सुरक्षा बलों की वीरता के कारण देश से नक्सलवाद 31 मार्च की समय सीमा से पहले खत्म हुआ: शाह
राजकुमार
- 19 May 2026, 06:43 PM
- Updated: 06:43 PM
(तस्वीरों के साथ)
जगदलपुर, 19 मई (भाषा) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को कहा कि सुरक्षा बलों की वीरता, साहस और सर्वोच्च बलिदान के कारण 31 मार्च की समय सीमा से पहले ही देश से नक्सलवाद पूरी तरह से समाप्त हो गया।
शाह ने यहां प्रेसवार्ता में कहा कि ''नक्सल मुक्त भारत अभियान" में कुछ तारीखों का ऐतिहासिक महत्व है - 13 दिसंबर, 2023, जब छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार ने शपथ ली, तब नक्सलवाद के पूर्ण उन्मूलन के लिए दृढ़ अभियान शुरू हुआ।
शाह ने कहा कि 24 अगस्त, 2024 को सभी राज्यों के पुलिस महानिदेशकों (डीजी) की एक बैठक बुलाई गई थी, जिसमें 31 मार्च, 2026 तक देश को नक्सल मुक्त बनाने का संकल्प लिया गया था।
शाह ने कहा, "तीसरी तारीख, जिसके बारे में आप सभी जानते हैं - 31 मार्च 2026 (देश से नक्सलवाद को खत्म करने के लिए केंद्र द्वारा निर्धारित समय सीमा)। सुरक्षा बलों के शौर्य, साहस और सर्वोच्च बलिदान के कारण, निर्धारित समय सीमा से पहले ही देश से नक्सलवाद का पूर्णतः उन्मूलन हो चुका है।"
उन्होंने कहा, ''केंद्र में (प्रधानमंत्री नरेन्द्र) मोदी जी की सरकार पहले से थी, लेकिन यहां पर कांग्रेस की सरकार थी। मैं बगैर संकोच के कहना चाहता हूं कि ढेर सारी गैर भाजपा सरकारों ने नक्सलवाद को खत्म करने में केंद्र सरकार का समर्थन किया है, लेकिन (छत्तीसगढ की) पिछली कांग्रेस सरकार ने नक्सल उन्मूलन अभियान में हमारा सहयोग नहीं किया था। दिसंबर 2023 में भाजपा सरकार बनने के तुरंत बाद हमने बस्तर में नक्सलवाद को समाप्त करने के लिए फिर से कवायद की।''
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, ''जब से नक्सलवाद नक्सलबाड़ी से फैलना शुरू हुआ उसके पक्षधर लोग और बुद्धिजीवी यह बता रहे थे कि नक्सलवाद इसलिए अस्तित्व में आया है कि कुछ क्षेत्र में विकास नहीं पहुंचा, जबकि यह वास्तविकता नहीं थी, विकास नहीं पहुंचने का कारण ही नक्सलवाद है। देश में कई सारे हिस्से ऐसे थे जो नक्सल प्रभावित क्षेत्र से भी ज्यादा पिछड़े हुए थे लेकिन वहां पर नक्सलवाद नहीं हुआ।''
उन्होंने कहा कि वह क्षेत्र धीरे-धीरे आगे बढ़ गए, लेकिन हमारा बस्तर और कई सारे ऐसे क्षेत्र जो नक्सलवाद प्रभावित थे जस की तरह रहे।''
शाह ने कहा कि मौजूदा स्थिति यह है कि 19 मई, 2026 तक, जो क्षेत्र कभी नक्सलवाद की गिरफ्त में थे, वहां अब विकास का एक नया स्वरूप आकार लेता हुआ दिखाई देगा।
उन्होंने कहा, ''कल ही मैंने वीर शहीद गुंडाधुर सेवा डेरा का उद्घाटन किया है। भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा यहां करीब दो सौ सुरक्षा कैंप बनाए गए। उस कैंप में सुरक्षाबल के जवान रहकर क्षेत्र की सुरक्षा की चिंता करते थे। अब बस्तर नक्सल मुक्त हो गया है। हमने तय किया है कि प्रथम चरण में 200 कैंपों में से 70 कैंप को वीर शहीद गुंडाधुर सेवा डेरा में तब्दील करेंगे। इसका उद्देश्य सरकार को गांवों में लोगों के घर तक ले जाना है। सरकारी सुविधाओं को बस्तर के हर आदिवासी भाई-बहन के घर तक ले जाना है।''
शाह ने बताया कि बस्तर वासियों को एक ही जगह पर सभी सुविधाएं मिलेंगी और इस 'कॉमन सर्विस सेंटर' के माध्यम से राज्य और केंद्र सरकार की सभी योजनाओं का लाभ मिलेगा तथा वहां आंगनबाड़ी और स्कूल भी होंगे।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि इसका उद्देश्य 50 साल से यहां विकास से दूर रह गए नागरिकों तक सभी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ पहुंचाना है।
उन्होंने कहा कि यह डेरा आर्थिक गतिविधियों का केंद्र बनेगा और इसके माध्यम से महिलाओं को आजीविका का साधन भी मिलेगा।
