लोकसभा सचिवालय खरीद के संबंध में आरटीआई का जवाब नहीं देने का कारण बताए: सीआईसी
नरेश
- 15 May 2026, 05:38 PM
- Updated: 05:38 PM
नयी दिल्ली, 15 मई (भाषा) केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने लोकसभा सचिवालय को 2021-22 के दौरान लगभग 1.7 करोड़ रुपये के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की खरीद से जुड़े बिलों की जानकारी देने से इनकार करने के फैसले पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया है।
आयोग ने कहा कि सचिवालय या तो बिलों की प्रतियां उपलब्ध कराए या फिर जानकारी न देने के स्पष्ट कारण बताए।
यह आदेश सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत तीसरे पक्ष के विक्रेताओं से प्रतिक्रिया प्राप्त करने के बाद दिया गया।
मामला एक आरटीआई आवेदन से जुड़ा है, जिसमें 2021-22 के दौरान खरीदे गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर हुए खर्च की जानकारी मांगी गई थी जिसमें बिलों की प्रतियां और पुराने गैजेट्स का ब्योरा शामिल है।
आदेश में उद्धृत रिकॉर्ड के अनुसार, लोकसभा सचिवालय ने आवेदक को बताया कि उक्त अवधि में कंप्यूटर हार्डवेयर और अन्य परिधीय उपकरणों की खरीद पर कुल 1,70,06,897 रुपये खर्च किए गए। इनमें लैपटॉप, डेस्कटॉप, प्रिंटर, स्कैनर, यूपीएस सिस्टम और टैबलेट शामिल हैं।
हालांकि, सचिवालय ने यह दावा करते हुए बिलों की प्रतियां देने से इनकार कर दिया कि खुलासा करने से किसी तीसरे पक्ष की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को नुकसान पहुंचेगा और अपीलकर्ता द्वारा कोई व्यापक जनहित स्थापित नहीं किया गया है।
अपने आदेश में, मुख्य सूचना आयुक्त राज कुमार गोयल ने कहा कि प्रतिवादी सार्वजनिक प्राधिकरण ने मदवार व्यय विवरण पहले ही प्रस्तुत कर दिया था, लेकिन सूचना के अधिकार अधिनियम की धारा 8(1)(घ) का हवाला देते हुए बिलों का खुलासा करने से इनकार कर दिया।
आयोग ने कहा, ''प्रतिवादी का इनकार न तो तर्कसंगत है और न ही सूचना के अधिकार अधिनियम की धारा 11 के तहत अपनाई गई कार्यवाही द्वारा समर्थित है।''
आयोग का यह मत है कि प्रतिवादी-लोकसभा सचिवालय के जन सूचना अधिकारी को उनके द्वारा पहले से घोषित व्यय से संबंधित बिलों के बारे में पूछे गए प्रश्न पर पुनर्विचार करना चाहिए और संशोधित उत्तर भेजना चाहिए, जिसमें या तो अपीलकर्ता को बिलों की प्रतियां उपलब्ध कराई जाएं या तीसरे पक्ष (विक्रेता/विक्रेताओं) से प्राप्त प्रतिक्रिया के आधार पर सूचना देने से इनकार करने का कारण स्पष्ट किया जाए।
गोयल ने यह भी कहा कि आयोग के निर्देश का पालन न करने पर प्रतिवादी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
भाषा संतोष नरेश
नरेश
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