भारत के साथ संबंधों को ईरान 'बहुत महत्व' देता है :जयशंकर से मुलाकात के बाद अराघची ने कहा
दिलीप
- 15 May 2026, 10:22 PM
- Updated: 10:22 PM
(तस्वीरों के साथ)
नयी दिल्ली, 15 मई (भाषा) विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची के साथ पश्चिम एशिया संकट और ऊर्जा आपूर्ति एवं समुद्री स्थिरता पर इसके प्रभाव पर केंद्रित व्यापक वार्ता की।
अमेरिका और ईरान के बीच 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद दोनों देशों के बीच यह पहली व्यापक वार्ता थी।
ईरानी विदेश मंत्री 'ब्रिक्स' सम्मेलन में भाग लेने के लिए तीन दिवसीय नयी दिल्ली दौरे पर हैं।
जयशंकर ने सोशल मीडिया पर कहा, ''आज सुबह दिल्ली में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ विस्तृत बातचीत हुई।''
उन्होंने कहा, ''पश्चिम एशिया की स्थिति और इसके प्रभावों पर चर्चा की। साथ ही आपसी हित के द्विपक्षीय मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया।''
विदेश मंत्री ने ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में अराघची की भागीदारी की सराहना की।
जानकारी मिली है कि जयशंकर ने होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पर चिंता व्यक्त की, क्योंकि कई भारतीय जहाज अब भी जलमार्ग पार करने का इंतजार कर रहे हैं।
अराघची ने जयशंकर के साथ अपनी मुलाकात को 'लाभकारी' बताया। उन्होंने सोशल मीडिया मंच पर कहा, ''अपने मेजबान डॉ. एस जयशंकर के साथ सार्थक बातचीत में मैंने क्षेत्रीय घटनाक्रम पर चर्चा की और स्पष्ट किया कि ईरान होर्मुज में सुरक्षा के रक्षक के रूप में अपने ऐतिहासिक कर्तव्य का हमेशा निर्वाह करेगा।''
उन्होंने कहा, ''ईरान सभी मित्र देशों का एक विश्वसनीय साझेदार है, जिन पर व्यापारिक सुरक्षा के लिए भरोसा किया जा सकता है।''
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को बुरी तरह से अस्थिर कर दिया है, जिसका मुख्य कारण तेहरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी है। होर्मुज एक महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग है, जिससे होकर दुनिया की कुल पेट्रोलियम आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है।
जयशंकर के साथ अपनी मुलाकात के कुछ घंटों बाद अराघची ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि भारत के साथ अपने संबंधों को ईरान 'बहुत महत्व' देता है।
विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि ईरान को उम्मीद है कि होर्मुज जलडमरूमध्य जल्द ही पूरी तरह से खुल जाएगा।
उन्होंने कहा, ''जहां तक हमारा सवाल है, होर्मुज जलडमरूमध्य खुला है और हमारे साथ युद्ध कर रहे देशों के जहाजों को छोड़कर सभी जहाज वहां से गुजर सकते हैं।''
ईरानी विदेश मंत्री ने इस महत्वपूर्ण जलमार्ग और उसके आसपास की स्थिति के लिए 'अमेरिकी हमले' को जिम्मेदार ठहराया।
उन्होंने कहा, ''यह जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के क्षेत्रीय जल में स्थित है और इससे संबंधित सभी मामलों का प्रबंधन ईरान और ओमान को ही करना चाहिए।''
उन्होंने कहा, ''भविष्य में होर्मुज जलडमरूमध्य का बेहतर प्रबंधन होगा, जिससे सभी जहाजों की सुरक्षित आवाजाही की गारंटी सुनिश्चित होगी।''
भाषा संतोष दिलीप
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