सपा सांसद बर्क संसदीय शिक्षा समिति की बैठक में नीट-यूजी प्रश्नपत्र लीक का मुद्दा उठाएंगे
शफीक
- 13 May 2026, 05:45 PM
- Updated: 05:45 PM
संभल (उप्र), 13 मई (भाषा) संभल से समाजवादी पार्टी के सांसद जिया उर रहमान बर्क ने नीट-यूजी परीक्षा रद्द होने पर चिंता व्यक्त करते हुए बुधवार को कहा कि बार-बार प्रश्नपत्र लीक की घटनाएं और प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द करना दर्शाता है कि भाजपा सरकार निष्पक्ष और सफलतापूर्वक परीक्षा आयोजित करने में नाकाम रही है।
यहां अपने आवास पर पत्रकारों से बात करते हुए बर्क ने कहा कि वह इस मुद्दे को 21 मई को होने वाली शिक्षा संबंधी संसदीय स्थायी समिति की बैठक में उठाएंगे।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार नौकरियां देने में असमर्थ है और पारदर्शी भर्ती परीक्षा सुनिश्चित करने में भी विफल रही है।
उन्होंने कहा, ''मैं संसद की शिक्षा समिति का सदस्य हूं। समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह ने 21 मई को एक बैठक बुलाई है जिसमें राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के अधिकारियों को भी बुलाया गया है। हम उनसे सवाल करेंगे कि वे सफलतापूर्वक परीक्षा आयोजित करने में क्यों विफल हो रहे हैं।''
राजस्थान के एक भाजपा कार्यकर्ता के प्रश्नपत्र लीक मामले में संलिप्त होने की खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए बर्क ने कहा, ''अगर कोई भाजपा पदाधिकारी ऐसी (प्रश्नपत्र लीक) गतिविधियों में संलिप्त है, तो यह और भी बड़ा सवाल उठाता है कि उसने तंत्र तक पहुंच कैसे हासिल की। मामले की जांच सीबीआई द्वारा की जा रही है, लेकिन जांच जल्द से जल्द पूरी की जानी चाहिए और सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।''
सपा सांसद ने यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
उन्होंने कहा, ''यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि प्रश्नपत्र लीक दोबारा न हो, अन्यथा बच्चों का भविष्य अंधकार में चला जाएगा। यह सरकार और पूरे तंत्र पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।''
नीट-यूजी विवाद का जिक्र करते हुए सांसद ने कहा कि परीक्षा रद्द होने और अनियमितताओं के कारण लाखों छात्रों और उनके परिवारों को परेशानी हुई है।
बर्क ने कहा, ''यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि लगभग 22 लाख छात्रों ने कड़ी मेहनत के साथ इस परीक्षा की तैयारी की, जबकि उनके परिवारों ने पैसा और समय लगाया। अंत में, उन्हें केवल निराशा का सामना करना पड़ा।''
यह दावा करते हुए कि पिछले एक दशक में कई परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं, बर्क ने कहा, ''पिछले 10 वर्षों में, लगभग 70 परीक्षाएं रद्द कर दी गईं। चाहे वह राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं हों, उप्र पुलिस भर्ती, बिहार पुलिस भर्ती, शिक्षक भर्ती या कनिष्ठ अभियंता भर्ती, यह तंत्र और सरकार पर एक बड़ा धब्बा बन गया है।''
भाषा सं जफर शफीक
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