विशेषज्ञों ने अत्यधिक व्यायाम, 'सप्लीमेंट' के सेवन से जुड़े हृदय संबंधी खतरों के बारे में चेतावनी दी
सुरेश
- 16 May 2026, 06:10 PM
- Updated: 06:10 PM
नयी दिल्ली, 16 मई (भाषा) भारत के शहरी युवाओं में तेजी से 'बॉडी' बनाने की बढ़ती चाहत स्टेरॉयड, 'प्री-वर्कआउट पाउडर' और अनियंत्रित 'सप्लीमेंट्स' के खतरनाक दुरुपयोग को बढ़ावा दे रही है।
हृदय रोग विशेषज्ञ स्वस्थ दिखने वाले युवाओं में भी धमनियों में रुकावट, दिल का दौरा पड़ने और अचानक हृदय संबंधी समस्याओं के बढ़ते जोखिम की चेतावनी दे रहे हैं।
'इंस्टीट्यूट ऑफ हार्ट एंड लंग डिजीज' के अध्यक्ष एवं हृदय रोग सर्जन डॉ. राहुल चंदोला का कहना है कि सोशल मीडिया पर फिटनेस संस्कृति और ऑनलाइन 'सप्लीमेंट मार्केटिंग' से प्रेरित यह प्रवृत्ति जिम जाने वाले कई युवाओं को ऐसे उत्पादों एवं व्यायाम पद्धतियों की ओर धकेल रही है, जो हृदय पर गंभीर दुष्प्रभाव डाल सकती हैं।
चंदोला ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया, ''हम तेजी से ऐसे युवाओं को देख रहे हैं, जिनमें दिल की धड़कन का तेज होना, असामान्य हृदय गति, उच्च रक्तचाप और यहां तक कि अनियंत्रित 'सप्लीमेंट' या 'स्टेरॉयड' के उपयोग से जुड़े हृदय की संरचनात्मक परिवर्तनों के मामले सामने आ रहे हैं।''
उन्होंने बताया, ''चिंता की बात व्यायाम नहीं है। नियमित व्यायाम हृदय की रक्षा करता है। खतरा तब उत्पन्न होता है, जब लोग अत्यधिक व्यायाम के साथ उत्तेजक पदार्थ एवं स्टेरॉयड का इस्तेमाल करते हैं, पानी कम पीते हैं और शरीर की बनावट को लेकर अवास्तविक अपेक्षाएं रखते हैं।''
फिटनेस के शौकीन युवाओं और शौकिया बॉडीबिल्डर में अचानक बेहोशी एवं दिल का दौरा पड़ने से मौत के मामले न केवल भारत में, बल्कि विश्व स्तर पर भी चिंता का विषय बन गये हैं।
'एम्स' के कार्डियोथोरेसिक और वास्कुलर सर्जन डॉ. मयंक यादव ने बताया कि कई युवा गलत धारणा रखते हैं कि ऑनलाइन बेचे जाने वाले या इन्फ्लुएंसरों द्वारा प्रचारित 'सप्लीमेंट' चिकित्सकीय रूप से सुरक्षित हैं।
उन्होंने बताया, ''लोग सोचते हैं कि अगर कोई उत्पाद 'ई-कॉमर्स' मंच पर उपलब्ध है या फिटनेस इन्फ्लुएंसरों द्वारा इस्तेमाल किया जा रहा है, तो वह हानिरहित ही होगा। यह धारणा खतरनाक है, क्योंकि कई उत्पादों में इस्तेमाल होने वाले पदार्थों की मात्रा ठीक नहीं होती या उनका असुरक्षित मात्रा में सेवन किया जाता है।''
यादव ने कहा कि भारत की तेजी से बढ़ती फिटनेस अर्थव्यवस्था और सोशल मीडिया से प्रेरित 'फिटनेस' संस्कृति इस प्रवृत्ति में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। उन्होंने बताया कि 'इंस्टाग्राम' और 'यूट्यूब' जैसे मंच युवाओं को लक्षित करके बनाए गए वीडियो, सप्लीमेंट प्रमोशन और अत्यधिक फिटनेस चुनौतियों से भरे पड़े हैं। हाल ही में हुए अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चला कि 'एनाबॉलिक-एंड्रोजेनिक स्टेरॉयड' के इस्तेमाल से हृदय के धड़कने की क्षमता में कमी, हृदय भित्ति का मोटा होना और दिल की बनावट एवं कार्यप्रणाली में नुकसानदायक बदलाव हो सकती है।
अध्ययन के मुताबिक, इसी तरह, कई आधुनिक 'प्री-वर्कआउट' 'सप्लीमेंट' में कैफीन की बहुत अधिक मात्रा, उत्तेजक व प्रदर्शन बढ़ाने वाले यौगिकों का मिश्रण हृदय गति एवं रक्तचाप को बढ़ा सकता है और संवेदनशील व्यक्तियों में खतरनाक हृदय संबंधी प्रभाव उत्पन्न कर सकता है।
चंदोला ने बताया कि एक और गंभीर समस्या को नजरअंदाज किया जा रहा है, जो है आक्रामक व्यायाम क्रिया या अत्यधिक फिटनेस दिनचर्या शुरू करने से पहले हृदय स्वास्थ्य की उचित जांच का अभाव।
उन्होंने बताया, "कई युवाओं में पहले से ही कुछ छिपी हुई या अंतर्निहित हृदय संबंधी असामान्यताएं हो सकती हैं, जिनका निदान तब तक नहीं हो पाता जब तक कि तीव्र व्यायाम के दौरान कोई गंभीर दुर्घटना न हो जाए।"
यादव ने जिम जाने वाले युवाओं को बॉडी बनाने के शॉर्टकट से बचने और प्रदर्शन बढ़ाने वाले पदार्थों का उपयोग करने से पहले पेशेवर चिकित्सा सलाह लेने की भी सलाह दी।
उन्होंने बताया, "व्यायाम और फिटनेस दिनचर्या में समग्र स्वास्थ्य एवं दीर्घायु को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, न कि दिखावे या सोशल मीडिया पर लोकप्रियता पाने के लिए हृदय को खतरे में डालने को।"
भाषा जितेंद्र सुरेश
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