सीजेआई की युवाओं की तुलना 'कॉकरोच' से करने वाली टिप्पणी अस्वीकार्य : रोहित पवार
जितेंद्र
- 16 May 2026, 01:27 PM
- Updated: 01:27 PM
मुंबई, 16 मई (भाषा) राकांपा-शरदचंद्र पवार (शप) के नेता रोहित पवार ने शनिवार को कहा कि भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की बेरोजगार युवाओं की तुलना परजीवी व कॉकरोच से करने वाली टिप्पणी ''अस्वीकार्य'' है और यह आलोचना सवाल पूछने वालों के प्रति असहिष्णुता को दर्शाती है।
कर्जत-जामखेड़ से विधायक पवार ने कहा कि वह भारतीय न्यायपालिका का बहुत सम्मान करते हैं लेकिन किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की इस तरह की टिप्पणी बेहद आहत करने वाली है और यह टूटे हुए वादों, अवसरों की कमी व बढ़ती बेरोजगारी से जूझ रही एक पूरी पीढ़ी का मजाक उड़ाने जैसी प्रतीत होती है।
प्रधान न्यायाधीश ने शुक्रवार को कुछ बेरोजगार युवाओं की तुलना कॉकरोच से करते हुए कहा था कि वे आगे चलकर मीडिया, सोशल मीडिया व आरटीआई कार्यकर्ता बन जाते हैं और फिर व्यवस्था पर हमला शुरू कर देते हैं।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा हासिल करने के लिए ''प्रयासरत'' रहने पर एक वकील को फटकार लगाते हुए यह टिप्पणी की थी।
पीठ ने कहा कि समाज में पहले से ही ऐसे ''परजीवी'' मौजूद हैं, जो व्यवस्था पर हमला करते हैं और पूछा कि क्या याचिकाकर्ता भी उनके साथ जुड़ना चाहता है।
पवार ने एक बयान में कहा कि भले ही यह टिप्पणी फर्जी डिग्री धारकों और वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा दिए जाने से संबंधित याचिकाओं के संदर्भ में की गई हो, लेकिन बेरोजगार युवाओं और आरटीआई कार्यकर्ताओं को एक ही श्रेणी में रखना अनुचित है।
उन्होंने कहा, ''भारत के युवाओं, आरटीआई कार्यकर्ताओं, मीडिया प्रतिनिधियों और अलग राय रखने वालों की तुलना परजीवियों या कॉकरोच से करना पूरी तरह अस्वीकार्य है। ऐसी भाषा आलोचकों और सवाल पूछने वालों के प्रति अत्यधिक असहिष्णुता को दर्शाती है।''
पवार ने कहा कि भ्रष्टाचार का खुलासा करने वाला एक आरटीआई कार्यकर्ता, पारदर्शिता पर सवाल उठाने वाला कानूनी पत्रकार और सत्ता से सच बोलने वाला छात्र लोकतंत्र के असली स्तंभ हैं।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शप) के नेता ने कहा कि आज का युवा अपनी इच्छा से बेरोजगार नहीं है बल्कि आर्थिक विफलताओं और राजनीतिक अक्षमता का शिकार है।
उन्होंने कहा, ''रोजगार और विकास पर बड़े-बड़े भाषणों के बावजूद लाखों शिक्षित युवा सम्मान, नौकरी और जीवनयापन के लिए संघर्ष कर रहे हैं। वे जवाबदेही और अपनी चिंताओं को व्यक्त करने के लिए एक मंच चाहते हैं।''
पवार ने न्यायपालिका से युवाओं के बारे में बोलते समय संवेदनशीलता, संयम और संवैधानिक विवेक बरतने की अपील की।
उन्होंने कहा, ''अगर संस्थाएं युवाओं द्वारा उठाए गए सवालों से डरती हैं, तो समस्या युवाओं में नहीं, बल्कि व्यवस्था में है।''
भाषा गोला जितेंद्र
जितेंद्र
1605 1327 मुंबई