भारत का निर्यात अप्रैल में 13.78 प्रतिशत बढ़कर 43.56 अरब डॉलर पर
रमण
- 15 May 2026, 06:21 PM
- Updated: 06:21 PM
नयी दिल्ली, 15 मई (भाषा) देश का निर्यात अप्रैल में 13.78 प्रतिशत बढ़कर 43.56 अरब डॉलर पर पहुंच गया। यह पिछले चार वर्षों से अधिक समय में किसी एक महीने का उच्चतम स्तर है।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में वृद्धि से कुल निर्यात बढ़ा है।
हालांकि, आयात बढ़ने से व्यापार घाटा तीन महीने के उच्चस्तर 28.38 अरब डॉलर पर पहुंच गया।
वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल में आयात 10 प्रतिशत बढ़कर 71.94 अरब डॉलर हो गया, जो छह महीने का उच्चस्तर है। अप्रैल 2025 में व्यापार घाटा 27.1 अरब डॉलर और मार्च 2026 में 20.67 अरब डॉलर था।
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि वैश्विक तनाव के बावजूद देश का निर्यात मजबूत वृद्धि दर्ज कर रहा है। अप्रैल में निर्यात वृद्धि की रफ्तार पिछले पांच महीनों में सबसे तेज रही।
उन्होंने कहा कि कई वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी का भी निर्यात मूल्य वृद्धि में योगदान रहा है।
अप्रैल में इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं का निर्यात 40.31 प्रतिशत, मांस एवं डेयरी उत्पादों का 48 प्रतिशत, पेट्रोलियम उत्पादों का 34.66 प्रतिशत, इंजीनियरिंग वस्तुओं का 8.76 प्रतिशत और दवा उत्पादों का 7.12 प्रतिशत बढ़ा।
इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं का निर्यात बढ़कर 5.17 अरब डॉलर हो गया, जबकि पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात 9.6 अरब डॉलर रहा।
ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत बढ़कर 15 मई को 107.51 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गईं, जो 16 मार्च, 2026 के 96.04 डॉलर प्रति बैरल थी। 30 अप्रैल को यह 126.41 डॉलर प्रति बैरल के उच्चस्तर तक पहुंच गई थीं।
नए बाजारों में निर्यात विविधीकरण से भी निर्यात को बढ़ावा मिला। सिंगापुर, तंजानिया, श्रीलंका, बांग्लादेश, हांगकांग, मलेशिया, ऑस्ट्रेलिया और वियतनाम जैसे बाजारों में निर्यात में अच्छी वृद्धि दर्ज की गई।
हालांकि, पश्चिम एशिया को भारत का वस्तु निर्यात अप्रैल में 28 प्रतिशत घटकर 4.16 अरब डॉलर रह गया, जो एक वर्ष पहले इसी महीने में 5.78 अरब डॉलर था।
पश्चिम एशिया से आयात भी 31.64 प्रतिशत घटकर 10.47 अरब डॉलर रहा।
अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते मालवाहक जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है।
अप्रैल में सोने का आयात 81.69 प्रतिशत बढ़कर 5.62 अरब डॉलर और चांदी का आयात 157.16 प्रतिशत बढ़कर 41.1 करोड़ डॉलर हो गया। हालांकि, कच्चे तेल का आयात 10 प्रतिशत घटकर 18.7 अरब डॉलर रहा।
आंकड़ों के अनुसार, सेवा क्षेत्र का निर्यात अप्रैल में बढ़कर 37.24 अरब डॉलर रहने का अनुमान है, जो अप्रैल 2025 में 32.85 अरब डॉलर था। आलोच्य महीने में सेवा आयात 16.66 अरब डॉलर रहा, जो एक वर्ष पहले 16.91 अरब डॉलर था।
रुपये में गिरावट के प्रभाव के बारे में पूछे जाने पर अग्रवाल ने कहा कि अभी तक निर्यात की दिशा सकारात्मक बनी हुई है और मई के शुरुआती संकेत भी सकारात्मक दिख रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार पिछले कुछ वर्षों से उद्योगों को घरेलू मुद्रा में अंतरराष्ट्रीय व्यापार निपटान के लिए भी प्रोत्साहित कर रही है, हालांकि यह प्रक्रिया अभी शुरुआती चरण में है।
इस वर्ष अब तक रुपया डॉलर के मुकाबले छह प्रतिशत से अधिक कमजोर हो चुका है। शुक्रवार को रुपया 95.86 प्रति डॉलर (अस्थायी) पर बंद हुआ।
अग्रवाल ने कहा कि वाणिज्य मंत्रालय 2026-27 में कुल निर्यात को एक लाख करोड़ डॉलर तक पहुंचाने की दिशा में काम करेगा।
उन्होंने कहा कि 25,060 करोड़ रुपये का निर्यात प्रोत्साहन मिशन और मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) इस वर्ष निर्यात बढ़ाने में मदद करेंगे।
अग्रवाल ने कहा कि ब्रिटेन, ओमान, न्यूजीलैंड और यूरोपीय संघ के साथ हुए व्यापार समझौतों से निर्यातकों के लिए नए अवसर पैदा होंगे और आने वाले महीनों में इनमें से कुछ समझौतों के लागू होने की उम्मीद है।
भाषा योगेश रमण
रमण
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