: उद्योग निकाय एसईए
प्रेम
- 11 May 2026, 07:03 PM
- Updated: 07:03 PM
नयी दिल्ली, 11 मई (भाषा) खाद्यतेल निकाय एसईए ने सोमवार को लोगों से खाद्यतेल का कम इस्तेमाल करने की प्रधानमंत्री की अपील का स्वागत करते हुए कहा कि इससे आयात पर निर्भरता कम करने और विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिलेगी।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को पश्चिम एशिया संकट के बीच विदेशी मुद्रा बचाने के लिए खाद्यतेल की खपत कम करने, रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल घटाने, प्राकृतिक खेती और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने का आह्वान किया।
'द सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया' (एसईए) ने एक बयान में कहा कि खाद्य तेल की खपत को नियंत्रित करने को लेकर प्रधानमंत्री की अपील का आर्थिक और रणनीतिक महत्व कहीं अधिक गहरा है।
एसईए के कार्यकारी निदेशक बी वी मेहता ने कहा, ''जलवायु अनिश्चितताओं में वृद्धि, बायोडीजल अनिवार्यताओं के कारण वैश्विक वनस्पति तेल आपूर्ति में सख्ती और भू-राजनीतिक तनाव से बढ़ते जोखिमों के बीच देश के लिए दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाने का यह सही समय है। घरेलू तिलहन उत्पादन बढ़ाने के साथ संतुलित खपत की आदतें भी निर्भरता कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।''
भारत खाद्यतेल की अपनी घरेलू जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत आयात से पूरा करता है। तेल विपणन वर्ष 2024-25 के दौरान, देश ने लगभग 1.61 लाख करोड़ रुपये का 1.6 करोड़ टन खाद्यतेल का आयात किया।
खाद्यतेल निकाय ने बताया कि पश्चिम एशिया संघर्ष का माल ढुलाई, ऊर्जा की कीमतों, मुद्रा के उतार-चढ़ाव और समग्र जिंस बाजार के रुझान पर पहले ही असर पड़ चुका है। ये कारक विदेशों से होने वाली आपूर्ति पर निर्भर भारत जैसे देशों के लिए खाद्यतेल की कीमतों और आयात की लागत को प्रभावित करते हैं।
मेहता ने कहा, ''ऐसे समय में जब अल नीनो जैसे वैश्विक मौसम जोखिम कृषि उत्पादन के लिए खतरा बने हुए हैं और अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्यतेल की कीमतें अस्थिर बनी हुई हैं, भारत आयात पर बढ़ती निर्भरता का बोझ नहीं उठा सकता है।''
एसईए ने कहा कि वैश्विक कीमतें बढ़ने की स्थिति में भारत के राष्ट्रीय खजाने पर एक बड़ा बोझ (पिछले साल 18 अरब डॉलर) डालता है।
भारत इंडोनेशिया और मलेशिया से पाम तेल का आयात करता है, जबकि देश अर्जेंटीना और ब्राजील से सोयाबीन तेल लेता है।
भाषा राजेश राजेश प्रेम
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