'खरीद-फरोख्त' के आरोपों के बीच अन्नाद्रमुक के बागियों की मदद से टीवीके सरकार ने जीता विश्वासमत
नरेश
- 13 May 2026, 08:46 PM
- Updated: 08:46 PM
(तस्वीरों के साथ)
चेन्नई, 13 मई (भाषा) तमिलनाडु में चार दिन पहले सी जोसेफ विजय के नेतृत्व में बनी तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके)सरकार ने बुधवार को विधानसभा में द्रविड़ मुनेत्र कषगम के बहिर्गमन के बीच अन्नाद्रमुक के 25 बागियों के समर्थन से आसानी से विश्वास मत हासिल कर लिया।
विपक्ष ने टीवीके सरकार पर विधायकों की 'खरीद-फरोख्त' के आरोप लगाए, जिन्हें मुख्यमंत्री विजय ने सिरे से खारिज कर दिया।
तमिलनाडु विधानसभा में विजय को उस समय शानदार जीत मिली जब सरकार के पक्ष में 144 जबकि विरोध में केवल 22 मत पड़े। विजय सरकार के खिलाफ मतदान करने वाले सभी सदस्य ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) अध्यक्ष और विधायक एडप्पाडी के पलानीस्वामी के प्रति निष्ठा रखने वाले थे। सी वे षनमुगम-एसपी वेलुमणि सहित पार्टी के 25 अन्य विधायकों ने सरकार के पक्ष में मतदान किया, जैसा कि उन्होंने पहले ही घोषणा कर दी थी।
मुख्यमंत्री ने विश्वास मत पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि उनकी सरकार हमेशा धर्मनिरपेक्ष रहेगी और पिछली सरकारों द्वारा शुरू की गई कल्याणकारी योजनाओं को जारी रखेगी।
द्रमुक के सभी 59 विधायकों और उसकी सहयोगी देसिया मुरपोक्कू द्रविड़ कषगम (डीएमडीके) की विधायक प्रेमलता विजयकांत ने सदन से बहिर्गमन किया। पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) के चार विधायकों और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एकमात्र सदस्य मतदान में शामिल नहीं हुए।
कांग्रेस के पांच सदस्यों, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा),मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), विदुथलाई चिरुथइगल काची (वीसीके) और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के दो-दो सदस्यों ने सरकार के पक्ष में मतदान किया।अम्मा मक्कल मुनेत्र कषगम (एएमएमके) के एकमात्र विधायक एस कामराज ने भी सरकार के पक्ष में मतदान किया। उन्हें पार्टी प्रमुख टी टी वी दिनाकरन ने टीवीके का समर्थन करने के लिए 12 मई को पार्टी से निष्कासित कर दिया था।
अन्नाद्रमुक के लिए उस समय असहज स्थिति पैदा हो गई जब विश्वास मत के दौरान अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई और पार्टी नेताओं वेलुमणि-षनमुगम के नेतृत्व वाले गुट ने सरकार के पक्ष में मतदान किया।
हालांकि वेलुमणि द्वारा समर्थन की घोषणा करने से कुछ मिनट पहले ही पलानीस्वामी ने सदन में घोषणा कर दी थी कि उनकी पार्टी के विधायकों को सरकार के खिलाफ मतदान करेना होगा।
वेलुमणि-षनमुगम के नेतृत्व वाले समूह ने आदेश की अवहेलना करते हुए टीवीके सरकार का साथ दिया। पलानीस्वामी के धड़े द्वारा वेलुमणि-षनमुगम समूह के सरकार को समर्थन देने की घोषणा का विरोध करने पर हंगामे की स्थिति पैदा हो गई।
