भारत इबोला की स्थिति पर कड़ी नजर रख रहा है : अधिकारी
नरेश
- 18 May 2026, 07:13 PM
- Updated: 07:13 PM
नयी दिल्ली, 18 मई (भाषा) अफ्रीका के कुछ हिस्सों में इबोला के प्रकोप ने एक बार फिर वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को बढ़ा दिया है, भारतीय अधिकारी स्थिति पर कड़ी नजर रख रहे हैं और स्वास्थ्य विशेषज्ञ देश में इसके संभावित प्रवेश को रोकने के लिए निगरानी के महत्व पर जोर दे रहे हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) और युगांडा में 300 से अधिक संदिग्ध मामलों और 90 लोगों की मौत के बाद इबोला के प्रकोप को अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल (पीएचईआईसी) घोषित कर दिया है।
भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) घटनाक्रम पर नजर रख रहा है, जबकि देश में किसी भी संदिग्ध मामले का पता चलने की स्थिति में भारत की तैयारियों, जांच तंत्र और प्रतिक्रिया रणनीति का आकलन करने के लिए एक समीक्षा बैठक भी आयोजित की गई।
इबोला एक गंभीर और अक्सर जानलेवा बीमारी है जो इबोला वायरस के कारण होती है, जो संक्रमित लोगों या जानवरों के रक्त, शरीर के तरल पदार्थ या ऊतकों के सीधे संपर्क से फैलती है।
इबोला रोग के लक्षण अचानक प्रकट हो सकते हैं और इनमें बुखार, थकान, कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द और गले में खराश शामिल हैं। इसके बाद उल्टी, दस्त, पेट दर्द, त्वचा पर चकत्ते और गुर्दे और यकृत में गड़बड़ी के लक्षण दिखाई देते हैं।
भारत में फिलहाल इबोला का कोई प्रकोप नहीं है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय यात्रा और वैश्विक संपर्क का मतलब है कि देशों को संक्रामक रोगों के खतरों के प्रति सतर्क रहना चाहिए।
दिल्ली में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के सामुदायिक चिकित्सा विभाग के प्रोफेसर डॉ. संजय राय ने कहा कि फिलहाल भारत में जोखिम का स्तर कम है।
राय ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया, "भारत में पिछले वर्षों की तुलना में हवाई अड्डों पर मजबूत जांच प्रणाली और रोग निगरानी तंत्र मौजूद हैं। हालांकि, दुनिया में कहीं भी कोई भी प्रकोप इस बात की याद दिलाता है कि संक्रामक रोग सीमाएं नहीं देखते । प्रभावित देशों से आने वाले यात्रियों पर कड़ी निगरानी रखने की आवश्यकता है।"
उन्होंने कहा कि इबोला कोविड-19 की तरह हवा के माध्यम से नहीं फैलता है, जिससे बड़े पैमाने पर सामुदायिक संक्रमण की संभावना कम हो जाती है।
भाषा
प्रशांत नरेश
नरेश
1805 1913 दिल्ली