दिल्ली चिकित्सा परिषद की ऑडिट रिपोर्ट में वित्तीय-प्रशासनिक अनियमितताओं का खुलासा: स्वास्थ्य विभाग
संतोष
- 15 May 2026, 10:18 PM
- Updated: 10:18 PM
नयी दिल्ली, 15 मई (भाषा) दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को एक विशेष ऑडिट रिपोर्ट प्राप्त हुई है, जिसमें 2019 से 2025 के बीच दिल्ली चिकित्सा परिषद (डीएमसी) में कथित वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं को उजागर किया गया है। एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई है।
बयान में कहा गया कि ऑडिट निदेशालय द्वारा तैयार की गई इस रिपोर्ट में डीएमसी अधिनियम, डीएमसी नियमों और सामान्य वित्तीय नियमों के कथित उल्लंघन की जांच की गई। साथ ही, वित्तीय अनियमितताओं और कथित अवैध मौद्रिक लाभों की वसूली की भी पड़ताल की गई है।
इसमें कहा गया कि ऑडिट के दौरान डीएमसी की विभिन्न समितियों की बैठकों के रिकॉर्ड के साथ-साथ व्यक्तिगत फाइलों, सेवा रिकॉर्ड और व्यय विवरणों की जांच की गई।
बयान के मुताबिक, "ऑडिट ने सेवानिवृत्ति की आयु के बाद सेवा विस्तार, आवश्यक अनुमोदन के बिना खर्च, वित्तीय नियमों के पालन में चूक, अनियमित भुगतान और आधिकारिक रिकॉर्ड के खराब रखरखाव जैसी कथित अनियमितताओं की ओर इशारा किया है।"
रिपोर्ट में कहा गया है कि तत्कालीन रजिस्ट्रार की सेवानिवृत्ति की आयु केंद्र और दिल्ली सरकार द्वारा समय-समय पर जारी आदेशों का कथित रूप से उल्लंघन करते हुए 60 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष कर दी गई।
इसमें समीक्षाधीन अवधि के दौरान वेतन और भत्तों, वाहन किराए पर लेने, चिकित्सा प्रतिपूर्ति, टेलीफोन खर्च, सम्मेलनों में भागीदारी और अन्य प्रशासनिक खर्चों पर हुए व्यय पर भी प्रकाश डाला गया है।
बयान के अनुसार, ऑडिट निष्कर्षों में कहा गया है कि चिकित्सकों से डीएमसी पंजीकरण नवीनीकरण के लिए कम शुल्क लेने के कारण सरकारी खजाने को 5.57 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ, जिसके लिए तत्कालीन रजिस्ट्रार को जिम्मेदार ठहराया गया है।
रिपोर्ट में वेतन, भत्ते और संबंधित खर्चों के रूप में प्राप्त 3.23 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली की भी सिफारिश की गई है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मल्टी-टास्किंग स्टाफ (एमटीएस) कर्मचारियों को एलडीसी पदों पर नियमित करने, परिषद के सदस्यों के मेडिकल बीमे पर अनियमित भुगतान और महंगे उपहारों की खरीद जैसे मामलों में 1.24 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय अनियमितताओं के लिए भी तत्कालीन रजिस्ट्रार जिम्मेदार हैं।
इसके अलावा डीएमसी अधिनियम और नियमों के तहत इस्तीफा देने के लिए जरूरी तीन महीने की अनिवार्य नोटिस अवधि के बदले लगभग 13 लाख रुपये की अतिरिक्त वसूली की भी सिफारिश की गई है।
बयान में कहा गया कि स्वास्थ्य विभाग रिपोर्ट के निष्कर्षों और सिफारिशों की जांच कर रहा है और जांच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।
दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह ने कहा कि सरकार की "सार्वजनिक संस्थानों में भ्रष्टाचार, वित्तीय कुप्रबंधन और प्रक्रियात्मक उल्लंघनों के प्रति शून्य-सहिष्णुता की नीति है।"
बयान के अनुसार, उन्होंने कहा, "सार्वजनिक संसाधनों या संस्थागत शुचिता को प्रभावित करने वाली किसी भी अनियमितता से कानून और स्थापित प्रक्रियाओं के अनुसार सख्ती से निपटा जाएगा।"
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