विधानसभा अध्यक्ष की जिम्मेदारी निभाने की वजह से जेसीडी प्रभाकर, अदालती मामले के कारण एक विधायक के मतदान पर रोक और मुख्यमंत्री द्वारा तिरुचिरापल्ली पूर्व निर्वाचन क्षेत्र खाली करने के कारण टीवीके की विधानसभा में मतदान के लिए प्रभावी संख्या 105 रह गई। हालांकि, ' क्रॉस-वोटिंग' की वजह से नवगठित सरकार को 144 मत मिले जो बहुमत के लिए आवश्यक 118 संख्या से कहीं अधिक है।
बहुमत न मिलने के कारण सरकार की स्थिरता पर उठ रहे सवालों के बीच, इस जीत ने पहली बार सत्ता में आई टीवीके सरकार को आवश्यक आत्मविश्वास दिया है, जिससे वह संभलकर शासन व्यवस्था को आगे बढ़ा सकेगी। हालांकि, मुख्यमंत्री विजय समेत मंत्रियों को अभी तक विभागों का आवंटन नहीं हुआ है। अगले छह महीनों तक सदन में दोबारा विश्वास अथवा अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान होने की संभावना नहीं है।
पूर्वाह्न 9:30 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होते ही, काले ब्लेज़र पहने मुख्यमंत्री विजय ने विश्वास प्रस्ताव पेश किया। विधायकों के नाम एक-एक करके पुकारने और उनका पक्ष जानने के लिए ''गणना और आकलन'' पद्धति का इस्तेमाल किया गया।
मतदान प्रक्रिया पूरी होने के बाद विधानसभाध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर ने घोषणा की कि मुख्यमंत्री द्वारा विधानसभा में विश्वास मत प्राप्त करने के लिए पेश किया गया प्रस्ताव पारित हो गया है और 144 विधायकों ने सरकार के पक्ष में मतदान किया जबकि 22 विधायकों ने विरोध किया। उन्होंने बताया कि पांच ने तटस्थ रुख अपनाया।
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) विधायक उदयनिधि स्टालिन ने टीवीके सरकार पर तीखे हमले करते हुए कहा कि सभी लोगों ने टीवीके को वोट नहीं दिया। उन्होंने कहा कि कुल 4.93 करोड़ मतों में से टीवीके को केवल 1.72 करोड़ वोट मिले, जबकि शेष 65 प्रतिशत यानी 3.21 करोड़ वोट टीवीके के खिलाफ पड़े।
द्रमुक नेता ने दावा किया कि लगभग 65 प्रतिशत लोगों ने टीवीके को नकार दिया है और सरकार पर भरोसा उन लोगों का भी धीरे-धीरे कम हो रहा है जिन्होंने अभिनय छोड़ राजनीति में आए विजय की पार्टी को वोट दिया था। उन्होंने कहा कि टीवीके के पास बहुमत नहीं है और उसने द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन के तहत चुनाव लड़ने वाली और टीवीके का विरोध करने वाली पार्टियों को एक साथ लाकर समर्थन जुटाया है।
उदयनिधि ने कामराज के समर्थन की ओर इशारा करते हुए कहा कि एएमएमके नेता टीटीवी दिनाकरन ने पहले विधायकों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया था।
कामराज एएमएमके के सदस्य थे, जो चुनाव के दौरान राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग)का एक घटक दल था और टीवीके का वैचारिक विरोधी था।
द्रमुक नेता ने कहा कि राजग के एक अन्य घटक दल एआईएडीएमके में 'लगभग फूट पड़ गई है, और एक गुट आपका समर्थन कर रहा है।'' उन्होंने सोशल मीडिया का भी जिक्र किया और दावा किया कि लोग पूछ रहे हैं, ''भ्रष्टाचारी ताकतों से हाथ मिलाने वाली सत्तारूढ़ पार्टी का वर्णन कैसे किया जाए; क्या यह एक स्वच्छ सरकार है?''