केंद्रीय मंत्री ने कहा, ''सेवा डेरा में गांव की डेयरी बनेगी जिससे यहां की महिलाएं अपने पशुओं का दूध वहां पहुंचा सकेंगी। हम बस्तर के हर आदिवासी नागरिक को एक गाय और एक भैंस देने वाले हैं जिनके माध्यम से सहकारी तरीके से वह दूध पूरे भारत में विपणन कर पाएंगे। इसके लिए एनडीडीबी के साथ छत्तीसगढ़ सरकार ने करार किया है। आने वाले छह माह में हम बस्तर संभाग में डेयरी का बड़ा नेटवर्क बनाने जा रहे हैं।''
शाह ने कहा, ''यहां जहां पहले बंदूक के संगीन के साए थे, वहां पर अब विकास पहुंच जाएगा और युवाओं के लिए बहुत बड़ा संदेश है कि अब तक नक्सलवादियों के कारण पूरा क्षेत्र विकास से महरूम रह गया था और उन्हें योजनाओं का लाभ नहीं मिल सका। न बिजली मिली, न स्कूल मिल सका । वहां हम सारी व्यवस्था इस सेवा डेरा के माध्यम से संपूर्ण बस्तर में करने जा रहे हैं।''
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूरे नक्सल मुक्त क्षेत्र के लिए एक लक्ष्य तय किया है कि सुरक्षा से विश्वास की यात्रा पूरी करनी है।
शाह ने कहा,''मैं ऐसा मानता हूं कि जब सुरक्षा से विश्वास, विश्वास से विकास, विकास से समृद्धि और समृद्धि से संतृप्ति की यात्रा समाप्त होगी तभी बस्तर को नक्सल मुक्त माना जाएगा। यहां से देश भर के माओवादी विचारधारा के अनुयायियों को हम संदेश देना चाहते हैं कि हिंसा किसी भी बात का समाधान नहीं है। लोकतांत्रिक मूल्य, परस्पर सहयोग और विकास की अवधारणा ही व्यक्ति के विकास की अवधारणा बन सकती है। हिंसा से किसी का विकास नहीं हो सकता न व्यक्ति का, न गांव का, न क्षेत्र का। नक्सलवाद गरीबी के कारण फैला था वह भ्रांति को दूर करने का काम शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा करेगा-- ऐसा मेरा विश्वास है।''
उन्होंने कहा, ''देश भर में जो हथियार लेकर विकास का रास्ता रोक रहे हैं उनके सामने विकास का लोकतांत्रिक मॉडल भारत की ओर से पेश किया जाएगा, इसका मुझे भरोसा है।''
शाह ने कहा, ''मैं बस्तर के सभी नागरिकों को भारत सरकार और देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की ओर से भरोसा दिलाना चाहता हूं कि अब भय से जीने की जरूरत नहीं है। यहां के आदिवासी युवा और महिला विश्वास के साथ आगे बढ़ें भारत सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार आपके साथ हैं। कंधे से कंधा मिलाकर आपके जीवन में उजाला लाने के लिए दोनों सरकार कटिबद्ध हैं।''
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, ''मैं बस्तर की जनता को आगाह करना चाहता हूं कि जो लोग माओवादी विचार से प्रेरित होकर, बंदूक लेकर हमारे बस्तर को बर्बाद किया वे वेश बदल कर आएंगे, नाम बदलकर आएंगे, लेकिन आप किसी के बहकावे में मत आइए। छत्तीसगढ़ सरकार और भारत सरकार दोनों आपकी चुनी हुई सरकार है और वह लोकतांत्रिक तरीके से पूरे बस्तर का विकास करेगी। बहकाने के लिए जो आते हैं उनसे 50 साल के नुकसान का हिसाब मांगिए। ''
उन्होंने कहा कि आने वाले पांच साल में ही बस्तर पूरे देश के सभी आदिवासी संभागों में सबसे विकसित संभाग बनेगा इसका उन्हें विश्वास है।
शाह ने कहा, ''नक्सल मुक्त भारत का संपूर्ण यश सुरक्षा बलों के जवान और उनके परिजनों को जाता है।''
आत्मसमर्पित नक्सलियों से जुड़े एक सवाल के जवाब में केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, ''पुनर्वास किए हुए नक्सलियों के लिए भारत सरकार ने 20 करोड रुपए खर्च करके एक केंद्र बनाया है। जहां अभी उन्हें प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जो निरक्षर हैं उन्हें पढ़ाया जा रहा है। हम मनोवैज्ञानिक उपचार भी उन्हें दे रहे हैं। आने वाले समय में वह अपने परिवार के साथ सम्मान के साथ रहे इस प्रकार की पूरी ट्रेनिंग करने की व्यवस्था छत्तीसगढ़ सरकार और भारत सरकार ने की है। मैं मानता हूं कि जिनको स्कूल से नक्सली उठा कर ले गए और जो नक्सलवादी बने हैं उनका कोई दोष नहीं है वे तो शिकार हो गये। जिन्होंने हथियार डाल दिए उनको पूरा अधिकार है कि व्यवस्था के अंदर सम्मान के साथ उनका पुनर्वास हो।''
भाषा संजीव राजकुमार
राजकुमार
1905 1843 जगदलपुर