भलस्वा-ओखला से इस साल और गाजीपुर से 2027 के अंत तक साफ हो जाएगा कूड़े का पहा़ड़: महापौर
माधव
- 16 May 2026, 04:35 PM
- Updated: 04:35 PM
(वरुण भंडारी)
नयी दिल्ली, 16 मई (भाषा) दिल्ली के महापौर प्रवेश वाही ने शनिवार को कहा कि दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) का लक्ष्य इस साल के अंत तक भलस्वा और ओखला में कूड़े के पहाड़ को साफ करना है जबकि गाजीपुर में कूड़े के पहाड़ को 2027 के अंत तक पूरी तरह साफ कर दिया जाएगा।
महापौर ने 'पीटीआई-भाषा' को दिए एक साक्षात्कार में दिल्ली के कूड़े के पहाड़ों को समतल करने के बारे में विस्तार से बताया और साथ ही स्वच्छता, आवारा पशु प्रबंधन, गाद निकालने के कार्यों और राजस्व सृजन से संबंधित योजनाओं की रूपरेखा भी प्रस्तुत की।
वाही ने कहा कि एमसीडी तीनों कूड़े के पहाड़ों को जैव खनन (कूड़े में मौजूद चीजों को अलग-अलग करना) पर लगातार काम कर रही है।
उन्होंने कहा, "हमारा लक्ष्य इस साल के अंत तक भलस्वा व ओखला का काम पूरा करना है। गाजीपुर पर भी काम प्रगति पर है और हमारा लक्ष्य इसे 2027 के अंत तक पूरा करना है।"
महापौर ने बताया कि इस प्रक्रिया के लिए मशीनरी लगाई जा रही है और मशीनरी लगते ही काम में तेजी लाई जाएगी।
वाही ने कुत्ते और बंदरों सहित आवारा पशुओं के मुद्दे पर कहा कि नगर निगम उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का पालन कर रहा है और बंध्याकरण अभियान व रेबीज टीकाकरण पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
उन्होंने कहा, "रोजाना बंध्याकरण किया जा रहा है। स्थिति में काफी सुधार हुआ है और हमें उम्मीद है कि आने वाले दिनों में स्थिति और बेहतर होगी। "
वाही ने स्वामी दयानंद अस्पताल में उपलब्ध व्यवस्थाओं का हवाला देते हुए कहा कि एमसीडी के कई अस्पतालों में मुफ्त रेबीज रोधी टीकाकरण उपलब्ध है और द्वारका में प्रस्तावित सहित आधुनिक डॉग शेल्टर पर काम जारी है।
महापौर ने मानसून की तैयारियों के बारे में बताया कि नगर निगम के अंतर्गत आने वाली नालियों की लगभग 70 प्रतिशत गाद निकालने का काम पूरा हो चुका है।
उन्होंने कहा, "दिल्ली भर की नालियों से लाखों टन गाद निकाली जा चुकी है। आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है और निगम छोटी नालियों की पूरी तरह सफाई के लिए अथक प्रयास कर रहा है।"
वाही ने गोबर आधारित बायोगैस संयंत्र का भी जिक्र किया, जिसके जुलाई तक शुरू होने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा, "हमने संयंत्र को जुलाई तक शुरू करने के सख्त निर्देश जारी किए हैं। यह संयंत्र 200 टन गोबर को संसाधित करके गैस उत्पन्न करेगा।"
महापौर ने कहा कि ऐसी परियोजनाओं से नालियों में जाने वाले कचरे को कम करने और गाद हटाने के प्रयासों को आसान बनाने में मदद मिलेगी।
भाषा जितेंद्र माधव
माधव
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