उदयनिधि ने कहा कि 'उधार' के विधायकों के कारण लोगों को सरकार के लंबे समय तक टिके रहने पर संदेह है। उन्होंने विजय पर झूठे वादे करने और कर्ज के बोझ का आरोप लगाकर ध्यान भटकाने का आरोप लगाया, जबकि द्रमुक शासनकाल में लिया गया कर्ज विकास के उद्देश्य से था।
उन्होंने कहा, ''सरकार के पास बहुमत नहीं है और न ही बुनियादी राजनीतिक ईमानदारी है, और लोगों को भरोसा नहीं है कि सरकार सुशासन देगी।''
पलानीस्वामी और डीएमडीके विधायक प्रेमलता विजयकांत दोनों ने ही विधायकों की खरीद-फरोख्त के आरोपों का जिक्र किया।
सरकार के समर्थन में पारित प्रस्ताव पर हुई चर्चा में कांग्रेस, आईयूएमएल और वीसीके के सदस्य शामिल हुए।
विजय ने जोर देकर कहा कि सरकार 'तेजी से' काम करेगी, लेकिन वह विधायकों की खरीद-फरोख्त में शामिल नहीं है।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि द्रमुक को जनता ने नकार दिया है और इसीलिए वह टीवीके का अपमान करना चाहती है। उदयनिधि के इस तंज पर कि अधिकांश जनता ने टीवीके को नकार दिया, विजय ने व्यंग्यपूर्वक पूछा कि क्या द्रमुक ने 2006 में सरकार बनाते समय 234 सीटें जीती थीं और 100 प्रतिशत वोट हासिल किए थे?
मुख्यमंत्री ने कहा कि उस समय द्रमुक ने कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाई थी। उन्होंने कहा कि द्रमुक कभी भी वास्तविकता को नहीं समझेगी और विपक्षी पार्टी पर कर्ज को लेकर निशाना साधा।
इस बीच, पलानीस्वामी ने दावा किया कि अन्नाद्रमुक के जिन विधायकों ने विश्वास प्रस्ताव के दौरान टीवीके सरकार के पक्ष में 'क्रॉस वोटिंग' की है, उन्हें कैबिनेट पद का प्रलोभन दिया गया है। अन्नाद्रमुक महासचिव ने कहा कि बागियों ने जो किया वह ''अनुचित और गैरकानूनी'' है।
पलानीस्वामी ने कहा, ''दलीय स्तर समेत पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं ने पार्टी की जीत सुनिश्चित करने और उसकी पहचान दिखाने के लिए प्रचार किया है।'' उन्होंने आरोप लगाया कि वेलुमणि धड़े ने विधानसभा में टीवीके का समर्थन करके पदाधिकारियों के साथ ''विश्वासघात'' किया है।
पलानीस्वामी ने कहा, ''कुछ लोग मंत्रिमंडल में मंत्री पद के वादे से आकर्षित हो गए और दूसरों को भी गलत रास्ते पर ले गए। यह गैरकानूनी है, न्याय के खिलाफ है।''
षणमुगम ने विजय को समर्थन देने के अपने कदम का बचाव करते हुए कहा कि टीवीके और अन्नाद्रमुक का वैचारिक एजेंडा समान है, जहां वे द्रमुक को एक 'बुरी ताकत' के रूप में देखते हैं, और इसी कारण से अन्नाद्रमुक विधायकों के धड़े ने विश्वास प्रस्ताव पर सरकार का समर्थन किया।
तमिलनाडु विधानसभा में शक्ति परीक्षण के बाद संवाददाताओं से बातचीत करते हुए षणमुगम ने पलानीस्वामी के इस दावे को खारिज कर दिया कि जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली टीवीके सरकार का समर्थन करने के बदले उन्हें ''मंत्री''पद मिलेंगे।
षणमुगम ने कहा, ''उनका (पलानीस्वामी का) दावा पूरी तरह से झूठा है और इसमें कोई सच्चाई नहीं है। हमने सरकार का समर्थन इसलिए किया क्योंकि अन्नाद्रमुक और टीवीके दोनों की विचारधारा एक ही है, द्रमुक का विरोध करना।''
उन्होंने कहा, ''अन्नाद्रुक की स्थापना दिवंगत एम.जी. रामचंद्रन ने द्रमुक को जड़ से उखाड़ फेंकने के उद्देश्य से ही की थी।''
भाषा धीरज नरेश
नरेश
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