पश्चिम एशिया में शांति के लिए भारत हर संभव सहयोग देने को तैयार : प्रधानमंत्री मोदी
अविनाश
- 15 May 2026, 05:52 PM
- Updated: 05:52 PM
(तस्वीरों सहित)
अबू धाबी, 15 मई (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ शुक्रवार को बातचीत की और कहा कि भारत पश्चिम एशिया में शांति लाने के लिए हर संभव सहयोग देने को तैयार है।
इस दौरान दोनों पक्षों ने ऊर्जा, रक्षा और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने के लिए समझौतों पर हस्ताक्षर भी किए।
मोदी ने कहा कि यूएई ने भारत में पांच अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की भी घोषणा की है।
प्रधानमंत्री और अल नाहयान की मुलाकात मोदी के पांच देशों के दौरे के पहले चरण में यूएई पहुंचने के तत्काल बाद हुई।
मोदी यूएई में लगभग ढाई घंटा ठहरे और उसके बाद नीदरलैंड के लिए रवाना हो गये।
यूएई के नेता के साथ बैठक की शुरुआत में मोदी ने कहा, ''हम यूएई पर हुए हमलों की निंदा करते हैं।''
ईरान और अमेरिकी-इजराइल युद्ध के दौरान यूएई ईरानी हमलों का शिकार हुआ है। यहां अमेरिका का एक प्रमुख सैन्य अड्डा है।
मोदी ने कहा, ''यूएई को जिस तरह से निशाना बनाया गया है, वह अस्वीकार्य है लेकिन यूएई ने जिस तरह से संयम रखते हुए मौजूदा स्थिति को संभाला है वह प्रशंसनीय है।''
प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि पश्चिम एशियाई संघर्ष का प्रभाव वैश्विक स्तर पर महसूस किया जा रहा है। उन्होंने कहा, ''भारत पश्चिम एशिया में शांति लाने के लिए हर संभव सहयोग करने को तैयार है।''
बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने कुछ महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए।
मोदी ने सोशल मीडिया पर कहा, ''यूएई की इस यात्रा के दौरान ऊर्जा, रक्षा, बुनियादी ढांचे, जहाजरानी और उन्नत प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए, जिससे भारत-यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी को नयी गति मिली।''
उन्होंने कहा, ''एक अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, यूएई ने भारत में पांच अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की घोषणा की है। इससे हमारे आर्थिक संबंध और भी मजबूत होंगे।''
विदेश मंत्रालय (एमईए) ने कहा कि इंडियन स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड (देश के सामरिक पेट्रोलियम भंडार के रखरखाव के लिए जिम्मेदार सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी) ने अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी के साथ 'सामरिक सहयोग' के उद्देश्य से एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
इसका लक्ष्य ऊर्जा सुरक्षा, भारत के पेट्रोलियम भंडार को बढ़ाने और तरल प्राकृतिक गैस (एलएनजी) और तरल पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) भंडारण केन्द्रों पर सहयोग करना है।
दोनों नेताओं ने एलपीजी में 'रणनीतिक सहयोग' समझौते पर भी हस्ताक्षर किए, जिसका उद्देश्य भारत में सबसे व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाली खाना पकाने की गैस की दीर्घकालिक आपूर्ति, आर्थिक स्थिरता और ऊर्जा साझेदारी है।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत और यूएई ने रक्षा औद्योगिक सहयोग को मजबूत करने, नवाचार और प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने और राष्ट्रीय तथा क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से एक रणनीतिक रक्षा समझौते पर भी हस्ताक्षर किए हैं।
मंत्रालय ने कहा कि चौथा समझौता गुजरात के वडीनार में एक जहाज मरम्मत केंद्र स्थापित करने और बंदरगाहों और तटीय बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने से संबंधित है, जबकि पांचवां समझौता जहाज मरम्मत में कौशल विकास की व्यवस्था से संबंधित है।
इसने कहा कि छठा समझौता भारत की कृत्रिम बुद्धिमत्ता संबंधी महत्वाकांक्षाओं को बढ़ावा देने के लिए सुपरकंप्यूटर का एक समूह स्थापित करने से संबंधित है और सातवां समझौता मजबूत बाजार और अधिक रोजगार सृजित करने के लिए पांच अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता है।
मंत्रालय ने कहा, ''यह भारत के विकास और प्रगति के लिए यूएई की निरंतर प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।''
मंत्रालय ने बयान में कहा कि शुक्रवार की चर्चा मुख्य रूप से ''ऊर्जा, व्यापार और निवेश, नीली अर्थव्यवस्था, प्रौद्योगिकी जिसमें फिनटेक भी शामिल है, रक्षा और जन-संबंधों पर केंद्रित थी। दोनों पक्षों ने पश्चिम एशिया में हो रहे घटनाक्रम और अन्य वैश्विक मुद्दों पर भी अपने विचार साझा किए।''
इससे पहले यूएई पहुंचने पर प्रधानमंत्री का हवाई अड्डे पर राष्ट्रपति ने स्वागत किया, जो मोदी की यात्रा को यूएई द्वारा दिए जा रहे महत्व को दर्शाता है। मोदी को गारद सलामी दी गई।
एक विशेष सम्मान के तौर पर, उनके विमान की यूएई के सैन्य विमानों ने अगवानी की।
वार्ता से पहले किये गए पोस्ट में उन्होंने कहा, '' मैं ऊर्जा, निवेश, आपूर्ति शृंखला और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में भारत और यूएई के बीच संबंधों को मजबूत करने के उद्देश्य से होने वाली हमारी चर्चाओं के लिए उत्सुक हूं।''
यूएई दौरे के बाद मोदी व्यापार, प्रौद्योगिकी, निवेश और हरित परिवर्तन समेत विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली की यात्रा करेंगे।
भाषा
देवेंद्र अविनाश
अविनाश
1505 1752 अबू धाबी