\"केरल में मुख्यमंत्री के चयन के बाद कर्नाटक के नेतृत्व और कैबिनेट फेरबदल पर होगा फैसला\"
माधव
- 12 May 2026, 08:46 PM
- Updated: 08:46 PM
बेंगलुरु, 12 मई (भाषा) कांग्रेस की कर्नाटक इकाई के नेताओं को उम्मीद है कि केरल के मुख्यमंत्री का मुद्दा सुलझने के बाद पार्टी आलाकमान राज्य में नेतृत्व की कशमकश और बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल फेरबदल पर कोई फैसला करेगा।
कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) ने नौ अप्रैल को केरल विधानसभा का चुनाव जीता, लेकिन राष्ट्रीय पार्टी ने अभी तक अपने मुख्यमंत्री का नाम तय नहीं किया है।
वरिष्ठ नेता सतीश जारकीहोली और के एन राजन्ना ने कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन के मुद्दे पर चल रही कशमकश को जल्द से जल्द दूर करने के लिए कांग्रेस आलाकमान से अनुरोध दिया।
चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनावों के बाद कांग्रेस और राजनीतिक हलकों में नेतृत्व परिवर्तन और मंत्रिमंडल में फेरबदल को लेकर अटकलें जारी हैं।
पीडब्ल्यूडी मंत्री जारकीहोली ने यहां संवाददाताओं से कहा "केरल के मुख्यमंत्री के चयन के बाद हमारा मामला (कांग्रेस आलाकमान के समक्ष) दूसरा है। केरल के मुख्यमंत्री का मामला सुलझने के बाद वे कर्नाटक पर ध्यान देंगे। अभी थोड़ा और इंतजार करते हैं। आलाकमान को पार्टी के भीतर मौजूद (नेतृत्व के मुद्दे पर) मतभेदों और विवादों को सुलझाना चाहिए। वे इसे कैसे सुलझाते हैं, यह आलाकमान पर निर्भर है।"
उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल में फेरबदल लंबे समय से चली आ रही मांग है और इसे सुलझाया जाना चाहिए।
जब जारकीहोली से पूछा गया कि क्या मुख्यमंत्री दिल्ली जाएंगे, तो उन्होंने कहा कि सिद्धरमैया तभी जाएंगे जब आलाकमान उन्हें बुलाएगा और ऐसा केरल के मुख्यमंत्री का मामला सुलझने के बाद ही होने की संभावना है।
उन्होंने कहा, "पहले केरल के घटनाक्रम के शांत होने का इंतजार कीजिए, उसके बाद हमारी बारी है।"
उन्होंने कहा कि उनकी मांग सिर्फ इतनी है कि भ्रम की स्थिति को सुलझाया जाए और आलाकमान ने आश्वासन दिया है कि इस मुद्दे को जल्द से जल्द सुलझाया जाएगा।
जब उनसे पूछा गया कि आलाकमान के नेतृत्व में बदलाव करने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, तो मंत्री ने कहा, "मुख्यमंत्री ने खुद कहा है कि वे आलाकमान के फैसले का पालन करेंगे। मैं भी यही कहूंगा।"
पूर्व मंत्री और विधायक राजन्ना ने यह भी कहा कि चूंकि केरल के मुख्यमंत्री का चुनाव अभी होना बाकी है, इसलिए उसके बाद कर्नाटक में जो भी घटनाक्रम या बदलाव होंगे, वह देखा जाएगा।
उन्होंने संवाददाताओं से कहा, "मैंने पहले भी कहा था कि मई में कर्नाटक में राजनीतिक बदलाव होने की उम्मीद है। मई का महीना खत्म होने में अभी समय है। देखते हैं क्या होता है। राज्य में असमंजस की स्थिति है। अगर इसे सुलझाना है, तो सिद्धरमैया को पद पर बने रहने और अपने मंत्रिमंडल में फेरबदल करने की अनुमति दी जानी चाहिए... मुझे उम्मीद है कि सिद्धरमैया को अपने मंत्रिमंडल में फेरबदल करने की अनुमति दी जाएगी।"
उन्होंने कहा, "अगर आलाकमान नेतृत्व में बदलाव करना चाहता है, तो उन्हें फैसला लेने दें और ऐसा करने दें। कुछ न कुछ तो तय होना ही चाहिए, वरना इस भ्रम की स्थिति में प्रशासन ठीक से नहीं चल पाएगा। आलाकमान को जल्द से जल्द फैसला लेकर भ्रम की स्थिति को दूर करना होगा।"
उन्होंने स्पष्ट करते हुए कहा कि उनका मतलब नेतृत्व में बदलाव का नहीं है, बल्कि इस बात पर जोर देना है कि कोई फैसला लेना जरूरी है।
शिवकुमार के समर्थक 2023 के विधानसभा चुनावों में पार्टी की जीत के बाद मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के साथ हुए कथित सत्ता-साझा करने के समझौते के अनुसार उनकी पदोन्नति पर जोर दे रहे हैं। कुछ लोगों का तो यह भी दावा है कि शिवकुमार के जन्मदिन 15 मई तक "खुशखबरी" मिलने की उम्मीद है।
कांग्रेस सरकार के पांच वर्षीय कार्यकाल का पचास प्रतिशत समय 20 नवंबर, 2025 को पूरा होने के बाद मुख्यमंत्री पद में संभावित बदलाव की अटकलों के बीच सत्ताधारी पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर कशमकश जारी है।
भाषा
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