महाराष्ट्र: अधिकारियों की विदेश यात्रा पर रोक, पुलिस को बाइक रैली की अनुमति न देने का निर्देश
मनीषा
- 14 May 2026, 03:23 PM
- Updated: 03:23 PM
मुंबई, 14 मई (भाषा) महाराष्ट्र सरकार ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के मद्देनजर खर्चों में कटौती की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अपील के बीच कई उपाय घोषित किए हैं, जिनमें अधिकारियों की विदेश यात्राओं को रद्द करना और सार्वजनिक परिवहन एवं इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना शामिल है।
बुधवार को जारी परिपत्र में राज्य सरकार ने पुलिस को भी बाइक रैलियों, जुलूसों या वाहनों के बड़े काफिले के साथ यात्रा के लिए अनुमति न देने का निर्देश दिया है।
इस बीच, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता आदित्य ठाकरे ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया "सरकार मितव्ययिता का नाटक कर रही है, जिसे फिल्माने के लिए सटीक जगहों पर कैमरे लगाए गए हैं।"
आदित्य ने भारत के मौजूदा "आर्थिक संकट" के लिए पिछले 12 वर्षों की "विफल" नीतियों को कसूरवार ठहराया।
महाराष्ट्र सरकार की ओर से जारी परिपत्र में मुख्य सचिव राजेश कुमार ने सभी विभागों, संभागीय आयुक्तों, जिलाधिकारियों और नगर आयुक्तों को ईंधन की खपत कम करने, विदेशी मुद्रा बचाने और अनावश्यक खर्चों में कटौती करने के उपाय लागू करने का निर्देश दिया।
परिपत्र में कहा गया है कि सरकारी अधिकारियों के सभी स्वीकृत विदेशी अध्ययन टूर एवं आधिकारिक दौरे रद्द कर दिए जाएं और फिलहाल किसी भी नयी विदेश यात्रा की योजना न बनाई जाए।
इसमें अधिकारियों से कहा गया है कि वे बाहरी एजेंसियों से किराये पर लिए गए इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को प्राथमिकता दें, फील्ड दौरों के दौरान कम से कम वाहनों का उपयोग करें, 'कार-पूलिंग' अपनाएं और आधिकारिक यात्रा के लिए सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करें।
परिपत्र में वरिष्ठ अधिकारियों को हफ्ते में कम से कम एक बार मेट्रो, उपनगरीय ट्रेन या सार्वजनिक बस से यात्रा करने का निर्देश दिया गया है।
इसमें कहा गया है कि राज्य, मंडल और जिला स्तर पर होने वाली सरकारी बैठकें, प्रशिक्षण कार्यक्रम और संगोष्ठी जहां भी संभव हो, वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से आयोजित की जानी चाहिए, जबकि विश्वविद्यालय और कॉलेज ऐसी गतिविधियां ऑनलाइन आयोजित करें।
परिपत्र में सरकारी विभागों से विज्ञापन सीमित करने और सजावटी रोशनी, बैनर तथा फ्लेक्स बोर्ड पर "अनावश्यक" खर्च से बचने को कहा गया है।
इसमें कार्यालयों को प्राकृतिक रोशनी का अधिकतम इस्तेमाल करने, ड्यूटी काल के बाद बिजली उपकरण बंद करने और एयर कंडीशनर (एसी) का तापमान 24 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
परिपत्र में इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन की स्थापना और पीएनजी कनेक्शन संबंधी आवेदनों को त्वरित मंजूरी देने को कहा गया है। इसमें मुंबई और अन्य प्रमुख शहरों के होटल-रेस्तरां से पीएनजी का इस्तेमाल शुरू करने का आह्वान किया गया है।
परिपत्र में प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत छतों पर सौर पैनर लगाने की योजना का विस्तार करने और प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत दोहरी प्रविष्टि वाले और फर्जी लाभार्थियों को हटाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
सरकार ने कैंटीन, स्कूल, छात्रावासों, जेल, पुलिस मेस और अस्पतालों को खाद्य तेल की खपत कम करने के लिए मेनू में संशोधन करने का निर्देश दिया है। उसने कृषि विभाग से रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने के लिए प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने का आह्वान किया है।
परिपत्र में सभी प्रशासनिक विभागों से अगले छह महीनों के लिए सलाहकारों की नियुक्ति न करने के लिए कहा गया है।
इस बीच, शिवसेना (उबाठा) नेता आदित्य ठाकरे ने खर्चों में कटौती के लिए किए जा रहे उपायों को लेकर सरकार पर निशाना साधा।
आदित्य ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "क्या अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है कि सरकार के सदस्य मितव्ययिता का नाटक कर रहे हैं और उन्हें फिल्माने के लिए कैमरे बिल्कुल सटीक जगह पर लगाए गए हैं।"
उन्होंने लिखा, "सरकार को पता है कि उसकी विफल नीतियों ने भारत को किस आर्थिक स्थिति में डाल दिया है, फिर भी नेताओं और मंत्रियों को चुनाव के दौरान अपनी यात्राओं और प्रचार पर हजारों करोड़ रुपये खर्च में कोई दिक्कत नहीं होती और अंत में वे इस तरह के नाटक में लिप्त हो जाते हैं।"
आदित्य ने आरोप लगाया कि भारत आज जिस आर्थिक संकट का सामना कर रहा है, वह केवल पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण नहीं है, बल्कि पिछले 12 वर्षों की उन आर्थिक नीतियों के कारण है, जो एक बड़ी विफलता साबित हुई हैं।
उन्होंने लिखा, "एक ऐसे देश में जहां लाखों लोग बेरोजगार हैं और नौकरियों की तलाश कर रहे हैं, वहां आंकड़ों में गलत तरीके से गरीबी को कम दिखाया जाता है - वास्तविकता के विपरीत, सरकार को लोगों को काम सौंपने और खर्चों में कटौती की अपील करने के बजाय, अपनी जिम्मेदारी, कर्तव्य और भारतीयों के लिए वह क्या कर रही है, इस बारे में पारदर्शिता बरतनी चाहिए।"
भाषा पारुल मनीषा
मनीषा
1405 1523 मुंबई