सीबीआई ने नीट-यूजी प्रश्नपत्र लीक मामले के 'सरगना' को पुणे से गिरफ्तार किया
माधव
- 15 May 2026, 08:21 PM
- Updated: 08:21 PM
नयी दिल्ली, 15 मई (भाषा) केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने शुक्रवार को दावा किया कि उसने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) प्रश्नपत्र लीक मामले के कथित 'सरगना' एक प्रोफेसर को महाराष्ट्र के पुणे से गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
सीबीआई ने नीट-यूजी प्रश्नपत्र लीक मामले की जांच शुरू होने के तीन दिन के भीतर इसे सुलझाने का दावा करते हुए पुणे के एक प्रोफेसर को गिरफ्तार किया है, जिसे प्रश्नपत्र लीक का ''मुख्य स्रोत'' बताया जा रहा है।
अधिकारियों के अनुसार, रसायन विज्ञान के विशेषज्ञ और लातूर निवासी प्रोफेसर पी वी कुलकर्णी कई वर्षों से नीट प्रश्नपत्र तैयार करने वाली समितियों से जुड़े रहे हैं। प्रोफेसर कुलकर्णी को पुणे स्थित उनके आवास से हिरासत में लिया गया।
सीबीआई के एक प्रवक्ता ने कहा, ''पी वी कुलकर्णी को गहन पूछताछ के बाद पुणे से गिरफ्तार किया गया है।''
अधिकारियों के अनुसार, गोपनीय सामग्री तक विशेष पहुंच का फायदा उठाते हुए प्रोफेसर कुलकर्णी ने अप्रैल के अंतिम सप्ताह में अपने घर पर विशेष कोचिंग कक्षाएं आयोजित कीं, जिनमें उन्होंने छात्रों को वे प्रश्न, विकल्प और उत्तर लिखवाए जो तीन मई को आयोजित नीट-यूजी परीक्षा में पूछे गए थे।
सीबीआई प्रवक्ता ने बयान में कहा, ''अप्रैल 2026 के अंतिम सप्ताह में कुलकर्णी ने एक अन्य आरोपी मनीषा वाघमारे की मदद से छात्रों को संगठित किया था। मनीषा वाघमारे को सीबीआई ने 14 मई को गिरफ्तार किया था।''
उन्होंने बताया कि छात्रों ने इन विशेष कक्षाओं में शामिल होने के लिए कथित तौर पर कई लाख रुपये दिए थे। इन कक्षाओं में छात्रों ने प्रश्न अपनी नोटबुक में लिखे थे, जो बाद में तीन मई को आयोजित नीट-यूजी 2026 परीक्षा के वास्तविक प्रश्नपत्र से ''पूरी तरह मेल खाते'' थे।
प्रवक्ता ने कहा कि सीबीआई की जांच टीमों ने रसायन विज्ञान के प्रश्नपत्र लीक होने के वास्तविक स्रोत और उन बिचौलियों की पहचान कर ली है, जिन्होंने कई लाख रुपये लेकर छात्रों को इन विशेष कक्षाओं तक पहुंचाया।
उन्होंने कहा, ''पिछले 24 घंटों में सीबीआई ने देशभर में कई स्थानों पर छापेमारी की और कई आपत्तिजनक दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण तथा मोबाइल फोन जब्त किए हैं।''
प्रवक्ता ने बताया कि जब्त सामग्री की विस्तृत फॉरेंसिक और तकनीकी जांच जारी है।
सीबीआई ने बृहस्पतिवार को अहिल्यानगर से धनंजय लोखंडे और पुणे से उसकी सहयोगी मनीषा वाघमारे को गिरफ्तार किया था।
अधिकारियों ने बताया कि जांच में पता चला कि लोखंडे को प्रश्नपत्र वाघमारे से मिला था। इसके बाद लोखंडे ने इसे नासिक निवासी शुभम खैरनार को दिया, जिसने आगे इसे यश यादव तक पहुंचाया और फिर यादव ने इसे अन्य लोगों में प्रसारित किया।
सीबीआई ने जयपुर से मंगलीलाल बिवाल, विकास बिवाल और दिनेश बिवाल को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा गुरुग्राम से यश यादव और नासिक से शुभम खैरनार को भी पकड़ा गया है।
अधिकारियों के अनुसार, खैरनार ने अप्रैल में यादव को बताया था कि मंगलीलाल बिवाल अपने छोटे बेटे के लिए लीक हुए नीट-यूजी 2026 प्रश्नपत्र की व्यवस्था कराने के बदले 10 से 12 लाख रुपये देने को तैयार है।
उन्होंने बताया कि खैरनार ने कथित तौर पर यादव को 500 से 600 प्रश्न उपलब्ध कराए थे, ताकि अच्छे मेडिकल कॉलेज में दाखिले लायक अंक सुनिश्चित किए जा सकें।
अधिकारियों के मुताबिक, मंगलीलाल बिवाल ने कथित तौर पर यादव से प्रश्नपत्र हासिल किया। यादव, राजस्थान के सीकर में नीट कोचिंग के दौरान उसके बड़े बेटे विकास बिवाल का परिचित था।
उन्होंने बताया कि मंगलीलाल बिवाल और यादव के बीच यह सौदा 10 लाख रुपये में तय हुआ था। मंगलीलाल ने यह प्रश्नपत्र अपने बेटे को दिया और बाद में इसे रिश्तेदारों में भी बांटा।
अधिकारियों ने कहा कि यादव ने विकास बिवाल से यह भी कहा था कि वह नीट के और अभ्यर्थियों को ढूंढे ताकि प्रश्नपत्र बेचकर कुछ रकम वसूली जा सके।
उन्होंने बताया कि डिजिटल उपकरणों की जांच में एजेंसी को आपत्तिजनक चैट, लीक प्रश्नपत्र और अन्य डिजिटल साक्ष्य मिले हैं। हटाए गए डेटा को पुनः प्राप्त करने के लिए उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी।
सीबीआई ने तीन मई को आयोजित परीक्षा रद्द होने के बाद कथित प्रश्नपत्र लीक की जांच के लिए प्राथमिकी दर्ज कर विशेष जांच दल गठित किए हैं। राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (नीट) देश के 551 शहरों और विदेश के 14 केंद्रों पर आयोजित की गई थी।
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) द्वारा आयोजित इस परीक्षा के लिए करीब 23 लाख अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया था।
एनटीए के अनुसार, कथित अनियमितताओं की जानकारी परीक्षा के चार दिन बाद सात मई की शाम को मिली थी।
एनटीए ने कहा कि इन सूचनाओं को अगली सुबह ''स्वतंत्र सत्यापन और आवश्यक कार्रवाई'' के लिए केंद्रीय एजेंसियों को भेज दिया गया था।
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