मैं माकपा में दरिकनार नहीं, हार के कारणों की समीक्षा करेंगे: शैलजा
प्रशांत
- 18 May 2026, 07:25 PM
- Updated: 07:25 PM
नयी दिल्ली/तिरुवनंतपुरम, 18 मई (भाषा) मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की वरिष्ठ नेता के. के. शैलजा ने सोमवार को पार्टी के भीतर उन्हें दरकिनार किए जाने की अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि वाम दल हाल में हुए केरल विधानसभा चुनाव में अपनी हार के कारणों का विश्लेषण करेगा।
पार्टी की एक बैठक में भाग लेने के बाद नयी दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए केरल सरकार की पूर्व मंत्री ने कहा कि पार्टी इस झटके के कारणों का मूल्यांकन करेगी।
पेरावूर से विधानसभा चुनाव हारने वाली शैलजा ने कहा कि वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) कमजोर होने से केरल में सांप्रदायिक सद्भाव प्रभावित हो सकता है।
उनका कहना था, "यह हमारे लिए एक अप्रत्याशित परिणाम था।''
उन्होंने स्वीकार किया कि एलडीएफ को बहुत बड़ा झटका लगा है क्योंकि 2021 के चुनाव में इसकी संख्या 99 सीटों से घटकर 2026 में 35 रह गई।
उन्होंने कहा, ''हम हार के कारणों का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं। हम आकलन कर रहे हैं कि क्या बदलाव और सुधार की जरूरत है। मोर्चे का कमजोर होना राज्य के लिए अच्छा नहीं है।''
उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को विधानसभा में विपक्ष का नेता बनाए जाने का बचाव किया।
उनके अनुसार, विजयन पार्टी के पोलित ब्यूरो सदस्य हैं और इस पद के लिए किसी अन्य नेता के नाम पर विचार नहीं किया जा सकता।
जब उनसे विजयन को पोलित ब्यूरो में बने रहने की छूट देने के कारण के बारे में पूछा गया तो शैलजा ने कहा कि यह निर्णय इसलिए लिया गया क्योंकि उन्होंने पहले मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया था और अब विपक्ष के नेता बनने के लिए तैयार हैं।
उन्होंने कहा, ''विजयन को पद पर बने रहना चाहिए या नहीं, इसका फैसला पोलित ब्यूरो करेगा। भले ही विपक्ष का नेता मुख्यमंत्री के बराबर नहीं है, लेकिन लोकतांत्रिक व्यवस्था में यह एक महत्वपूर्ण पद है।"
यह पूछे जाने पर कि क्या उनकी लोकप्रियता के बावजूद उन्हें दरकिनार कर दिया गया, शैलजा ने कहा कि वह माकपा की प्रमुख निर्णय लेने वाली संस्था केंद्रीय समिति की सदस्य हैं।
उन्होंने कहा, "मैं एक गांव में पैदा हुई और पली-बढ़ी। माकपा जैसी पार्टी की केंद्रीय समिति की सदस्य बनी। इससे आगे कुछ नहीं है। मैं चार बार विधायक और एक बार मंत्री रही। पार्टी ने मुझे ये अवसर दिए।"
उन्होंने कहा कि उन्हें हालिया चुनाव लड़ने के लिए मट्टनूर से पेरावूर निर्वाचन क्षेत्र में स्थानांतरित कर दिया गया था, जो कि पार्टी की उस नीति के अनुरूप है, जिसके तहत एक नेता को एक ही सीट से केवल दो बार चुनाव लड़ने की अनुमति है।
उन्होंने कहा, "स्थिति को देखते हुए, कन्नूर में पार्टी ने मुझे प्रयोग के तौर पर पेरावूर से चुनाव लड़ने के लिए कहा। इसका मकसद मुझे दरकिनार करना नहीं था।"
भाषा
हक प्रशांत
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1805 1925 दिल्ली