लश्कर के आतंकी ने 'स्लीपर मॉड्यूल' स्थापित करने के लिए घुसपैठ के बाद बाल प्रतिरोपण कराया
नरेश
- 17 May 2026, 06:24 PM
- Updated: 06:24 PM
(सुमीर कौल)
श्रीनगर, 17 मई (भाषा) प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के लिए आतंकी हमलों को अंजाम देने के उद्देश्य से जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ करने वाले एक पाकिस्तानी आतंकी ने अपने अभियान को कुछ समय के लिए रोककर बाल प्रतिरोपण का निजी सपना पूरा किया।
अधिकारियों के अनुसार मोहम्मद उस्मान जट्ट उर्फ 'चाइनीज' ने पूछताछ में बताया कि कश्मीर में जीवन उसे आतंकवादी प्रशिक्षण शिविरों में सिखाई गई बातों से बिल्कुल अलग लगा और एक दुकानदार से इसके बारे में जानने के बाद वह श्रीनगर में बाल प्रतिरोपण करवाने गया।
इस मामले की जांच राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) कर रहा है।
अधिकारियों ने रविवार को बताया कि पूछताछ के दौरान जट्ट ने घाटी के उत्तरी हिस्से से जम्मू-कश्मीर में अपनी घुसपैठ और उन स्थानों के बारे में बताया, जहां वह कुछ समय तक रुका था।
लाहौर निवासी और प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के प्रशिक्षित सदस्य जट्ट ने बताया कि उसने सिलसिलेवार हमलों को अंजाम देने के निर्देश पर सीमा पार की थी।
अधिकारियों ने बताया कि वह उत्तरी और मध्य कश्मीर में आतंकी गतिविधियों में शामिल था।
हालांकि, पूछताछ के दौरान उसने दावा किया कि लश्कर के सीमा पार प्रशिक्षण में जो बताया गया था, उसके विपरीत कश्मीर में आम जीवन की वास्तविकता को देखकर उसके उद्देश्य पूरी तरह बदल गए।
आतंकी नेटवर्क में अपने उपनाम "चाइनीज" से पहचाने जाने वाले जट्ट को पिछले महीने की शुरुआत में श्रीनगर पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उसके साथ अब्दुल्ला उर्फ़ "अबू हुरैरा" को भी पकड़ा गया था, जिसे लश्कर-ए-तैयबा का सबसे पुराना आतंकी बताया जाता है।
दोनों को जम्मू-कश्मीर के बाहर 'स्लीपर मॉड्यूल' स्थापित करने का कार्य सौंपा गया था। बाद में इस मामले को इसके राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रभावों को देखते हुए एनआईए को सौंप दिया गया।
गिरफ्तार आतंकी ने बताया कि वह कई साल से गंभीर रूप से बाल झड़ने की समस्या से जूझ रहा था, जिससे उसके आत्मसम्मान को गहरा आघात पहुंचा था। हालांकि उसने पहले बाल उगाने की प्रक्रियाओं के बारे में सुना था, लेकिन उसका मानना था कि ये केवल पश्चिमी देशों में उपलब्ध एक विलासितापूर्ण सुविधा है।
अधिकारियों ने बताया कि श्रीनगर के ऊपरी पहाड़ी इलाकों में अपने प्रवास के दौरान उसे पाकिस्तानी आतंकवादी जरगम और अब्दुल्ला उर्फ 'अबू हुरैरा' से मिलवाया गया था। उसने उन विभिन्न लोगों के बारे में भी जानकारी दी जिनके साथ वह रुका था, जिसके आधार पर श्रीनगर पुलिस ने उत्तरी कश्मीर और श्रीनगर शहर में सक्रिय आतंकी संगठन के 'ओवर ग्राउंड वर्कर्स' (ओजीडब्ल्यू) के पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ किया।
ओजीडब्ल्यू नेटवर्क के बारे में जानकारी देते हुए गिरफ्तार आतंकवादी ने बताया कि जरगम उसे एक दुकान पर ले गया और कहा कि मालिक भरोसेमंद व्यक्ति है। मालिक से बातचीत के दौरान जट्ट को पता चला कि उसने बाल प्रतिरोपण करवाया है।
इसके बाद, आतंकी दुकान मालिक से लगातार मिलने जाता रहा और उसे बाल प्रतिरोपण कराने में मदद करने के लिए राजी करता रहा। अधिकारियों ने बताया कि अंततः उसे शहर के भीतर ही इस प्रक्रिया के लिए ले जाया गया, और कई बार उसे प्रक्रिया के लिए रात भर क्लिनिक में रुकना पड़ा।
प्रक्रिया पूरी होने के बाद, जट्ट—जो पहले ही "अबू हुरैरा" से संपर्क स्थापित कर चुका था—ने एक यात्री वाहन से जम्मू की यात्रा की और बाद में पंजाब के मलेरकोटला जाने के लिए एक स्लीपर बस ली। अधिकारियों के अनुसार, वहां उसने तुर्किये के कार्यक्रम देखे और अंग्रेजी सीखने की कोशिश भी की।
अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तार आतंकी ने पूछताछ में बताया कि वह उमर उर्फ 'खरगोश' की तरह भारत से भागने के लिए एक असली आधार कार्ड, पैन कार्ड और अंततः पासपोर्ट बनवाना चाहता था। उमर किसी तरह पासपोर्ट बनवाने में कामयाब रहा और इंडोनेशिया भाग गया, जहां से उसने एक और जाली यात्रा दस्तावेज का इस्तेमाल किया और खाड़ी देश में कहीं छिप गया है।
अधिकारियों ने बताया कि पाकिस्तान के कराची निवासी उमर ने 2012 के बाद भारत में घुसपैठ की थी और 2024 में राजस्थान के जयपुर से प्राप्त जाली पासपोर्ट का इस्तेमाल करके भाग गया था।
इस लश्कर-ए-तैयबा के मॉड्यूल का खुलासा नवंबर 2025 में श्रीनगर पुलिस द्वारा "अल-फलाह मॉड्यूल" के भंडाफोड़ के लगभग छह महीने बाद हुआ। उस मामले में एक ऐसा नेटवर्क सामने आया था जिसमें उच्च शिक्षित पेशेवर, विशेषकर डॉक्टर शामिल थे, जिन्हें कट्टरपंथी बनाकर आतंकी गतिविधियों के लिए तैयार किया गया था।
आरोपियों में अल-फलाह विश्वविद्यालय के डॉक्टर उमर-उन-नबी का नाम भी शामिल था जो उस विस्फोटकों से भरी कार को चला रहा था जिसमें पिछले वर्ष 10 नवंबर को लाल किले के बाहर धमाका हुआ था। इस विस्फोट में एक दर्जन से अधिक लोगों की जान चली गई थी।
भाषा आशीष नरेश
नरेश
1705 1824 श्रीनगर